कोरोना संकट के बीच इंदौर ने एक बार फिर मानवता की मिसाल पेश की है। भीलवाड़ा में फंसे 17 वर्षीय लड़के काे यहां के जनप्रतिनिधियों की तत्परता के कारण इंदाैर लाया जा सका। हुआ यूं कि ग्रेटर तिरुपति नगर निवासी योगेश जैन का 17 वर्षीय बेटा अयान तीन साल से कोमा में है।
उसका घर पर भी इलाज चलता है। कुछ दिन पहले उसे राजस्थान के भीलवाड़ा में रह रही नानी के पास ले जाया गया। इस बीच सरकार ने लॉकडाउन की घोषणा कर दी। इससे उसे इंदौर नहीं लाया जा सका। वहां उसकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी।
इसकी जानकारी पिता ने भाजपा नेता सुमित मिश्रा को दी। मिश्रा से पता चलने पर विधायक रमेश में दोला ने एडीएम बीबीएस तोमर से परमिशन दिलाई। फिर सासंद शंकर लालवानी और विधायक महेंद्र हार्डिया ने भी राजस्थान में भीलवाड़ा के सांसद और विधायकों से बात की।
रास्तेभर पुलिस अनुमति होने के बाद भी दिक्कत
याेगेश जैन ने बताया कि इंदाैर से सभी अनुमतियां लेकर मैं तीन दिन पहले भीलवाड़ा रवाना हुआ था। तब भी बहुत परेशानी हुई। चित्तौड़ में मुझे रोक लिया गया। जैसे तैसे विधायक रमेश मेंदोला ने कलेक्टर से बात कर आगे जाने की अनुमति दिलवाई। लौटते समय तो उम्मीद ही टूट गई थी, लेकिन इंदौर के जनप्रतिनिधियाें और मित्रों ने भरपूर मदद की। पायलट के फोन के बाद भीलवाड़ा के कलेक्टर और एसपी ने भी भरपूर मदद की।
जब दिक्कत आई तो सचिन पायलट ने की मदद
इंदाैर से अनुमतियां मिलने के बाद भी अयान काे भीलवाड़ा से लाने में परेशानी हो रही थी। तभी मिश्रा के कहने पर कांग्रेस के पूर्व विधायक सत्यनारायण पटेल ने राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट से बात की। पायलट ने भीलवाड़ा पुलिस सुपरिंटेंडेंट और कलेक्टर को निर्देश दिए, तब कहीं जाकर वहां से उसे लाने की सारी अनुमतियां मिलीं और परिवार अयान काे लेकर इंदौर पहुंचा।
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