कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन फिर कर्फ्यू के कारण खेती के काम के लिए मजदूर मिलना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में धान की खेती का काम प्रभावित होना तय है। इस समस्या से निपटने के लिए खेतीबाड़ी विभाग की ओर से धान की सीधी बिजाई का प्रपोजल तैयार किया गया है। विभाग का मानना है कि इससे समस्या पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी। बताते चलें कि खेतीबाड़ी में 80 फीसदी तक प्रवासियों का योगदान है। प्रवासी मजदूर जहां मिल कारखानों में अपनी अहम भूमिका अदा करता है, वहां खेती के काम में भी इसका विशेष योगदान है।
आंकड़ों की बात करें तो खेती में 80 प्रतिशत योगदान दूसरे राज्यों के मजदूरों का होता है और अब उनके चले जाने से यह काम प्रभावित होगा। इसी समस्या से निपटने के लिए खेतीबाड़ी विभाग में धान की सीधी बिजाई की योजना तैयार की है। मुख्य खेतीबाड़ी अफसर डॉक्टर इंद्रजीत सिंह मोंगा कहते हैं कि बाहर के लेबर के चले जाने से दिक्कत आनी है, लेकिन शहर का कामकाज बंद होने से काफी हद तक गांव के मजदूर वापस गांव में लौट जाएंगे और वह खेती के काम में योगदान डालेंगे। डॉक्टर इंद्रजीत सिंह का कहना है कि इससे 30 से 40 परसेंट तक मजदूरों की कमी पूरी होगी, लेकिन बाकी की समस्या उसी तरह से रह जाएगी।
सीधी बिजाई ही एकमात्र विकल्प
खेतीबाड़ी अफसर डॉ. मोंगा ने बताया कि इस संकट की घड़ी में अब सीधी बिजाई ही एकमात्र विकल्प बचा है। उन्होंने बताया कि जिले में 1,46,000 हैक्टेयर रकबा धान और बासमती के नीचे है। उनका कहना है कि समस्या को देखते हुए विभाग ने कम से कम 15,000 हैक्टेयर धान की सीधी बिजाई की योजना तैयार की है और उसके लिए किसानों को मोटीवेट भी किया जा रहा है। यही नहीं, बल्कि 6000 हैक्टेयर में मक्की की खेती की भी योजना है। डॉक्टर मोंगा के मुताबिक इस पहल अकादमी से मजदूरों की समस्या काफी हद तक हल हो जाएगी। इससे जहां पानी की बचत होगी, वहीं किसान का खर्च भी कम होगा।

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