बच्ची का इलाज करने वाले 18 डॉक्टर,15 नर्स, 13 वार्ड बॉय, 2 फीजियो थैरेपिस्ट समेत 54 क्वारेंटाइन
(संजीव महाजन)पीजीआई में बच्चों के वार्ड एपीसी (एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर) में भी कोराेना की एंट्री हो गई है। फगवाड़ा की 6 महीने की बच्ची रितिका यहां दिल का इलाज करवाने आई थी, लेकिन यहीं उसे कोरोना ने जकड़ लिया। बुधवार सुबह रिपोर्ट आने के बाद ही एपीसी ब्लॉक के वार्ड नंबर-4सी में दहशत फैल गई। तुरंत मासूम को कोरोना वार्ड में एडमिट कर लिया गया। नन्ही जान अब वेंटिलेटर पर अकेली है। बीच-बीच में मां को उसे देखने के लिए भेजा जा रहा है। बच्ची के पिता रामू को भी अलग से वार्ड में क्वारेंटाइन कर एडमिट कर लिया गया है। मां-बाप दोनों के ही सैंपल लिए गए हैं, जिनकी रिपोर्ट वीरवार सुबह आ जाएगी। अब बच्ची के संपर्क में आने वाले मेडिकल स्टाफ के भी टेस्ट लिए जा रहे हैं।

जो पेशेंट ऑक्सीजन के बगैर नहीं रह सकते थे, उन्हें नहीं किया गया शिफ्ट

पीजीआई के एपीसी ब्लॉक के जिस वार्ड में रितिका भर्ती थी, उस वार्ड में करीब 24 अन्य बच्ची भर्ती हैं। उन सभी को वहां से शिफ्ट करने की तैयारी की गई। लेकिन बाद में सामने आया कि करीब 16 बच्चों को ऑक्सीजन की बेहद जरूरत है। ऐसे में उन्हें कहीं और शिफ्ट नहीं किया जा सकता। इसलिए उन्हें शिफ्ट नहीं किया गया। बाकी 8 बच्चों को उनके घरवालों की मर्जी से शिफ्ट कर दिया गया। पूरे वार्ड को सेनेटाइज भी करवाया गया है।

नहीं पता, किससे हुआ कोरोना

शक: एक हेल्थ वर्कर पहले सेही पॉजिटिव मरीजों के संपर्क मेंथा, यह बात छिपाए रखी,चर्चा है कि एपीसी वार्ड में तैनात एक हेल्थ वर्कर जिसे अब क्वारेंटाइन किया गया है, वह शुक्रवार को कोरोना पॉजिटिव पीजीआई के हेल्थ वर्कर धनास निवासी और नयागांव के आदर्श नगर निवासी पीजीआई कर्मी के लगातार संपर्क में था। लेकिन उसने यह जानकारी छिपाए रखी। यह कर्मचारी एपीसी में काम करता रहा। शक है कि इससे बच्ची तक कोरोना पहुंचा? अब मामला गर्माने के बाद जांच की जा रही है।

इन पर भी नजर,डॉक्टर्स के घरवाले भी किए होम क्वारेंटाइन

पीजीआई में बच्ची के संपर्क में आए मेडिकल स्टाफ को भी क्वारेंटाइन कर लिया गया है। 54 के स्टाफ में से 49 को एडमिट कर लिया गया है। एपीसी डिपार्टमेंट के 35 में से 18 डॉक्टर्स को क्वारेंटाइन कर सैंपल लिए गए हैं। 5 लाेग जो बुधवार को पीजीआई में ड्यूटी पर नहीं थे, उन्हें भी वीरवार सुबह सैंपल लेने के लिए बुला लिया गया है। बच्ची के मां-बाप, नाना नानी को भी क्वारेंटाइन कर दिया गया है। वहीं, इस बच्ची को डॉक्टर अरुण कुमार भारनवाल के अधीन ही एडमिट किया गया था। अब उनकी टीम के डॉक्टर्स के घरवालों को भी होम क्वारेंटाइन रहने की सलाह दे दी गई है।अब सैंपल के रिपोर्ट आने का इंतजार है।





