मक्के की खड़ी फसल के दानों में अंकुरण आने की खबर भास्कर में प्रकाशित होने के बाद कृषि विभाग हरकत में आया। इस बीच और चौकाने वाला मामला सामने आया। विभाग की टीम जब फसल का निरीक्षण करने ग्राम कापसी पहुंची तो पता चला कि जिस कंपनी के बीज किसानों ने लगाए हैं वह कंपनी छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम में पंजीकृत ही नहीं है।
साथ ही जिन दुकानदारों ने यह बीज बेचा उनके पास भी बीज बेचने का प्रिंसपल लेटर नहीं है। विभाग के अधिकारियों ने इन दुकानों को सील करने का आदेश दिया है। कापसी क्षेत्र के ग्राम आलोर में हाइटेक कंपनी के मक्के के बीज 5106 जिन किसानों ने लगाया था, इस फसल में दाने आए तो उसमें ही अंकुरण आ गया।
इससे किसानों की फसल खराब होने से उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। शुक्रवार को कांकेर जिले के उपसंचालक कृषि एनके नागेश स्वयं कापसी पहुंचे और किसानों के मक्के की फसल देखी और पीड़ितों से बात भी की। मौके पर पहुंचे अधिकारी लगे फल में आए अंकुरण देख खुद हैरान रह गए। उनके साथ कृषि विभाग भानुप्रतापपुर के एसडीओ डीएस पटेल, बीज निरीक्षक पीजी कांचे भी पहुंचे थे।
जांच के लिए लैब भेजा जाएगा सैंपल
कृषि उपसंचालक ने बताया कि वे पहली बार इस तरह की समस्या देख रहे हैं। इस दौरान किसानों ने लगाए गए मक्के बीज के पैकेट भी अधिकारियों को दिखाए। इसके बाद यह खुलासा हुआ कि जिस कंपनी का बीज है, वह कंपनी छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम में पंजीकृत ही नहीं है। साथ ही जिन दुकानदारों ने इस बीज को बेचा है, उनके पास यह बीज बेचने के लिए जरूरी पिं्रसपल लेटर ही नहीं है। इसके बाद उप संचालक ने यह बीच बेचने वाले सभी दुकानों को सील करने का आदेश दिया है। कृषि विभाग का दल किसानों के खेत पहुंचा और वहां अंकुरण आए मक्कों का सैंपल भी लिया। मौके पर उपस्थित कृषि वैज्ञानिक सुरेश मरकाम ने बताया इस सैंपल को कृषि लैब भेजा जाएगा, तभी पता चलेगा कि ऐसा क्यों हुआ है।
नुकसान की भरपाई का प्रयास करेंगे : उपसंचालक कृषि एनके नागेश ने बताया कंपनी न ही पंजीकृत है और न ही दुकानदारों के पास इस कंपनी के बीज बेचने के लिए कोई अधिकृत लेटर है। किसानों को बिल भी नहीं दिया गया है। इन दुकानदारों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। किसानों को हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए भी प्रयास किया जाएगा।

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