लॉकडाउन के चलते जिले के 2902 मजदूर देश के अलग अलग राज्यों में फंसे हुए हैं। दक्षिण भारत के राज्यों में ही इनमें से 50 प्रतिशत मजदूर फंसे हंै। महाराष्ट्र जैसे कोरोना हाटस्पॉट में ही जिले के 515 मजदूर फंसे हुए हैं।
प्रदेश के छात्रों को वापस लाने के बाद इन मजदूरों में भी छग सरकार से उम्मीद जागी है। सरकार ने भी अब इन मजदूरों को वापस लाने कवायद शुरू कर दी है। 75 प्रतिशत मजदूर तो वापस आना चाहते हैं लेकिन शेष 25 प्रतिशत फिलहाल वापस नहीं लौटना चाहते। जिन्हें वापसी का बेसब्री से इंतजार हैं, कहा जा रहा है कि उन्हें संबंधित ठेकेदारों व राज्य सरकारों से मदद नहीं मिल रही। मुश्किल से दिन कट रहे हैं।
जिले से मजदूर कई प्रदेशों में मजदूरी करने जाते हैं। प्रशासन ने उनकी संख्या 2902 बताई है। दक्षिण भारत के राज्य तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, केरल में ही फंसे मजदूरों की संख्या 1796 है। शेष 1106 मजदूर उत्तर, पश्चिम व पूर्व भारत के राज्यों में फंसे हुए हैं। दक्षिण भारत में यहां से मजदूर बोरवेल गाडिय़ों में काम करने जाते हैं। अन्य क्षेत्रों में जिले के मजदूर भवन निर्माण कार्य या कारखाने में काम करने जाते हैं।
खाने के पड़े लाले, आधा पेट ही कर रहे भोजन
भास्कर ने जब देश के अलग अलग हिस्सों में फंसे इन मजदूरों से बात की तो उनकी एक ही गुहार थी कि कैसे भी जल्द से जल्द मदद की जाए तथा उन्हें वापस अपने जिले में बुलाया जाए। देश के अन्य प्रदेशों में फंसे जिले के मजदूरों में सबसे अधिक भानुप्रतापपुर तहसील के 813 व पखांजूर तहसील के 673 मजदूर हैं।
पंखाजूर इलाके के सत्यनगर बारदा, नागलदंड, विवेक नगर, पीवी 9, पीवी 89, कुरेनार आदि गांव के तमिलनाडू के चेन्नई शहर के ताम्बरम इलाके में फंसे मजदूर जयनी राय, हीरेसिंह कवाची, सूरज हालदार, मिथुन विश्वास, मृणाल विश्वास, गोकुल सरकार आदि ने कहा कि ठेकेदार व तमिलनाडु की सरकार ने कोई मदद नहीं की है।
पुलिस वाले थोड़ा सा राशन देकर गए थे वह भी खत्म हो गया। जैसे तैसे घर से पैसे मंगवा कर उससे कुछ राशन खरीद अपना आधा अधूरा पेट भर वापसी के लिए दिन काट रहे हैं। यही हाल अन्य जगहों पर फंसे मजदूरों का है।
बार्डर में जांच, फिर रहना होगा 14 दिन क्वारेंटाइन
मजदूर जिस मार्ग से छत्तीसगढ़ प्रदेश की सीमा पर पहुंचेगे उनका वहीं कोरोना टेस्ट किया जाएगा। रिर्पोट निगेटिव आने पर ही उन्हें आगे जाने अनुमति मिलेगी। जब वे अपने तहसील व गांव पहुंचेंगे तो उन्हें घर जाने नहीं दिया जाएगा। सभी को प्रशासन द्वारा अलग -अलग जगहों पर क्वारेंटाइन किया जाएगा।
जिले में फंसे मजदूरों को कर दिया गया रवाना
प्रशासन ने प्रदेश के अन्य जिलों के कांकेर में फंसे 216 मजदूरों के लिए बस आदि की व्यवस्था कर उनको उनके जिलों में भेज दिया है। नरहरपुर में फंसे राजस्थान के 96 रेहड़ी वालों को ी उनके प्रदेश के लिए रवाना किया गया। अब अन्य राज्यों में फंसे मजदूरों को वापस लाने प्रयास किया जा रहा है।

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