पिता की जुबानी, बेटी पहले तो ठीक थी

लॉकडाउन से पहले अचानक बेटी की तबीयत बिगड़ गई। हम जालंधर के अपोलो हॉस्पिटल ले गए। करीब 36 दिन तक वहां इलाज चलता रहा। अचानक तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर डॉक्टर्स ने हार्ट फेलियर का शक जताया और पीजीआई रेफर कर दिया। जालंधर के डीएम से पास बनवाया और 9 अप्रैल को रितिका को एंबुलेंस से लेकर पीजीआई पहुंच गए। यहां डॉक्टरों ने बताया कि मासूम के दिल में छेद है। हार्ट सर्जरी करनी पड़ेगी। लेकिन सर्जरी से पहले ही बच्ची के शरीर में इंफेक्शन हो गया। उसे अलग तरह का इंफेक्शन हुआ।

उसे बुखार के लक्षण नहीं थे। डॉक्टर ने बताया कि असलियत में उसके शरीर के ऑर्गन रिस्पाॅन्ड करना बंद हो गए हैं। डॉक्टर्स को शक हुआ कि कहीं बच्ची को कोरोना तो नहीं हो गया? मंगलवार को सैंपल लिए। बुधवार को रिपोर्ट आई तो पता चला कि नन्ही सी जान को कोरोना हो गया है। हम तो उसे ठीक लाए थे। पीजीआई के स्टाफ की वजह से ही उसे कोरोना हुआ है। -रामू, बच्ची के पिता
  • जालंधर से रेफर हुई थी मासूम
  • 2.5 किलो थाबच्ची का वजन जन्म के समय
  • 06 महीने के बाद भी वजन 3 किलो से आगे नहीं बढ़ा।
  • 36 दिन जालंधर में चला था बच्ची का इलाज, तबीयत बिगड़ी तो पीजीआई रेफर की गई
  • 09 अप्रैल को बेटी को पीजीआई लाए थे घरवाले
एचए और एसए को कुर्सियों पर बैठाकर किया क्वारेंटाइन

बच्ची के कोरोना पॉजिटिव पाने के बाद 18 डॉक्टर्स को क्वारेंटाइन कर लिया गया। 15 हॉस्पिटल अटेंडेंट और सेनिटेशन अटेंडेंट को देर रात तक मुंह पर कपड़ा बांधकर कुर्सियों पर बैठाकर क्वारेंटाइन कर लिया गया। ऐसे में यह लोग अन्य लोगों के संपर्क में आते हैं तो चेन बढ़ेगी।

बड़ा सवाल, क्या पीजीआई सेफ है?
  • पीजीआई डायरेक्टर जगतराम बोले- घबराने की जरूरत नहीं है
सवाल: पीजीआई में बच्ची को कोरोना कैसे हो गया?

जवाब-बच्ची को पीजीआई लाने से पहले घरवाले जालंधर के अपोलो अस्पताल ले गए थे। वहां 36 दिन इलाज चला। हो सकता है कि इंफेक्शन वहां से या फिर बीच रास्ते से हुआ हो।

सवाल: तो कोरोना का शक कैसे हुआ

जवाब -डॉक्टर्स को बच्ची में कोरोना के लक्षण नजर नहीं आए थे। बच्ची वेंटिलेटर पर थी। हार्ट ऑपरेशन के लिए ले जाने से पहले डॉक्टर्स ने सोचा कि एक बार कोरोना टेस्ट करवा लेते हैं। टेस्ट करवाया तो रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई।

सवाल: क्या इस मामले मे पीजीआई से कोई चूक हुई है?

जवाब -वायरस कहीं भी हो सकता है। जैसे गंगाराम हॉस्पिटल में हुआ और मुंबई में हुआ। यह दिखता तो नहीं है। अब तो बिना लक्षण वाले में भी कोरोना वायरस मिल रहा है। इस बच्ची को भी कोई लक्षण नहीं थे।

सवाल: क्या डरने की जरूरत है?

जवाब-पीजीआई पूरी तरह सेफ है। किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। डॉक्टर्स ने पूरी कोशिश की है। शक हुआ तो उन्होंने टेस्ट करवाया तभी तो कोरोना डिटेक्ट हुआ।



54 quarantines, including 18 doctors, 15 nurses, 13 ward boys, 2 physio therapists, who treat the baby


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