कांकेर को जिला बने 22 वर्ष हो चुके हैं लेकिन अभी तक जिला मुख्यालय में श्रम न्यायालय की स्थापना नहीं हो पाई है। श्रमिकों को मुआवजा तथा अन्य मामलों के लिए अभी भी धमतरी जाना पड़ता है।
गरीब मजदूरों को आने जाने में परेशानी होती है। कई मजदूर तो आर्थिक दिक्कत के कारण जा ही नहीं पाते। कई सालों से कांकेर में श्रम न्यायालय खोलने की मांग चल रही है। इधर कांकेर में काम करने वाले कुल पंजीकृत मजदूरों 62,297 में से अब तक मात्र 7 प्रतिशत यानि करीब 4500 मजदूरों को ही सुरक्षा उपकरण मिल पाया है।
जिले में 62,297 मजदूर पंजीकृत हैं जिसमें से भवन निर्माण श्रमिक 34,647 और असंगठित कर्मकार श्रमिकों की संख्या 27,650 है। धमतरी श्रम न्यायालय में कांकेर जिले के मजदूरों से संबंधित 30 प्रकरण लंबित हंै।
कांकेर में श्रम न्यायालय नहीं होने के कारण कई बार मजूदर अपने साथ हो रहे शोषण की शिकायत नहीं कर पाते हैं। श्रम संगठनों के संयोजक नजीब कुरैशी ने कहा कि जिला मुख्यालय में अलग से श्रम न्यायालय खुलने से यहीं सारे प्रकरणों का निपटारा होगा।
मजदूर उंचाई में बिना सुरक्षा उपकरण के काम करते है। उनके पास हेल्मेट, बेल्ट, जूता, जैकेट भी नहीं रहता। कई जगह पर बिना सुरक्षा उपकरण के काम करते हैं।
कांकेर में ही ऐसे कई मामले हुए जिसमें उंचाई में काम करने के दौरान हुए हादसों में मजदूरों की मौत हो चुकी है लेकिन इसके बाद भी उन्हें सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।
वर्ष 2018 में सिर्फ 4500 मजदूरों को ही सुरक्षा उपकरण मिल पाया है जबकि भवन निर्माण श्रमिकों की संख्या 34,647 है। 2019 में एक भी मजदूर को सुरक्षा उपकरण नहीं मिला।
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