(अशोक प्रियदर्शी)कहते हैं कि आवश्यकता अविष्कार की जननी होती है। लेकिन लाॅकडाउन में नई परिभाषा गढ़ी गई है। प्रतिकूल समय सिर्फ मुश्किलें नहीं लाता बल्कि कई विकल्प भी लेकर आता है। समाज में ऐसे लोग भी होते हैं जो मुश्किलों के दास हो जाते हैं। लेकिन कुछ ऐसे लोग भी होते हैं, जो मुश्किलों के मालिक बन जाते हैं। लाॅकडाउन के 40 दिन पूरे हो चुके हैं। इनमें कुछ ऐसे लोग हैं जो मुश्किल दिनों को गिनते रहे हैं।
दूसरी तरफ, समाज में ऐसे लोग भी भरे पड़े हैं, जो मुश्किलों को अवसर माना। इस समय को यूं जाने नहीं दिया। अपने जीवन के अनुभव में कुछ न कुछ जोड़ने की कोशिश की। नवादा जिले में ऐसे लोगों की तादाद भी कम नहीं है। उन्हीं में से कुछ लोगों की कहानी सामने ला रहा हूं, जिन्होंने प्रतिकूल परिस्थिति में नई छवि गढ़ने का काम किया है। टीचर डाॅ ममता शर्मा, दीपक कुमार, प्लेयर संजना कुमारी, दीपशिखा, स्टूडेंट आकाशदीप और बुनकर जितेन्द्र पान ऐसे ही कुछ उदाहरण हैं, जिनके जीवन के लिए लाॅकडाउन सुनहरा साबित हुआ है। उनके काम के तरीके और पहचान में नई कड़ी काे जोड़ा है।
यूट्यूबर बनकर सामने आईं टीचर ममता
लॉकडाउन में टीचर डाॅ. ममता शर्मा निराश होकर नहीं बिताईं। वह एक यूटयूबर के रूप में सामने आईं। उन्होंने वाट्असप व यूटयूब के जरिए फ्री क्लासेस शुरू कर दी। डाॅ. ममता कहती हैं कि बच्चे फोन कर उनसे जानकारी मांगते थे। सबको फोन पर जवाब देना संभव नहीं था। लिहाजा, यूटयूब से यूटयूबर का तरीका सिखा, उसके बाद बच्चों एजुकेशन देना शुरू कर दी। डाॅ. ममता शर्मा 14 साल से टीचर हैं। वह इंटर स्कूल आंती में टीचर हैं। एमएड और पीएचडी डिग्रीधारी हैं। नवादा में डीएलएड की गेस्ट लेक्चर हैं। टेकारी निवासी उनके पति कमलेश शर्मा पश्चिम बंगाल के एक इंटर स्कूल के प्रिसिंपल हैं।
राइटर के रूप में सामने आए टीचर दीपक
टीचर दीपक कुमार का व्यक्तित्व एक राइटर के रूप में निखर कर सामने आया। इस अवधि में शून्य निवेश में शिक्षा पर दीपक ने आठ नवाचार लिख दिए है। नवाचार के जरिए सामग्री नहीं रहने पर भी टीचर्स और स्टूडेंटस अच्छा कर सकते हैं। पहेली, चित्र, ज्यामिति में जय, सचिव चित्र के जरिए मूल्यांकन, पेड़ पौधाे की पत्तियाें से चित्र बनाएं, माचिस की तिल्ली से गणित का चित्र कैसे बनाएं पर फोकस किया है। 33 वर्षीय दीपक एक दिव्यांग टीचर हैं। कादिरगंज के रहनेवाले हैं। वह नवसृृजित पाथमिक स्कूल हसनपुरा में सहायक टीचर हैं। हिंदी से एमए हैं।
आर्टिटस्ट के रूप में निखरी बुनकर जितेन्द्र की छवि
लॉकडाउन में जितेन्द्र कुमार पान की एक आर्टिस्ट के रूप में छवि उभरकर सामने आई है। जितेन्द्र एक चरखा का माॅडल बनाया है। लकड़ी और धागा का पूरा मिनी माॅडल बना दिया। इसमें चरखा, नटय, ड्रम शामिल है। इस मिनी माॅडल के जरिए बुनाई भी होती है। जितेन्द्र कहते हैं कि काम ठप था। इसलिए समय का सदुपयोग किया। उनकी कोशिश होगी कि इसे नारद म्यूजियम में रखा जाए। जितेन्द्र कादिरगंज के रहनेवाले हैं। वह ग्रेजुएट हैं। यह उनका पुस्तैनी घंधा है। हैंडलुम से सिल्क और तसर कपड़े का बुनाई करते आ रहे हैं।
दीपशिखा ने सीखा अकेलेप्रैक्टिस का अनुभव
ताइक्वांडों खिलाड़ी दीपशिखा ग्रुप में प्रैक्टिस किया करती थी। जब से ताइक्वांडों खेल में गई ग्राउड से नाता रहा है। अब दीपशिखा अकेले प्रैक्टिस कर रही है। दीपशिखा ने बताया यह पहला अनुभव है कि अेकेले घर में प्रैक्टिस कर रही हूं। करीब 18 वर्षीय दीपशिखा नवादा के नेहालुचक की रहनेवाली है। दीपशिखा ताइक्वांडों की नेशनल खिलाड़ी है।
स्टूडेंट आकाशदीप ने पेंटिंगमें दिखाया दम
आकाश दीप ने एक पेंटिंग बनाई है। यह पेंटिंग वैश्विक महामारी कोरोना पर केन्द्रित है। इस पेंटिंग में चिकित्सक को भगवान बताया गया है। लोगों को सोशल डिस्टेंस, साफ सफाई, वर्क फ्राम होम, सेनिटाइजेशन और मास्क के प्रयोग की अपील की गई है। सिरदला के आकाशदीप 12वीं के स्टूडेंट रहा है। वह एक ग्रामीण कस्बा का स्टूडेंट रहा है।
तेज धावक संजना बरामदेमें पूरी कर रही दौड़
लाॅकडाउन के कारण तेज धावक संजना को घर के बरामदे की प्रैक्टिश से काम चलाना पड़ रहा है। कोरोना की मुश्किलों से हार नहीं मानी है। वह घर में मेहनत से अपनी जरूरतें पूरी कर रही है। नारदीगंज के सहजपुरा गांव की 15 वर्षीय संजना 15 किमी दौड़ की गोल्ड मेडलिस्ट रही है। उसे 22 गोल्ड मेडल मिल चुका है। वह हाॅफ मैराथन की तैयारी कर रही है।

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