पानीपत .कोरोना की वजह से कुछ दूरी बनाने के लिए कहा जा रहा है। यह दूरी फिजिकली जरूरी है, न कि मानसिक। इसका बानगी विभिन्न देशों में रह रहे हरियाणवी पेश कर रहे हैं। कोरोना के कारण लोगों को घरों में बंद रहना पड़ रहा है तो कहीं राशन आदि की कमी है, लेकिन हरियाणवी मिलजुल कर कोरोना से टक्कर ले रहे हैं। साथ ही अपने देश की चिंता कर रहे हैं। इसलिए इनका जो जानकार स्वदेश में लौट रहा है तो उनसे अपील करते हैं कि देश पहुंचते ही क्वारेंटाइन जरूर करवाएं।

दरअसल, दूसरे देशों में रह रहे काफी लोगों ने ग्लोबल हरियाणा के नाम से एक संस्था बना रखी है और एक सोशल ग्रुप भी बना रखा है, जिस पर वे मदद के लिए हर लेटेस्ट और जरूरी जानकारी शेयर करते हैं। इन सबका कहना है कि यहां भारत की तैयारियों की तारीफ हो रही है। न केवल हाथ जोड़ कर अभिनंदन कर रहे हैं। बल्कि नमस्ते भी बोल रहे हैं। कुछ जगह तो हमारे लोगों ने विदेश में राम-राम बोलकर सत्कार करना शुरू कर दिया है। जानिए... हरियाणा के ऐसे ही कुछ लोगों की जुबानी। वे वहां कैसी स्थिति में हैं और उससे कैसे लड़ रहे हैं।

रेडियो पर रोज देता हूं देश-प्रदेश की सूचना

ब्रिटेन में रेडियो लइका में काम करने वाले रवि शर्मा ने बताया कि जब से वर्कफ्रॉम होम शुरू हुआ है तो घर में छोटा स्टूडियो बनाकर उसी से लिंक करवा रखा है। यहीं से प्रोग्राम करता हूं। यहां रहने वाले लोग देश और हरियाणा की जानकारी से अपडेट रहें, इसलिए प्रतिदिन अखबार आदि पढ़कर जनकारी जुटाकर लोगों तक रेडियो के माध्यम से पहुंचा रहा हूं, जिससे घरों में रह रहे लोग अपनों से खुद को कनेक्ट पा सकें। यहां भी सड़कें लगभग खाली हैं। कंपनियों ने कहा दिया है कि जो वर्क फ्रॉम होम नहीं कर सकते वे भी घर बैठें, उन्हें फिर भी सैलरी मिलेगी। खाने के समान की बीच-बीच में कमी होती है, लेकिन फिर समान्य हो जाता है। यहां शॉपिंग के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं, फोन पर समान नोट करवा दो घर आ जाता है। टाॅयलेट पेपर की काफी कमी है। इस परेशानी के वक्त में जब इंडिया की तारीफ होती है तो खुद पर गर्व होता है। यहां के नेताओं से लेकर राजकुमार भी हाथ जोड़कर अभिनंदन करते हैं और नमस्ते बोलते भी हैं। लोग नॉनवेज छोड़कर वेज पर शिफ्ट हो रहे हैं। यहां के स्थानीय लोगों की हम वेज खाने को लेकर भी मदद कर रहे हैं। सभी मिलकर बचाव के प्रयास कर रहे हैं।

यह गंभीर मुद्दा, खुद भी बचें, दूसरों को भी बचाएं

मूलरूप से करनाल वासी और मेलबर्न आॅस्ट्रेलिया में मशहूर यू-ट्यूबर विकास श्योराण ने बताया कि लोग यू-ट्यूब पर हमसे बड़ी संख्या में कनेक्ट हैं व लोगों को जागरूक कर रहे हैं। कोरोना सीरियस मुद्दा है। इसलिए इस पर वीडियो बनाने से बच रहे हैं, लेकिन यहां से इंडिया व हरियाणा के लोगों को जागरूक रहे हैं। यहां भी वे नमस्ते करना सिखा रहे हैं। हरियाणा के लोग तो हाथ जोड़कर राम-राम करने लगे हैं। यहां भारत सरकार की तारीफ हो रही है व आॅस्ट्रेलिया सरकार पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि वहां स्कूल-काॅलेज आदि पूरी तरह बंद नहीं किए गए हैं। हालांकि कुछ लोगों ने इसके खिलाफ याचिका लगा रखी है। आस्ट्रेलिया का डाॅलर डाउन होकर 41 रुपए रह गया है।

