बरसात में बोरियां भीगने से लिफ्टिंग प्रभावित, पौने दो लाख मीट्रिक टन गेहूं मंडियों में पड़ा
अनाज मंडियों में गेहूं की आवक तेजी से हो रही है लेकिन उसी रफ्तार से लिफ्टिंग न होने से जिले की अनाज मंडियों में गेहूं के अंबार लगे हैं। लगातार कई बार आगाह करने के बावजूद गेहूं की बोरियों का लदान न होने की वजह से शनिवार देर रात व रविवार की शाम हुई मूसलाधार बारिश से खुले आकाश तले पड़ा हजारों टन गेहूं भीग गया। हालांकि मौसम विभाग की ओर से आगामी दो-तीन दिन फिर से बरसात का अंदेशा जताया गया है, हालातों से वाकिफ होने के बावजूद सोमवार को लिफ्टिंग में तेजी नहीं आई।
1 लाख 75 हजार 269 मीट्रिक टन गेहूं का होना है लदान
जिले की 20 प्रमुख मंडियों समेत 442 खरीद केंद्रों में 1 लाख 75 हजार 269 मीट्रिक टन गेहूं लदान की इंतजार में पड़ा है। शनिवार शाम तक मंडियों में 7 लाख 67 हजार 209 मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई जिसमें से 7 लाख 43 हजार 529 मीट्रिक टन गेहूं विभिन्न एजेंसियों ने खरीदा। अभी भी मंडियों में पड़े 23 हजार 680 मीट्रिक टन गेहूं अनबिका है। शनिवार को खरीद बेहद कम हुई, सिर्फ 16 हजार 973 मीट्रिक टन गेहूं ही खरीदा गया जबकि बरसात से भीगे अनाज को मंडियों के फर्श पर धूप से सुखाने के लिए बिछाया गया।
गेहूं की बोरियां भीग जाने की वजह से भी शनिवार को लिफ्टिंग नहीं हो पाई। अभी तक 5 लाख 19 हजार 445 मीट्रिक टन गेहूं का लदान करके सरकारी एजेंसियों के गोदाम-ओपन प्लिंथ में स्टोर के अलावा डायरेक्टर स्पेशल ट्रेन से बाहरी राज्यों में भिजवाया गया। 2019 में इस दिन तक 8 लाख 3 हजार 618 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया।
गीली बोरियों का लदान नहीं करने का नियम
बरसात से गीली हुई बोरियों के दो-तीन तक लदान नहीं करने के विभागीय नियम हैं। ऐसे में सिर्फ शेड के नीचे पड़ी बोरियों की ही लिफ्टिंग की जाती है और इसी वजह से लिफ्टिंग प्रभावित हुई। गीली हुई बोरियों को उठाने का लेबर पर ज्यादा बोझ पड़ता है, वहीं स्टॉक में लगाने में भी दिक्कत आती है, ऐसे में दो-तीन धूप लगाना सुखाना जरूरी होता है। खुले में पड़ी गेहूं को तिरपालों से ढका गया लेकिन तेज हवाओं से तिरपाल उड़ने से बोरियां गीली हुई।- मनदीप सिंह, डीएफएससी बठिंडा
हजारों टन गेहूं की बर्बादी की नहीं किसी को परवाह
खराब मौसम के बावजूद लिफ्टिंग नहीं हुई जबकि तिरपालों से न ढकने की वजह से हजारों टन गेहूं बारिश में भीग कर खराब हो गया लेकिन इसकी न तो फूड सप्लाई विभाग और न ही मंडी बोर्ड अधिकारियों की परवाह है क्योंकि यह तो सीधे तौर पर सरकारी नुकसान ही है। शायद इसी वजह से इस गुस्ताखी के लिए किसी की भी जिम्मेदारी तय नहीं की गई। किसान की फसल की तुलाई के बाद जे फार्म मिलने पर वो फारिग हो जाता है जबकि आढ़तियों के अनुसार उनके लिए तिरपाल का प्रबंध तो गेहूं की ढेरियों के लिए करना होता है, वहीं गेहूं की बोरियों का 2-3 दिन लदान होने तक आढ़ती जिम्मेदारी लेते हैं लेकिन ज्यादा दिन तक पड़े रहने के लिए तिरपाल से ढकने में रुचि नहीं लेते। विभागीय अधिकारी भी बरसात से भीगे गेहूं को दो-तीन धांग लगा देने से किसी तरह के नुकसान न होने का दावा कर रहे हैं जबकि बोरियों में भरा गीला गेहूं अक्सर काला पड़ जाता है और बदबू मारने से उसे पशु तक नहीं खाते।
बरसात में बोरियां भीगने से लिफ्टिंग प्रभावित, पौने दो लाख मीट्रिक टन गेहूं मंडियों में पड़ा
Lifting affected due to wet sacking during rainy season



Post a Comment

Previous Post Next Post