(अंबिकापुरी से गौरव शर्मा)एरोड्रम रोड पर बीएसएफ पानी की टंकी के सामने अंबिकापुरी मेन क्षेत्र। काेराेना का एक मरीज यहां भी मिला। इसलिए बुधवार सुबह पहले पुलिस और फिर मेडिकल की टीम मरीज के यहां पहुंची।
परिजनाें औरपड़ाेसियाें से जानकारी ली। पूछा कि आप में से किसी को तेज बुखार, सर्दी-खांसी तो नहीं? लोगों ने इनकार कर दिया। मरीज के एक परिजन ने बताया कि वह किराना की एक दुकान पर गया था।
टीम वहां भी पहुंची।
दुकानदार से पूछा कि आपको सर्दी-खांसी, तेज बुखार तो नहीं आया? मना करने पर कहा कि अभी तो वैसे ही किराना दुकानें बंद हैं। फिर भी आप किसी भी कोई सामान मत देना।
टीम परिवार के सभी सदस्यों कोक्वारेंटाइन वार्ड ले गई। मरीज और पड़ोसियाें के घर को रेड अलर्ट पर रखा। बाहर ‘होम अंडर क्वारेंटाइन’ ‘डू-नॉट विजिट’ चस्पा कर दिया।
डर ऐसा- दूध की थैली को धो रहे
इसके बाद निगम की टीम ने अंबिकापुरी मेन वाली पूरी गली को सैनिटाइज अाैर सील कर दिया। लाेगाें काे हिदायत दी कि घरों में ही रहें। रहवासी रवि ने बताया कि हम लॉकडाउन के बाद से ही घर में हैं। अब और ज्यादा सतर्क हो गए हैं। कई परिवारों ने तो दूध लेने तक से इनकार कर दिया। जिन परिवारों ने लिया, उन्होंने दूध की थैली काे डिटर्जेंट के पानी में धाेया।
एमआरटीबी : कुछ कर्मचारियों को न एन-95 मास्क मिला न प्रशिक्षण
शहर में कोरोना पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। सबसे ज्यादा कोरोना वायरस फैलने का खतरा एमआर टीबी अस्पताल में है। अस्पताल के कर्मचारियों को न ही प्रशिक्षण और न ही एन 95 मास्क उपलब्ध कराए हैं। इससे उनको वायरस लगने का खतरा सबसे ज्यादा है।
तृतीय और चतुर्थ श्रेणी सहित अन्य 30 से ज्यादा कर्मचारियों को महामारी से निपटने का कोई प्रशिक्षण नहीं दिया है। सिर्फ फेसबुक और वाट्सएप के सहारे ही जानकारी दी गई। बड़े डॉक्टर मरीज को अपने पास भी फटकने नहीं दे रहे।
मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी जूनियर डॉक्टरों के भरोसे है।
डॉक्टरों को तो फिर भी प्रोटेक्शन किट मिल रही है, लेकिन तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी जो मरीजों से सीधे संपर्क में आ रहे हैं, उनको सुरक्षा किट तो दूर एन-95 मास्क तक नहीं मिल पा रहे हैं। पैथोलॉजी, एक्सरे, दवाई वितरण करने वाले, पर्ची बनाने वाले, व्हीलचेयर/ स्ट्रेचर चलाने वाले, एम्बुलेंस ड्राइवर एवं स्टाफ आदि को ट्रेनिंग और सुरक्षा की आवश्यकता है। कर्मचारियों का कहना है ऐसा न हो कि उनका काम करने का मनोबल टूट जाए और खामियाजा जनता भुगते।

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