नगर परिषद बैराड़ के दिगंबर जैन समाज द्वारा आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव प्रतिष्ठा कार्यक्रम के अंतर्गत तीसरे दिन रविवार को जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया गया। इसमें दूर दराज से बड़ी संख्या में जैन समाज के धर्मावलंबियों की ने भाग लिया। भगवान तीर्थंकर के जन्म के बाद सौ धर्म इंद्र एवं शची इंद्राणी और इंद्र इंद्राणी द्वारा महिला पुरुषों के साथ खुशियां मनाते हुए बधाइयां बांटी गई। भगवान तीर्थंकर के जन्म पर मुनिश्री सुव्रत सागर महाराज ने सभी को भगवान के जन्म का महत्व बताते हुए सभी को जन्म कल्याणक उत्सव की बधाई दी। भगवान तीर्थंकर के जन्म के बाद 12 बजे जन्म कल्याणक जलेब हाथियों घोड़ा बग्गी एवं बैंडबाजों के साथ हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में कार्यक्रम स्थल से निकाला गया। इसका मुख्य नगर में कई जगह पर श्रद्धालुओं ने स्वागत किया। चल समारोह नगर के मुख्य मार्गों से होकर बनाई गई पांडुकशिला स्थल पर पहुंचा। जहां भगवान तीर्थंकर का 1008 कलशों से जलाभिषेक किया गया।
बेटे की तरह बेटी के जन्म की खुशियां मनाना चाहिए: जैन समाज द्वारा बनाई गई अयोध्या नगरी में भगवान तीर्थंकर के जन्म के बाद मंगल प्रवचन में मुनिश्री सुव्रत सागर महाराज ने उपस्थित महिला पुरुष श्रद्धालुओं से बच्चे के जन्म के साथ बेटियों की जन्म को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बेटी नहीं होगी तो बहू कहां से लाओगे। बहू नहीं होगी तो वंश कैसे चलेगा। सभी से बेटी बचाए जाने अपील करते हुए कहा कि बेटे की तरह बेटी के जन्म की खुशियां मनाना चाहिए।
दिगंबर जैन समाज द्वारा आयोजित भगवान महावीर के चित्र के जन्म कल्याणक के उपलक्ष्य में आयोजित जलेब में सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुषों सहित 12 से अधिक घोड़ा गाड़ी, तीन गजरथ, बैंडबाजे व डीजे के साथ निकाला गया। जो नगर में ऐतिहासिक रहा है।
बैराड़ में पंच कल्याणक महोत्सव पर निकाला गया चल समारोह।

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