पिछले कुछ सालों में खरड़ में सैंकड़ों रिहायशी काॅलोनियों का विस्तार हुआ है। मौजूदा समय में भी खरड़ के विभिन्न क्षेत्रों सैंकड़ों की संख्या में काॅलोनियां विकसित हो रही है। जिन काॅलोनियों में लॉकडाउन से पहले कंस्ट्रक्शन जोरों पर चल रही थी।
खरड़-लांडरा रोड, खरड़-कुराली रोड, खरड़-मोरिंडा रोड, खरड़-मोहाली रोड, झुगिंया रोड, एयरपोर्ट रोड के आसपास भारी संख्या में कंस्ट्रक्शन साइट्स है जहां पर लॉकडाउन के बाद काम ठप्प पड़ गए। इन साइटस पर रह रही लेबर को प्रशासन द्वारा ही दो वक्त का खाना मुहैया करवाया जा रहा है। इस तरह लॉकडाउन के दौरान पंजाब में फंसे हजारों मजदूर है जो अपने गांव वापिस जाना चाहते है। खरड़ व आसपास के क्षेत्रों में अधिकतर लेबर यूपी, बिहार व एमपी से संबंधित है।
अब हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा लॉकडाउन में दी गई रिलेक्सेशन के तहत इस तरह विभिन्न राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने की अनुमति दे दी गई है जिसके प्रबंध राज्य सरकारों को करने होंगे। इस घोषणा के बाद पंजाब सरकार द्वारा इस तरह पंजाब में फंसे मजदूरों की ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन करके इन्हें इनके गांवों तक पहुंचा पाने की व्यवस्था की जा रही है।
मजदूर एसडीएम ऑफिस के चक्कर काट रहे हैं
जब से उक्त घोषणा हुई है तब से ही खरड़ क्षेत्रों में रहने वाले भारी संख्या में मजदूर एसडीमए ऑफिस के चक्कर काट रहे है। रविवार को भी खरड़-लांडरा रोड पर स्थित गांव खूनी माजरा की एक प्राइवेट बिल्डर की कंस्ट्रक्शन साइट से करीब 60 परिवार एसडीएम कार्यालय पहुंचे। जिनके द्वारा यहां पर एसडीएम को इंतजार किया जा रहा था कि उन्हें उनके गांवों भेजा जाए। लेकिन वहां पर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी ने इन लोगों को जानकारी देते हुए सरकार की उक्त साइट पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए कह कर वापिस भेज दिया।
करीब 4 किलोमीटर पैदल चल कर आए मजदूर एसपी निवासी सुखदेव, बिहार निवासी राधा, लक्ष्मी, राज कुमार, व अन्यों ने बताया कि पंजाब में लगे कर्फ्यू के कारण उनके पास आमदन को कोई साधन नही रहा है। वह लोग बेरोजगार हो गए है। जिस बिल्डर के पास काम करते थे वह भी इन लोगों की मदद नही कर रहा है। दो वक्त की रोटी इन लोगों को मांग कर खानी पड़ रही है। घरो में एक दाना अनाज का नही है ना ही इनके क्षेत्र में कोई राशन बांटने के लिए पहुंच रहा है। इनमें से अधिकतर लोग अपने परिवारों के साथ रहते है जिनके छोटे छोटे बच्चे भी है। ऐसे में वह लोग बहुत ही लाचार हो गए है।
अब उन्हें किसी से जानकारी हासिल हुई थी कि वह लोग अपने गांवों में जा सकते है जिसके लिए एसडीएम खरड़ द्वारा व्यवस्था की जानी है। वह सभी लोग एसडीएम से मिलने के लिए यहां पहुंचे है लेकिन यहां पर तैनात पुलिसकर्मी ने इन्हें बताया कि बाजार में जाकर साइबर कैफे से ऑनलाइन फार्म भरकर रजिस्ट्रेशन करवानी होगी। इन्होंने बताया कि इनके पास खर्चे के लिए एक भी रुपया जेब में नही है ना ही यह लोग पढ़े लिखे है जो कि ऑन लाइन फार्म भर पाऐंगे। ऐसे में वह लोग बहुत ही परेशान है इन्होंने बताया कि वह लोग अपने बिल्डर से मदद के लिए कहते है तो वह भी इनकी बात नही सुन रहा है। अब वह लोग निराश होकर वापिस जा रहे है। इन लोगों ने एसडीएम से मांग की है कि वह इनके क्षेत्र में सरकारी टीम भेजकर इनकी रजिस्ट्रेशन करवाए और इन्हें इनके गांव भेजने के प्रबंध किए जाए।

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