पिछले 30-40 वर्षों के दौरान समाज व परिवार में बदलाव आए हैं।
इसमें खासकर अपनों के लिए समय न निकाल पाना, दूसरे की भावना व संवेदना को न समझ पाने से कही न कही रिश्तों की आंच मंद पड़ गई है।
ऐसे में इस काेराेना वायरस के मद्देनजर चल रहे लॉकडाउन में उन रिश्तों की गर्माहट को नजदीक से समझने व महसूस करने का बेहतर समय है।
यह उद्गार गुरूवार को एसडीएम एवं साहित्य मंच के संरक्षक डॉ.सूरजसिंह नेगी ने आमजन के लिए इस संकट की घड़ी में एक संदेश के रूप में दिया है।
उन्होंने बताया कि बिना वजह के बाहर न निकलना है।
सोशल डिस्टेंसिंग का पूर्ण पालन होना चाहिए।
सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी का पूर्ण पालन करें। स्थानीय प्रशासन का पूर्ण सहयोग करें। इस संकट की घड़ी में गरीब व असहाय लोगों की मदद के लिए सक्षम लोगों को आगे आकर यथा योग्य खाद्य सामग्री देकर पुण्यार्जन करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि हमने पिछले दो साल से पाती अपनों के नाम मुहिम के तहत भी पत्रों के जरिए रिश्तों में मिठास घोलने का कार्य किया गया है। इन सभी के पत्रों को निकट भविष्य में एक पुस्तक का रूप देने की योजना है।
वर्तमान में स्कूली बच्चें लॉकडाउन के चलते अपने परिवारजन के साथ घरों में रह रहे हैं। सदुपयोग करने के लिए टोडा के विभिन्न संस्था प्रधानों से सम्पर्क कर स्कूली बच्चों को वाट्सएेप नंबर से जोड़कर उन्हें साहित्यिक गतिविधियों के लिए प्रेरित किया जाएगा।
बच्चों को प्रतिदिन का अनुभव डायरी लेखन के माध्यम से कहानी, उपन्यास, कविता पढ़ कर उस पर अपनी समीक्षा लिखने एवं किसी अपने को पत्र लिखने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
इससे एक ओर जहां साहित्य के प्रति जुड़ाव होगा वहीं बच्चें मानसिक तौर पर मजबूत बनेंगे। वही अपनों की भावनाओं को समझने एवं अपनी भावनाएं उन तक पहुंचाने में मददगार साबित होगी।
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