स्वास्थ्य विभाग में कोरोना महामारी से निपटने के लिए तैयार होने वाली हर रणनीति को सफलतापूर्वक लागू करके बीमारी को नियंत्रित करने वाले जीव वैज्ञानिक डॉ. रमेश पूनिया को कोविड-19 के कार्यभार से मुक्त कर दिया। इनसे चार्ज लेकर तीन माह के लिए अनुबंध पर कार्यरत पब्लिक हेल्थ मैनेजर डॉ. सुरभि को जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब इन्हें मलेरिया कंट्रोलिंग प्रोग्राम के तहत काम करते हुए रिपोर्टिंग के निर्देश दिए हैं। अन्य कर्मियाें काे उनका ड्यूटी क्षेत्र बताया है।
डॉ.पूनिया को दूसरे जिलों, राज्यों व देशों से आने वाले लोगों को होम क्वारेंटाइन व उनके आवास पर पोस्टर चस्पाकर रिपोर्टिंग का नोडल ऑफिसर नियुक्त किया था। इतना ही नहीं दड़ौली पेशंट को लिफ्ट देने वालाें काे डॉ. पूनिया की टीम ने तीन-चार दिन 100 से ज्यादा कैमरों की फुटेज खंगाल तलाशा और आइसोलेट करवाया था। इसके साथ ही दिन-रात टीम के साथ हर चुनौतियों का डटकर सामना किया। तीन दिन पहले यानी 8 मई को स्वास्थ्य विभाग ने डॉ. पूनिया को उक्त कार्यों का नोडल ऑफिसर बनाया था। इतने कम समय में और पाेस्टर प्रकरण के तुरंत बाद ड्यूटी बदलने की टाइमिंग काे लेकर सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले से मलेरिया कंट्रोल प्रोग्राम काफी दिनों से चल रहा है। बाकायदा टीमें फील्ड में जाकर ब्लड स्लाइड बनाने, फीवर जांच व एंटी लारवा एक्टिविटी कर रही हैं।
इस प्रकरण के चलते ड्यूटी बदलने की चर्चा
दरअसल, यह फेरबदल अर्बन एस्टेट प्रकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। गुरुग्राम से लौटे युवक की दो रिपोर्ट्स वायरल होने के बाद उसको डॉ. पूनिया की टीम ने आइसोलेट किया था। इसके आवास के बाहर नियमानुसार कोविड-19 डू नॉट विजिट का पोस्टर चस्पा दिया था। इसके बाद से मामला और गर्माया था, क्योंकि युवक और उसका परिवार राजनीतिक रसूखदार बताया है। बकायदा, हेल्थ टीम को सबक सिखाने की बात भी सामने आई थी। नतीजतन चंद घंटों बाद डॉ. पूनिया से उक्त चार्ज छीन लिया। नये आदेश मिलने के बाद डॉ. पूनिया ने अपने फेसबुक अकाउंट पर प्रकरण को एक पोस्ट डाली है जोकि काफी वायरल हुई। इस मामले को लेकर एमपीएचडब्लू सहित अन्य संगठनों में काफी रोष है। वहीं डीसी इस मामले को विभाग का आंतरिक मसला बात रही हैं।
ये भी जानें... डॉ. रमेश पूनिया ने फेसबुक पर यह किया है पोस्ट
दोस्तों। स्वास्थ्य विभाग में नौकरी करते हुए मुझे 27 वर्ष हो गए हैं। लेकिन रविवार को मुझे महसूस हुआ कि चाहे अधिकारी हो या कर्मचारी सभी को सत्तासीन राजनेताओं के समक्ष झुकना पड़ता है। मेरे साथ भी ऐसी ही एक घटना घटी। रविवार को मातृ दिवस था। मेरे कानों में मेरी माता स्व. चंद्रमुखी, पूर्व जिला परिषद सदस्या के बोल गूंज रहे थे कि चाहे कोई अमीर हो या गरीब, सबको एक नजर से देखना। कोई भी व्यक्ति कोरोना संदिग्ध होता है नियमानुसार व्यक्ति की रिपोर्ट आने तक अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में दाखिल रहना पड़ता है। मैं सुबह 5 बजे उठकर जिस संदिग्ध युवक को आइसोलेशन वार्ड में लेकर आया था, वो सत्ता प्रभाव का प्रयोग करके 11 बजे तक घर वापस आ गया। मेरे ऊपर भी ऊपर से दबाव बनाया गया कि इसके घर के बाहर पोस्टर नहीं लगाना। लेकिन मैंने भी सोच लिया था कि चाहे मेरी नौकरी चली जाए पर मैं अपना कार्य करूंगा। पूरी टीम उसके घर गई और पोस्टर भी चस्पा किया। मेरे साथ कार्य कर रहे मेरे सभी एमपीएचडब्ल्यू का शुक्रिया।
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