सरकार की ओर से मजदूरों को घर वापस भेजने के लिए दिए गए आदेश के बाद तेज धूप में गर्मी सहन करते हुए प्रवासी मजदूर घंटों लाइन में लगकर रजिस्ट्रेशन करवाने में जुटे हुए हैं, मगर अभी तक उनके जाने और ना जाने को लेकर कोई स्थिति क्लियर नहीं है।
सिरसा जिला से अब तक केवल 51 मजदूर अपने राज्य के लिए सोमवार को रोहतक से रवाना हुए है। वे भी पिछले पांच दिनों से कभी हिसार , कभी रोहतक भेजे जा रहे थे। ट्रेन में जगह नहीं मिलने पर उन्हें पांचवे दिन रोहतक से भेजा गया है।
इधर अपने राज्य वापस लौटने को उत्सुक मजदूरों की लाइनें लगी हुई है। जिला में अब तक 7500 मजदूर रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। मगर वे कब भेजे जाएंगे। कैसे जाएंगे। इस पर अभी प्रशासन की तरफ से कुछ भी स्पष्ट नहीं है।
पंजाब से पैदल चलकर आ रहे प्रवासी मजदूर
पड़ोसी राज्य पंजाब से मजदूरों का आना लगातार जारी है। वे सिरसा में खेतों के रास्ते से घुसकर जिला पार करते हैं। हालांकि पंजाब से आने के कारण जिला प्रशासन उन्हें सिरसा में नहीं रोक रहा है। वे आगे से आगे जाते रहते हैं। सोमवार को भी पंजाब की रिफाइनरी से 60 की संख्या में मजदूर पैदल जाते देखे गए। मजदूरों का कहना था कि लॉकडाउन में वे अपने घर में ही रहना चाहते हैं। सरकार और प्रशासन उन्हें भेजने का अभी तक कोई प्रबंध नहीं कर पाए हैं।
524 के आवेदन रिजेक्ट हो गए
जिला में अब तक 265 उद्योग और फैक्ट्रियों को परमिशन मिल चुकी है। इनमें 3500 मजदूर काम कर रहे हैं। जिला उद्योग केंद्र के उप निदेशक गुरप्रताप सिंह ने बताया कि अभी तक कुल 800 के करीब आवेदन आए थे। जिसमें से 265 को मंजूरी मिल चुकी है। 524 के आवेदन दस्तावेज की कमियों के चलते रिजेक्ट हो गए हैं।
किसी भी मजदूर को पैदल जाने से रोकने के आदेश
जिला प्रशासन की ओर से किसी भी मजदूर को पैदल जाने से रोकने के आदेश हैं। बार्डर एरिया सील किए हुए हैं। एक दो बार मजदूरों ने पर्सनल गाड़ी करके जाने की कोशिश की थी, मगर पुलिस ने उनको रोक लिया। वे सभी अपने ठिकानों पर रुके हुए हैं। प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं की ओर से उनको भोजन भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। यहां बता दें कि रेल और ट्रेन सेवा बंद होने के कारण यह दिक्कत बनी हुई है।

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