इंडिया में घर का सामान लोगों को स्टोर न करने की अपील

इंडिया में जादूगर शंकर सम्राट के साथ काम कर चुके और अभी इटली के वेर्बानिया शहर में थियेटर कर रहे श्रीदत्त शर्मा बताते हैं कि जहां मैं हूं, यह एरिया मिलान शहर से 90 किलोमीटर दूर है। यहां स्थिति काफी खराब है। लोग घरों में कैद हो गए। बाहर नहीं निकल सकते, लेकिन यहां भी खाने के समान के लिए बाहर जाने दे रहे हैं। ऐसे में इंडिया व हरियाणा के लोग समान स्टोर करने के पीछे न दौड़ें। घर से केवल फार्मेसी और सुपर मार्केट के लिए ही निकल सकते हैं। इसके लिए सेल्फ डिक्लेरेशन सर्टिफिकेट होना जरूरी है, जिसे रास्ते में पुलिस चेक करती है। गलत मिलने पर 12 साल की सजा है। ट्रैफिक बिल्कुल बंद हैं। कई घरों का राशन एक आदमी लेकर आ रहा है।

एडमिशन के लिए आए छात्रों की कर रहे मदद

कर्मजीत सिंह मान, बिजनेसमैन इन कनाडा, प्रेजिडेंट हरियाणा स्पोर्ट्स एंड कल्चरल क्लब ऑफ कनाडा, जो मूलरूप से करनाल के हैं। बताते हैं कि हरियाणा, पंजाब से यहां स्टूडेंट एडमिशन के लिए लगे होते हैं, लेकिन इस पर रोक लगा दी है, लेकिन काफी बच्चे पहुंचे हैं, जो बीच में अटके हैं। हम उनके रहने का प्रबंध करवा रहे हैं, जिससे यह समय निकलने के बाद पढ़ाई कर सकें। कोरोना नॉनविजिबल एनमी यानि बिना दिखने वाला दुश्मन है। कनाडा में स्थिति काफी गंभीर है, जो लोग बाहर रहते हैं, उन्हें वापस लौटने के लिए कह दिया है। यूएस के साथ बॉर्डर बंद कर दिया है। फैक्ट्री व प्लांट आदि बंद हैं।

बुजुर्गों के लिए एक-एक घंटा पहले खुले स्टोर

मूल रूप से जींद के रहने वाले और एडिलेड आॅस्ट्रेलिया में काउंसलर सुरेंद्र चहल ने बताया कि सबसे बड़ी दिक्कत कैजुअल जॉब वालों को है। इंडिया से जो पढ़ने आते हैं। वे इस तरह की जॉब ज्यादा करते हैं। इसलिए उन्हें खर्च चलाना मुश्किल हो गया। काफी ऐसे बच्चों के फोन आते हैं जो पढ़ने के लिए आए हैं और उन्हें खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है, वे उनकी मदद का प्रयास करते हैं। हम कुछ साथी मिलकर अब तक 25 से ज्यादा अपने ऐसे छात्रों की मदद कर चुके हैं। यहां सभी इवेंट रद्द हो गए हैं। जॉब सभी की वर्क फ्रॉम होम चल रही है। सड़कों पर ट्रैफिक 30 प्रतिशत तक कम हो गया है। स्टोर पर खाने के समान की कुछ कमी है, लेकिन साउथ आॅस्ट्रेलिया में सभी स्टोर पर एक नियम बनाया गया है कि सुबह और शाम एक-एक घंटा पहले बुजुर्गों के लिए स्टोर खुलते हैं और बाद में सभी के लिए। ऐसे समय में यह पहल अच्छी बात है। उनकी अपील है कि भारत में यदि ऐसी स्थिति होती है तो मदद के लिए सभी आगे आए। इस गंभीर स्थिति से सभी देशवासियों ही नहीं बल्कि भी देशों को मिलकर लड़ना है।


इटली में बाहर निकलने वाले हर व्यक्ति के कागज चेक किए जा रहे हैं।
ब्रिटेन में सड़कों पर फ्लैगमार्च करती वहां की सेना।


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