कोरोना लॉकडाउन से ही मजदूरों के पलायन व मौतों के आंकड़े उजागर हो रहे हैं। 25 मई से 17 अप्रैल के बीच दंतेवाड़ा के 3 मजदूरों की मौत हो गई है। इनमें से 2 की आंध्रप्रदेश व तेलंगाना में हुई, जबकि तीसरे की मौत गांव पहुंचने के दूसरे दिन ही हुई। बड़ी बात ये है कि हर साल मिर्ची तोड़ने या बोरवेल में काम करने जाने वाले मजदूरों की मौतें होती हैं, लेकिन विडंबना ये है कि इन मौतों की जानकारी का आंकड़ा खुद पंचायतों और श्रम विभाग के पास ही उपलब्ध नहीं है। मजदूरों के इतनी बड़ी संख्या में दूसरे प्रदेशों में जाने व मौतों का मामला इस साल का ही नहीं बल्कि सालों का है। कभी- कभी आलम ये होता है कि मौत के बाद उनकी लाशें भी घर नहीं पहुंच पातीं।
मजदूरों की पंजी संधारण का नियम है, लेकिन मजदूरों से जुड़े ये नियम कागजों में ही रह गए। जिन मजदूरों की मौत हुई है, उनके परिवार को आर्थिक मदद के लिए किसी तरह की पहल नहीं हुई है। मजदूरों के परिजनों का कहना है कि घर खर्च चलाने अगर यहां बेहतर काम होता तो दूसरे प्रदेशों में क्यों जाते? मजबूरी पेट की थी, इसलिए दूसरे प्रदेशों का रुख करना पड़ा था, लेकिन किसे पता बेटों की जगह लाशें वापस आएंगी।
दंतेवाड़ा जिले में महीनेभर के अंदर हुईं इनकी मौतें
तेलंगाना में बोरवेल गाड़ी में दबने से हुई थी मौत
घोटपाल के रहने वाले लक्ष्मण की मौत 17 अप्रैल को तेलंगाना में बोरवेल गाड़ी के नीचे दबने से हुई थी। इनका परिवार खेती किसानी कर जीवन यापन करता है। परिजन बताते हैं यहां काम नहीं मिलने से वह भी तेलंगाना चला गया था। 3 सालों से लगातार जा रहा था।
मिर्ची तोड़ने गए लखमा का आंधप्रदेश में मौत
गुड़से के रहने वाले लखमा की मौत 25 मार्च को आंधप्रदेश में हुई थी। लखमा वहां मिर्ची तोड़ने गया था। मौत के बाद उसे गांव तो रातों रात ठेकेदार ने भिजवा दिया, लेकिन अपने ही गांव की मिट्टी में दफनाने जगह मिलना मुश्किल हुआ। आखिर में नाले में दफनाया गया।
टीबी से पीड़ित था, आंध्र से लौटने पर तबीयत बिगड़ी
13 अप्रैल को टेटम के रहने वाले देवा की मौत हो गई थी। देवा भी आंधप्रदेश मिर्ची तोड़ने गया था। लॉकडाउन के बाद वह गांव लौटा। तबीयत बिगड़ते ही उसे जिला अस्पताल और फिर मेकॉज रेफर किया गया। रास्ते में उसकी मौत हो गई थी। वह टीबी का पेशेंट था।
सीधी बात
सुरेश गोटी, श्रम पदाधिकारी दंतेवाड़ा
सवाल- हरसाल कितने ग्रामीण पलायन करते हैं, आंकड़े हैं?
जवाब - इस साल पलायन करने वाले मजदूरों के आंकड़े हैं। पहले का नहीं है।
सवाल -दूसरे प्रदेशों में दंतेवाड़ा के कितने मजदूरों की मौत हुई है?
जवाब -दूसरे प्रदेशों में कितने मजदूरों की मौत हुई है, इसका आंकड़ा नहीं है।
सवाल -जो मजदूर पलायन करते हैं, क्या उनका रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है?
जवाब -पलायन करने वालों की पंजी संधारण का जिम्मा संबंधित ग्राम पंचायत का होता है, जिसमें नाम, नम्बर, जगह का नाम इस तरह की जानकारी लिखना जरूरी है।
सवाल -दूसरे प्रदेशों में मजदूरों की मौत होने पर उनके परिवार को किस तरह मदद दी जाती है?
जवाब -संबंधित ठेकेदार ही देता है। गंभीर बीमारी से मौत होने पर परिजनों को सरकार की तरफ से आर्थिक सहयोग राशि मिलती है। ये देखना होगा कि जिन मजदूरों की मौत हुई है, उन्हें बीमारी किस तरह की है। घोटपाल के मजदूर की मौत दुर्घटना में हुई है। प्रावधान अनुसार उनके परिवार को मदद मिलेगी।

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