जहां रहेगा वहीं रोशनी लुटाएगा, किसी चिराग का अपना मकां नहीं होता। यह पंक्तियां आज के दौर में हर उस व्यक्ति, कर्मचारी व अधिकारी को समर्पित हैं, जोकि कोरोना वायरस के मद्देनजर अपने निजी हितों को दरकिनार कर समाज व देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभा रहा है।
ऐसे ही एक शख्स हैं हाजीपुर ब्लॉक के एसएमओ डॉ. बलविंदर सिंह, जो पिता की मौत के बाद भी उनकी अस्थियां जल प्रवाहित नहीं करने जा सकें, क्योंकि उनके लिए निजी हित से ज्यादा लोगों का स्वास्थ्य पहले था। डीसी अपनीत रियात ने कहा कि एसएमओ हाजीपुर डॉ. बलविंदर सिंह जैसे अधिकारी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
बोले- पिता ने ही डॉक्टर बनाया, कहा करते थे- बेटा परिवार से पहले समाज की चिंता करना
डॉ. बलविंदर सिंह ने बताया कि उनके पिता उनके पास रहते थे। अभी कुछ दिन पहले पिता जी को अपने बड़े भाई के पास फरीदकोट छोड़ा था क्योंकि कोरोना वायरस के चलते वे देखभाल के लिए ज्यादा समय नहीं दे पाते थे। उनके पिता की आयु 94 वर्ष थी और वे बिल्कुल स्वस्थ थे।
अचानक 1 अप्रैल को उनका निधन हो गया। निधन की सूचना उन्हें मिली तो वे ड्यूटी पर थे। काम निपटा कर शाम को सीधा श्मशानघाट पिता के संस्कार के लिए पहुंचे और दोबारा फिर अगले दिन से ड्यूटी संभाल ली।
अस्थियां प्रवाहित करने के लिए बड़े भाई को कहा
पिता जी की अस्थियां प्रवाहित करने के लिए बड़े भाई को कहा, ताकि वे अपने ब्लॉक में अपनी ड्यूटी संभाल सके। बलविंदर सिंह ने कहा कि मन में दुख भी था कि पिता के अंतिम दिनों में वे उनके पास नहीं थे और अस्थियां प्रवाहित करने भी जा नहीं सके लेकिन सुकून इस बात का है कि वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभा रहे थे, जिसके लिए पिता ने उन्हें डाक्टर बनाया है।
उनके पिता ने ही सिखाया था कि परिवार से पहले समाज की चिंता करो और वे इसी सीख पर चल रहे हैं।
25 सब सेंटर की नियमित जांच
डॉ. बलविंदर सिंह ने बताया कि उनके ब्लॉक में 25 सब सेंटर हैं। सभी सेंटरों को नियमित तौर पर चेक किया है। ब्लॉक में 143 घरों को क्वारेंटाइन किया है। ब्लॉक में 150 एनआरआई है। सभी का नियमित फॉलोअप किया जा रहा है। डॉ. बलविंदर ने कहा कि लोग स्वस्थ रहें, इसलिए स्वास्थ्य विभाग के लोग निजी हितों को छोड़कर ड्यूटी निभा रहे हैं। जनता कफ्र्यू का पालन करें और अपने घरों में ही रहे।
Click here to see more details

Post a Comment