(गौरव शर्मा) रानीपुरा क्षेत्र.जहां पॉजिटिव मरीज मिले थे, वहां रिश्तेदारों और पड़ोसियों की जांच की तैयारी में मेडिकल टीम जुटी है। इस बीच प्रीति बाला कहती हैं एक-एक घर जाएंगे। हम सैंपल लेंगे और स्क्रीनिंग भी करेंगे लेकिन प्रोटेक्शन का क्या? एडीएम पवन जैन कहते हैं हम यहीं हैं। कुछ भी हो तुरंत फोन करें। इसके बाद चार पुलिसकर्मी (दो महिलाकर्मी, दो जवान) टीम के साथ भिजवाते हैं। टीम आगे बढ़ने से पहले तालियां बजाकर एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते हैं। झंडा चौक से दौलतगंज की गलियों की ओर टीम बढ़ती है। तंग गलियों से होकर टीम उस परिवार तक पहुंचती है, जहां कोरोना पॉजिटिव आए हैं।

दो टीमें कोरोना संक्रमित परिवारों तक तो दो उनके पड़ोस के लोगों के यहां जाती है। एक परिवार के यहां जैसे ही टीम पहुंचती है तो सायदा अंसारी से टीम जानकारी लेती है। वे बताती हैं यहां एक मरीज पॉजिटिव आया था, उनको और परिवार के लोगों को तो ले गए। हम भी उन्हीं के रिश्तेदार हैं।

टीमें सैंपल लेती हैं। इसी के नजदीक एक घर में भी टीम जाती है। जुबेर और अन्य लोग बाहर आते ही कहते हैं आप लोग मेडिकल टीम से हैं? टीम उनसे पूछती है कि घर में किसी को सर्दी-खांसी, बुखार या एेसे कोई लक्षण तो नहीं है।

वे मना करते हैं। उनकी पूरी जानकारी और मोबाइल नंबर भी लिया जाता है। एक अन्य टीम में शामिल डॉ. सरिता सिंह लोगों के सैंपल लेती हैं। डॉ. सिंह कहती हैं अब हमें लोग सपोर्ट करने लगे। वहीं, टीम की एक अन्य सदस्य कहती हैं जो लोग हमारा विरोध करते थे, वो ही अब कहने लगे हैं- आप लोग जान की बाजी लगाकर हमें बचा रहे हैं। टीम के सदस्य सारी जानकारीलेने के बाद एक बार फिर पुलिस चौकी पर पहुंचते हैं। एम्बुलेंस को तैयार रहने के लिए कहा जाता है।


तीन सदस्यों को बैठाकर बाहर लाए और दोबारा जानकारी ली, फिर क्वारेंटाइन के लिए भेजा, सुबह फिर जाएगी टीम

दौलतगंज के जिस परिवार में कोरोना पॉजिटिव आया था, उनके घरवालों के साथ वहां रहने वाले तीन अन्य सदस्यों को क्वारेंटाइन के लिए ले जाना था। उनकी सैंपलिंग हो चुकी थी। अब एम्बुलेंस गली के अंदर तक ले जाने के लिए वहीं के एक व्यक्ति मो. असलम (साहिल) आगे आते हैं।

वे कहते हैं मेरी गाड़ी के पीछे एम्बुलेंस चलाओ। गली के अंदर जिस जगह घर था वो काफी अंदर था। लिहाजा, कोने पर ही एम्बुलेंस खड़ी होती है और परिवार के तीनों सदस्यों को बैठाकर बाहर लाते हैं। इनसे दोबारा जानकारी ली जाती है, फिर इन्हें क्वारेंटाइन के लिए भेज दिया जाता है। टीम ने आठ से ज्यादा सैंपल लिए। साथ ही लोगों की स्क्रीनिंग भी की। टीम के सदस्यों को इन्हीं पूरी जानकारी लेने में देर शाम हो जाती है। फिर अगले दिन दोबारा सभी को सुबह फिर से तैयार रहने को कहा जाता है।

रिपाेर्ट -2-दतोदा, सिमरोल से- मैं राघवेंद्र बाबा। खतरों के बीच पत्रकारिता धर्म निभा रहा हूं। क्योंकि मेरे परिवार के साथ भास्कर के लाखों पाठकों को भी आज मेरी सबसे ज्यादा जरूरत है।

