धार्मिक नगरी ओरछा के सदियों पुराने वैभवशाली इतिहास में यह मौका पहली बार आया कि मंदिर के चारों ओर दूर-दूर तक पसरे सन्नाटे के बीच केवल पुजारियों ने श्रीरामराजा सरकार के जन्मोत्सव की रस्म पूरी की।
ओरछा के लोगों के मन में इस पावन मौके पर सरकार के दरबार में हाजिरी लगाने की इच्छा तो बहुत थी, लेकिन लोगों ने कोरोना वायरस के मद्देनजर लाॅकडाउन को उचित समझते हुए दोपहर 12 बजे हुई श्रीराम जन्म की आरती पर बज रहे शंख झालरों को सुनकर घरों में रहकर भगवान राम को प्रणाम किया।
स्थानीय लोगों कीमानें तो पांच सौ साल में यह पहला मौका है, जब बुंदेलखंड की अयोध्या कहे जाने वाले ऐतिहासिक नगर ओरछा में राजा के रूप में विराजमान रामराजा सरकार के पिछले 17 दिन से भक्तों को दर्शन नहीं मिले हैं।
मंदिर परिसर में पुजारियों के अलावा किसी अन्य का प्रवेश पूरी तरह वर्जित है। मंदिर के पुजारी का कहना है कि ओरछा में देश का एक मात्र मंदिर है जहां भगवान राम को राजा के रूप में विराजमान हैं। कोरोना वायरस के चलते उनकी राजशाही परंपराएं निरंतर जारी है। चारों समय की आरती में रामराजा सरकार को मप्र पुलिस के जवानों द्वारा प्रतिदिन सशस्त्र गार्ड ऑफ ऑनरदिया जा रहा है। साथ ही पान और इत्र अर्पित होता है।
रोजाना गरीब बस्ती में भोजन भिजवा रहा है मंदिर प्रबंधन
ओरछा के रामराजा सरकार से जुड़ी एक लोककथा है, जिसमें ऐसा उल्लेख है कि रामजी ने बुंदेला राजाओं से वचन लिया था कि रामराजा के दरबार में आने वाला कोई भी व्यक्ति ओरछा के अंदर भूखा नहीं रहना चाहिए।
तभी से भगवान को दोपहर में राजभोग व रात में ब्यारी के भोग के बाद मंदिर के दरवाजे पर लोगों को भोजन वितरित किया जाता है, लेकिन लाॅकडाउन में मंदिर परिसर तक लोग ही नहीं पहुंच पा रहे हैं, ऐसे में भोजन वितरण की परंपरा का निर्वहन कैसे हो, तो इसके लिए मंदिर प्रबंधन ने मुख्य सड़क पर स्टाॅल लगवाकर तथा गरीब बस्तियों में भगवान की आरती के बाद रोजाना भोजन वितरण किया जा रहा है।
(रामेश्वर दुबे) परंपरा के अनुसार हुई पूजा : गुरुवार को मंदिर के प्रधान पुजारी रमाकांत शरण महाराज ने अपने सहयोगी पुजारियों के साथ मंदिर में पूजा अर्चना शुरू की। दोपहर ठीक 12 बजे वैदिक रीति से मंदिर की प्राचीन परंपरा अनुसार विधि पूर्वक श्रीरामराजा सरकार के जन्मोत्सव का पूजन व आरती की गई। ओरछा नगर के लोगों ने रामराजा सरकार जन्म पर एक साथ घर पर ही शंख झालर और जय श्री राम के जय घोष लगाकर सरकार को नमन किया।
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