दंतेवाड़ा। जीत के जश्न में नर्तक दलों के साथ नाचती तूलिका व सुलोचना।
दंतेवाड़ा| विधानसभा उपचुनाव के बाद से कांग्रेस पार्टी की उपेक्षा झेल रही तूलिका कर्मा ने चुनौती के बीच बड़ी जीत हासिल की है। आलम ये था कि पार्टी से अधिकृत प्रत्याशी बनाना तो दूर दिग्गजों ने भी तूलिका का साथ छोड़ दिया था।
तमाम उपेक्षा व कटाक्ष झेली तूलिका ने हार नहीं मानीं व खुद को साबित कर दिखाया। पहली बार चुनाव में भाग्य आजमाया।
समर्थकों के साथ प्रचार में जुटी और अब जीत का सेहरा सजा लिया, किस्मत ऐसी चमकी कि जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी तक अपने नाम कर ली।
चुनौती और बड़ी उपेक्षा के बीच तूलिका को मिली जीत की खुशी शनिवार को देखने मिली। दंतेवाड़ा, नकुलनार व गीदम में जीत की रैली निकली।
खुली जीप में तूलिका के साथ नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष सुभाष सुराना, कांग्रेस कमेटी के ज़िलाध्यक्ष विमल सुराना सहित अन्य कांग्रेसी भी शामिल थे।
पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ जश्न मनाया। खुशी ऐसी कि खुली वाहन में सवार तूलिका नीचे उतरीं व नर्तक दलों के साथ पारंपरिक नृत्य करने लगी। तूलिका की जीत के बाद उन्हें नकारने वाले पार्टी के दिग्गज लोग भी जश्न में कूदे पड़े दिखाई दिए व इस जीत का श्रेय लेने की कोशिश करते रहे।
हालांकि तूलिका ने अपनी इस जीत का श्रेय हर उस कार्यकर्ता को दिया है जिसने जीत के लिए दिन रात मेहनत की है। कहा कि कांग्रेस पार्टी मेरा परिवार है और मैं इस परिवार की सदस्य हूं।
प्रेम ऐसा कि बड़ी बहन ने छोटी बहन को सौंपा अपना सपना : ऐसा ज़रूर कहा जाता है कि राजनीति में पद एक ऐसी चीज़ है जिसके सामने रिश्तेदारी भी मायने नहीं रखती। लेकिन लोगों की इस धारणा को बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा की बेटी सुलोचना ने तोड़ दिया है।
ज़िला पंचायत सदस्य पद पर तीसरी बार जीत के बाद भी अपने अध्यक्ष बनने के संजोए सपने को छोटी बहन तूलिका के नाम कर दिया।

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