शहर से सटे गांवों में स्वच्छता को लेकर नाली और कूड़ेदान तो बना दिए गए हैं, लेकिन सफाई नहीं होने से नालियां गंदगी व मलबों से अटी पड़ी है। वहीं कूड़ेदानों की महीनों से सफाई नहीं हो रही है। शहर से लगे ग्राम सिंगारभाठ में पिछले चार साल से नालियों की सफाई नहीं हुई है। वहीं महीनों से कूड़ेदानों की सफाई नहीं होने से हर तरफ गंदगी का आलम है।
राईसमिल पारा में तो सड़क किनारे कूड़ादान में कई माह से गंदगी जमा है। अब तो कूड़ादान से बाहर गंदगी गिर रही है। कूड़ादान की सफाई नहीं होने से उसमें लोग आग लगा देते हैं, जिससे प्रदूषण होता है। नाली की भी सफाई नहीं हो पा रही है। चार साल पहले ग्राम पंचायत ने नाली की सफाई कराई थी लेकिन उसके बाद नाली की सफाई नहीं हो पाई है। नाली कई जगह पर गंदगी, मलबा व अनुपयोगी झाड़ियों से पट गई है। कई जगह नाली अधूरी बनी है। गंदे पानी की निकासी नहीं हो पाती है। गांव के गुलशन जुर्री, आदित्य वट्टी, राजेश मंडावी ने कहा कूड़ादान की सफाई नहीं हो पा रही है। शहर से सटे ग्राम गोविंदपुर में भी कई जगह नाली को लोगों ने पाट दिया है। गांव में कूड़ेदान पांच जगह पर बने हुए हैं, जिसकी भी सफाई नहीं हो पा रही है।
लॉकडाउन में काम प्रभावित : ग्राम पंचायत सिंगारभाठ सरपंच पन्नालाल ठाकुर ने कहा गांव की नालियों व कूड़ेदान की सफाई कराने पंचायत से प्रस्ताव पारित हो गया था, लेकिन लॉकडाउन के कारण काम प्रभावित हो गया। गांव में अलग से सरकारी सफाई कर्मी नहीं हैं जिसके कारण सफाई नहीं हो रही।
अधूरी नाली से समस्या
ग्राम ईच्छापुर और मर्दापोटी में भी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना विभाग ने नाली बनवाई थी जो कई जगह पट गई है। ग्राम ईच्छापुर के झुनऊ कांगे ने कहा गांव में पटी नालियों की सफाई जरूरी है। ठेलकाबोड़ में नाली कुछ ही जगह पर बनी है। गांव के एकता नगर में अधूरी नाली से दिक्कत होती है।

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