लॉकडाउन में सभी तरह की आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ी है। बैंक व पोस्ट अॉफिस जाने में भी लोगों को काफी परेशानी हो रही है। ऐसे में जिले की 68 बैंक सखी ग्रामीणों के लिए योद्धा बनकर गांवों में घर-घर जा रही है और आधार बेस्ड पेमेंट कर ग्रामीणों को सरकारी योजना का लाभ देते हुए उन्हें पैसे दे रही हैं।
कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए लागू किए लॉकडाउन के कारण जिले में, जहां अति आवश्यक सेवाओं के अतिरिक्त समस्त कार्य प्रतिबंधित है। वहीं ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में भी सरकार की जनहितैषी एवं कल्याणकारी योजनाओं का लाभ हितग्राही तक लगातार पहुंचाने के लिए बैंक सखी अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रही हैं। इससे ग्रामीणों को बैंकों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं और घर बैठे उन्हें रकम मिल रहा है। इससे उन्हें आर्थिक परेशानी भी नहीं हो रही है।
कोरोना वायरस से बचाव के सुरक्षात्मक उपायों का भी पालन करते हुए बैंक सखी गांवों में जा रही हैं और ग्रामीणों को मनरेगा, उज्ज्वला की सब्सिडी, पेंशन तथा पीएम जन धन में शासन से मिलने वाली राशि का घर बैठे भुगतान करवा रही हैं। ये ग्रामीणों को लाभ देने के लिए पैदल या फिर खुद के वाहन से संबंधित गांव तक जाती हैं और साथ में बैंक से आहरित नकद राशि के साथ पंचायत भवन पहुंचती हैं और फिर हितग्राहियों को नकद राशि देती है। तोकापाल में ग्रामीणों की मदद कर रही बैंक सखी चंदा, ललिता, पुष्पांजलि, जमुना और दीनामती ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से ग्रामीण घर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। उन्हें बैंक जाने में काफी परेशानी हो रही है, इस वजह से वह ग्रामीणों के घर पहुंचकर उनके जन धन खाते की राशि, मनरेगा मजदूरी, पेंशन राशि का भुगतान कर रही हैं।
हर महीने पांच हजार रुपए तक कमा लेती हैं
बैंक सखियों को मानदेय बस्तर जिले में नहीं मिल रहा है ये लोग कमीशन बेस पर काम कर रही हैं। चिप्स के ई डिस्ट्रिक मैनेजर राकेश बट्ट ने बताया कि पिछले कुछ समय से बैंक सखियों के काम करने का दायरा बढ़ गया है। कमीशन बेस पर काम करने वाली बैंक सखियों में से एक बैंक सखी आसानी से हर महीने 5 हजार रूप कमा लेती है। ये अपना कियोस्क सेंटर खोलकर और गांव में जाकर आराम से काम कर रही हैं। बैंक सखियों के इस काम की ग्रामीणा व अफसर प्रशंसा कर रहे हैं।

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