अवैध तरीके से ब्लड जमा कर नर्सिंग होम में बेचने वाले शातिरों के गिरोह की तलाश पुलिस कर रही है। अभी मात्र संतोष और सोनू ही पुलिस की गिरफ्त में आए हैं। जांच के दौरान यह बात आई है कि रमेश ब्लड बैग का सप्लायर है। वहीं सुमंत कई नर्सिंग होम और गलत तरीके से ब्लड निकालने वाले लोगों के संपर्क में है।

रमेश इन धंधेबाजों को बैग, सिरिंज और ब्लड टेस्ट किट उपलब्ध आदि उपलब्ध कराता है।

वहीं सुमंत इस ब्लड को नर्सिंग होम तक पहुंचाता है। जांच में कुछ नर्सिंग होम के नाम सामने आए हैं।

इन सभी का सत्यापन कराया जा रहा है। जक्कनपुर के एडिशनल एसएचओ अनिल कुमार ने कहा कि पुलिस जानकारी और सामने आई है। पुलिस उसका सत्यापन कर रही है।

ब्लड बैग आम आदमी को बेचना प्रतिबंधित है। ऐसे में इन शातिरों के साथ साथ वह दुकानदार भी दोषी है जो रमेश को ब्लड बैग बेचा है। ड्रग डिपार्टमेंट और पुलिस की टीम इसका पता लगा रही है कि आखिर संतोष और सोनू के पास ब्लड बैग आया कहां से था। दवा दुकानदार तक पहुंचना बहुत आसान है।

दोनों शातिरों का फोन बंद, पुलिस कर रही छापेमारी

थाने में मामला दर्ज होने के बाद से रमेश और सुमंत ने अपना फोन बंद कर लिया है। हालांकि जिस दिन संतोष और सोनू पकड़ाया था उस दिन सुमंत और रमेश से ड्रग अधिकारी ने बात की थी और दोनों ने फोन पर यह स्वीकार किया था कि वे खून के गलत कारोबार में संलिप्त हैं। पुलिस रमेश और सुमंत की तलाश में छापेमारी कर रही है।

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