केंद्र व राज्य सरकार के कड़े निर्देश के बावजूद कई शिक्षण संस्थान अपने कर्मचारियों का शोषण करने से चूक नहीं रहे हैं। ताजा मामला जालंधर के डीएवी यूनिवर्सिटी का है, यहां के 22 कर्मचारियों को कोरोना बीमारी का हवाला देकर अनिश्चितकालीन लीव पर भेज दिया गया है। इतनी बड़ी तादाद में अग्रिम आदेश तक काम पर नहीं आने का लेटर मिलते ही कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। मामला जिला प्रशासन तक पहुंचा तो एडीसी जसबीर सिंह ने कहा कि चूंकि मामला हायर एजूकेशन से जुड़ा है, इसलिए सरकार को लेटर भेजकर पूरे मामले की जांच कराने के लिए कहा जाएगा।
जालंधर पठानकोट रोड के एनएच-44 के निकट स्थित डीएवी यूनिवर्सिटी की ओर से 30 अप्रैल को 22 नान टीचिंग स्टाफ को लेटर जारी कर कहा गया कि कर्फ्यू के कोरोना की महामारी में गैदरिंग रोकने के लिए सकारात्मक कदम उठाए गए हैं। इसके तहत सभी को अग्रिम आदेश तक घर में ही रहना होगा। यूनिवर्सिटी नहीं आने का लेटर मिलते हीवायरस से जंग लड़ रहे सभी कर्मचारी परेशान हो गए।गौतम, रोशन, अशोक, राजेंदर का कहना है कि लेटर में कहीं पर भी यह नहीं लिखा है कि उन्हें काम पर कब से लौटना है। मामले की शिकायत जिला प्रशासन से की है।
किसी कर्मचारी को नहीं निकाला : आर्या
यूनिवर्सिटी की रजिस्ट्रार सुषमा आर्या का कहना है कि किसी भी कर्मचारी को निकाला नहीं गया है। ये सभी कांट्रेक्ट कर्मचारी हैं, जो 19 मार्च से काम पर नहीं आ रहे हैं। उन्हें कर्फ्यू में न आने के लिए कहा गया है। इन्हें अप्रैल माह का वेतन भी दिया जा चुका है। जैसे ही यूनिवर्सिटी खुलेगी, सभी को बुला लिया जाएगा। इसके लिए जारी लेटर में लिख भी दिया गया है।
इन कर्मचारियों को जारी हुए आदेश
रोहित, बलवीर, कुलदीप लाल, गुरदीप सिंह, टहल दास, मिनी, सोमा कौर, कुलविंदर पाल, किरण बाला, सीमा रानी, कुलवंत कौर, दीपिका, रोशन, राजू, रेवल सिंह, चंदन, बलदेव राज, गौतम, दविंदर सिंह, रजिंदर कुमार और अशोक कुमार को लेटर थमाया गया है।
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