अोमान की राजधानी मस्कट में फंसे झारखंड के 13 मजदूरों का दल बुधवार की दोपहर रांची एयरपोर्ट पहुंचा। रोजी-रोटी की तलाश में ये सभी मजदूर 2017 में अोमान गए थे। लेकिन पिछले सात महीने से वेतन नहीं मिलने से इनके सामने समस्या खड़ी हो गई थी। इनके पास इतना पैसा भी नहीं था कि भारत लाैट सकें। फिर घरवालों की मदद से वतन लाैटे। गिरिडीह, हजारीबाग, बोकारो व कोडरमा जिले के 30 मजदूर एक एजेंसी के माध्यम से ओमान गए थे। वहां इनसे न अच्छा व्यवहार किया जा रहा था न वेतन दिया जा रहा था। 5 मार्च को भी कुछ मजदूर वापस आएंगे।

25 हजार रु. मिलती थी मजदूरी

गिरिडीह के निर्मल महतो ने बताया कि घर लाैटकर बहुत खुशी मिल रही है। पिछले सात महीने का दाैर बेहद खराब रहा। खाना भी ठीक से नहीं मिल रहा था। सात महीने से किसी भी मजदूर को वेतन नहीं मिला। हमलोगों को 25 हजार रुपए महीना मिलता था। हमलोग पीएलसीसी कंपनी में टावर लगाने के काम में लगे हुए थे। कुछ दिन तक पैसे मिले लेकिन बाद में मिलने बंद हाे गए।

सिकंदर अली ने की मदद : मजदूरों ने प्रवासी ग्रुप के एडमिन सिकंदर अली के माध्यम से लोगों से वतन वापसी में मदद की गुहार लगाई। इसके बाद अली ने सभी मजदूरों के घर में संपर्क किया। फिर मीडिया में जानकारी दी। अली ने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मामले में पहल करते हुए ट्विटर के माध्यम से विदेश मंत्रालय को अवगत कराया था।

सात महीने से नहीं मिल रहा था वेतन




Bokaro News - ranchi lata team of 13 workers from jharkhand stranded in oman



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