मैं शुक्रवार दोपहर सिमरोल पहुंचा। यहां लोग घरों में कैद हैं, जो बाहर दिखे वे दूरी बनाए हुए थे। तीन दिन पहले एक संक्रमित महिला के सिमरोल में आने की खबर के बाद से यहां लोगों में और ज्यादा चिंता है। पहले यहां की दुकानें सुबह 9 से 1 बजे तक खुलती थीं, लेकिन अब टोटल बंद हैंै। सिमरोल के लोगों का कहना है अब किसी भी बाहरी व्यक्ति से संपर्क नहीं रखना चाहते हैं। सोशल डिस्टेंस के साथ एहतियात जरूरी है। थोड़ी आगे बढ़ने पर कनाड़ा गांव के फाटे पर नाकाबंदी की गई है।

दतोदा नाका भी बंद है। पूछने पर लोगों ने बताया कि यहां के लोग बहुत डरे हुए हैं। इंदौर में मरीज बढ़ने से आसपास के लोगों में डर है, इसलिए यहां बाहरी को गांव में आने की मनाही है। यदि किसी ग्रामीण के घर रिश्तेदार आता है तो उससे भी काफी पूछताछ होती है, लेकिन गांव के लोग उससे नहीं मिलते हैं। कोशिश करते हैं वह जल्दी चला जाए। सड़क से अंदर के गांव होने के कारण इनके मुख्य मार्गों पर ही गाड़ियां, लकड़ियां लगाकर बंद कर दिए हैं।

सुरक्षा ही तो उपाय है
दतोदा के सरपंच पूनमचंद पटेल ने कहा कि इंदौर के कई लोग संक्रमित हो चुके हैं। वे अब गांवों में जाकर बीमारी फैला सकते हैं। कई लोगों ने खेतों पर जाना बंद कर दिया है। हम भी नहीं चाहते हैं कि कोई गांव में आए। इसलिए घेराबंदी की गई है। यही हाल शिव नगर फाटे, असरावदखुर्द फाटे, रालामंडल के आगे और भी कई गांवों में हैं।

हर किसी को सैनिटाइज करते हैं
सिमरोल के ढाबा संचालक मानसिंह राजावत ने कहा यहां के ग्रामीण हाथ में डंडा, चेहरे पर मास्क और सैनिटाइजर से गांव के मेन रोड की रक्षा कर रहे हैं। लॉकडाउन का सख्ती से पालन करवा रहे हैं। इंदौर में संक्रमण फैलने से भंवरकुआं से लेकर सिमरोल तक के 20 गांवों ने अपनी सीमाएं सील कर दी हैं, ताकि कोई भी व्यक्ति गांव से शहर और शहर से गांव में नहीं जा सके। यदि कोई व्यक्ति यहां आता है तो पहले उसे सैनिटाइज करते हैं। उसके बाद आगे रवाना कर देते हैं।

बाहरी व्यक्ति न आ सके, इसलिए तिल्लौर के लोगों ने की नाकाबंदी

तिल्लौर खुर्द के लोगों ने कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए गांव की सीमा सील कर ली है। गांव वाले बारी-बारी से मुख्य सड़कों पर पहरा देते हैं, ताकि कोई बाहरी व्यक्ति गांव में प्रवेश नहीं कर पाए। ये लोग स्वयं का ध्यान रखते हुए आपस में सोशल डिस्टेंस बनाए रखते हैं। हाथ की सफाई सैनिटाइजर से करते हैं। इस पहल में खुड़ैल पुलिस ने भी सहयोग का आश्वासन दिया है। गांव के लोगों ने ‘भास्कर’ को बताया कि गांव में शहर से लगे क्षेत्र के लोग बेधड़क आ जा रहे हैं और इसे रोकने के लिए प्रशासन कुछ भी नहीं कर रहा है।

इस पर गांव वालों ने स्वयं ही सड़क पर रस्सी बांधकर बाहर से आने वालों पर प्रतिबंध लगा दिया है। कई बार लोग रोकने वालों से विवाद पर आमादा हो जाते हैं, लेकिन गांव वाले उन्हें स्वयं की सुरक्षा और गांव वालों की सुरक्षा का हवाला देते हुए गांव में प्रवेश करने से रोक लेते हैं। गांव के रहने वाले बलराम पाटीदार ने बताया ग्रामीण मिलकर जरूरतमंदों तक राशन पहुंचा रहे हैं।
गांवों में बाहरी व्यक्ति के जरिए कोरोना नहीं आए, इसके लिए सीमा पर रहते हैं ग्रामीण।

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