किसानों ने ककड़ी-टमाटर उखाड़कर फेंके, मवेशियों को खिलाए
लॉकडाउन सब्जी उगाने वाले किसानों पर भारी पड़ रहा है। शुरुआती दिनों में मंडियां पूरी तरह से बंद रही। अभी भी उचित दाम नहीं मिलने से मुनाफा तो दूर लागत निकाला भी मुश्किल हो गया। किसानों ने ककड़ी, टमाटर आदि उखाड़कर फेंक दिए हैं और मवेशियों को खिला रहे हैं। नई फसल क्या लें इसे लेकर भी असमंजस है।

30 प्रतिशत तक हुआ नुकसान

राजपुर तहसील के नागलवाड़ी के किसान जितेंद्र बरफा, प्रकाश बरफा व हरिओम बरफा ने बताया क्षेत्र में 1000 एकड़ में टमाटर व 500 एकड़ में बैंगन, टिंसी, गिलकी आदि सब्जियां उगाई जाती है। टमाटर का उत्पादन 15 अप्रैल तक होता है। लॉकडाउन के कारण कम दाम में लॉकडाउन के पहले उपज बेच दी। इसके बाद दाम नहीं मिलने से किसानों ने 10 दिन पहले ही फसल उखाड़कर फेंक दी ताकि नई फसल लगा सकें।

 हालांकि कौन सी फसल लगाएं, वे तय नहीं कर पा रहे। उन्होंने कहा महाराष्ट्र के टमाटो सॉस बनाने वाले ले जाते थे लेकिन अब वो भी नहीं आ रहे। आस-पास कोई कोल्ड स्टोरेज नहीं है। ऐसे में 30 प्रतिशत फसल फेंकना पड़ी। 50 से अधिक किसानों का लाखों का नुकसान हुआ।

बलवाड़ी में भी मवेशियों को खिला रहे ककड़ी की फसल

सेंधवा विकासखंड के बलवाड़ी निवासी विपुल लाठी ने बताया 9 एकड़ में करीब 4 लाख रुपए की लागत से ककड़ी लगाई थी। बिक्री में लिए महाराष्ट्र भेजी लेकिन सही दाम नहीं मिले। बिजासन मंदिर में कर्मचारियों व बाहर से आए लोगों के लिए भोजन बनाया जा रहा है। कुछ ककड़ी सब्जी बनाने के लिए वहां नि:शुल्क दी। जानवरों को खिलाई। अब तोड़कर फेंक रहे हैं लॉकडाउन नहीं होता तो उन्हें करीब 10 लाख तक का मुनाफा होता लेकिन झोपाली के किसान देवसिंह पटेल ने बताया आधा एकड़ में लगाई ककड़ी मवेशियों को खिला दी।

टमाटर, बैंगन और गिलकी की नहीं हो रही खरीदी- हेमा

एबी रोड पर स्थित राई निवासी किसान हेमा ने अपने आधा एकड़ खेत में बैंगन एवं गिलकी की फसल लगाई थी। उपज भी अच्छी हुई लेकिन लॉकडाउन में फसल को बेच नहीं पाए। इसके चलते उन्हें 50 हजार रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है। अब सब्जियां भी मवेशियों को खिलाना पड़ रही है। वहीं उमरियापानी गांव के किसान बारका पिता फूलसिंह ने भी आधा एकड़ खेत में टमाटर लगाए थे। कहीं पर भी खरीदी नहीं होने के कारण समय पर टमाटर बेच नहीं पाए। फसल खराब होने से उन्हें 30 से 40 हजार रुपए का नुकसान हुआ है। अब दोनों किसानों ने सरकार से मुआवजा दिलाने की मांग की है।

80 कैरेट टमाटर दिल्ली भेजा, मात्र 32 रु. मिला मुनाफा

किसान रवि गुप्ता ने बताया 15 दिन पहले 80 कैरेट टमाटर दिल्ली मंडी पहुंचाया था बिका नहीं तो वहीं छोड़ना पड़ा। प्रकाश बरफा ने बताया 6 क्विंटल बैंगन बेचने मंडी पहुंचाए थे। भाड़ा व अन्य खर्च काटकर दलाल ने केवल 32 रुपए दिए। आम दिनों में उपज बेचते तो 10-15 हजार रुपए मिलते। किसान कमल लादू गहलोत ने बताया उनके 12 एकड़ खेत में ककड़ी लगी थी। इस तरह 6 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। मुकेश गेहलोत को ढ़ाई एकड़ में 30 हजार का नुकसान हुआ।

व्यापारियों के नंबर किए शेयर

सोशल मीडिया पर किसानों का ग्रुप बनाकर व्यापारियों के नंबर शेयर किए हैं। जहां भी मंडियां खुली हैं किसान वहां के व्यापारियों से संपर्क कर सब्जियां भेज रहे हैं।

-अजय चौहान, जिला उद्यानिकी अधिकारी, बड़वानी

किसानों ने ककड़ी-टमाटर उखाड़कर फेंके, मवेशियों को खिलाए
Farmers uprooted cucumber and tomatoes, fed cattle






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