कहा-लोगों की जान बचाने वाले रेगुलर नौकरी के हकदार, मांगें पूरी न होने पर संघर्ष की चेतावनी
पंजाब सरकार ने कोरोना मरीजों का इलाज करने में जुटे सेहत कर्मियों को बिल्कुल बिना हथियारों के बीमारी का सामना करने के लिए छोड़ दिया है। लोगों द्वारा बार-बार मांग करने के बावजूद कैप्टन सरकार पर कोई असर नहीं हो रहा। यह बात डीटीएफ के जिला प्रधान अमनदीप मटवानी, उप प्रधान सुखपालजीत मोगा और जिला सचिव जगवीरन कौर ने सांझे रूप में जारी बयान में कही।
उन्होंने कहा कि आशा वर्कर कोरोना के खिलाफ जान जोखिम में डालकर काम कर रही हैं मगर सरकार ने उनकी सुरक्षा के लिए सुरक्षा किट्स नहीं दी। उनकी 4 आशा वर्कर कोरोना पॉजिटिव हो गई हैं। इसके बाद वो हड़ताल पर गई, जिसका डीटीएफ समर्थन करती है। अपनी जान को खतरे में डाल कर लोगों की जान बचाने वाले रेगुलर नौकरी के हकदार हैं।
गुरमीत झोरड़ें और सुखविंदर घोलिया ने कहा कि आशा वर्कर और फेसिलिटेटर कितनी मुश्किलों भरे हालात में काम कर रही हैं और खुद भी इस बीमारी का शिकार हो रही हैं मगर सरकार कुंभकर्णी नींद सोई हुई है। सरकार की लापरवाही और बेरुखी करके ही आशा वर्कर यूनियन ने हड़ताल का आह्वान किया है। हड़ताल वाले दिन सभी वर्कर अपने सब सेंटरों में यूनियन के झंडे और काले दुपट्टे लेकर सुबह 9 से 10 बजे तक प्रदर्शन करेंगी और फिर पूरा दिन अपने हर किस्म के काम का मुकम्मल बायकाट करेंगी।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार फिर भी उन की मांगों की तरफ ध्यान नहीं देती तो इस संघर्ष को तीखा रूप दिया जाएगा।
ये हैं यूनियन की मांगें
डीटीएफ की मांग है कि आशा वर्करों और फैसिलिटेटरों को कोरोना में ड्यूटी करने बदले 750 रुपए प्रति दिन दिए जाएं। ड्यूटी करते कोरोना से इन्फेक्टेड होने वाली वर्करों को मार्च 2021 तक 10 हजार रुपए प्रति महीना स्पेशल भत्ता दिया जाए और जान जाने की सूरत में वर्कर के परिवार को 50 लाख रुपए दिए जाएं। वर्करों को पीपीई किट्स, मास्क, सेनिटाइजर, दस्ताने दिए जाए। हर सेहत कर्मी का 50 लाख रुपए का बीमा किया जाए। इसका जिला कमेटी के सदस्य शिंगारा सिंह, मधु बाला, अमनदीप, अमरदीप बुट्टर, जगदेव मैहना, स्वर्ण दास, प्रेम सिंह ने भी समर्थन किया।
आंगनबाड़ी वर्करों व हेल्परों का भी मान भत्ता बढ़ाए सरकार : गुरमेल बिंजोकी
आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन की जिला प्रधान गुरमेल कौर बिंजोकी ने कहा है कि यूनियन की वर्कर व हेल्पर कोरोना वायरस संबंधी हर ड्यूटी को निभाने कोे तैयार है मगर उन्हें बनती सुविधा मुहैया करवाई जाए। यूनियन की सदस्याओं को मास्क, सेनिटाइजर, ग्लब्स दिए जाए। बीमे के दायरे में लाया जाए। अन्य कर्मियों की तर्ज पर आंगनबाड़ी वर्करों व हेल्परों का मान भत्ता भी बढ़ाया जाए। सीडीपीओ का आदेश है कि आंगनबाड़ी वर्करों व हेल्परों की मेडिकल स्क्रीनिंग होनी चाहिए। मगर अभी स्पष्ट नहीं है कि स्क्रीनिंग मुफ्त होगी या इसके पैसे लगेंगे। यह भी स्पष्ट नहीं किया कि स्क्रीनिंग का मकसद क्या है।

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