चैत्र शुक्ल पक्ष नवमी पर गुरुवार काे श्रीराम जन्माेत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर हिंदू परिवार अपने घराें में श्रीराम भक्त हनुमान की पूजा-अर्चना करेंगे। बांस में अाम का पत्ता बांधकर बजरंग बली के ध्वज के साथ तुलसी जी की पिंडी के समक्ष विधि-विधान से बजरंग बली का ध्वज स्थापित किया जाएगा। मान्यता है िक घर में बजरंग बली का ध्वज रहने से राेग-दुख अाैर असुरी ताकताें का विनाश हाेता है।
एेसे में जब पूरा विश्व काेराेना जैसी महामारी से जूझ रहे हैं, इस असुरी ताकत काे मिटाने के लिए श्रद्धालु बजरंग बली का अाह्वान करेंगे। विधि-विधान से महावीरी ध्वज काे स्थापित कर कथा सुनने की परंपरा है।
माता तुलसी की विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी। प्रभु राम की अारती के बाद लाेगाें के बीच चरणामृत अाैर प्रसाद का वितरण किया जाएगा। परिवार के सदस्य प्रसाद ग्रहण करेंगे। श्रीराम जन्माेत्सव पर विभिन्न अखाड़े जुलूस निकालते हैं, लेकिन इस बार लाॅकडाउन के कारण जुलूस नहीं निकाले जाएंगे।
दाेपहर 12:32 बजे से 2:32 बजे तक कर्क लग्न
पंडित सुधीर पाठक का कहना है कि अनंत चतुर्दशी अाैर श्रीराम जन्माेत्सव के लिए मध्याह्न काल शुभ माना गया है। शास्त्राें के अनुसार श्रीराम का जन्म मध्याह्न काल में हुअा था। दाे अप्रैल काे तड़के 3:40 बजे से नवमी तिथि शुरू हाे जाएगी, जाे तीन अप्रैल तड़के 2:43 बजे तक है। 2 अप्रैल काे दिन के 11:10 बजे से दाेपहर 1:40 बजे तक श्रीराम जन्माेत्सव के िलए बहुत ही शुभ है। दाेपहर 12:32 बजे से 2:32 बजे तक कर्क लग्न है, जिसमें जन्माेत्सव मनाना शुभ हाेगा। इसके बाद शाम 4:46 बजे तक सिंह लग्न भी शुभ है।
श्री राम जन्माेत्सव पर व्रत रखने की रही है परंपरा
श्रीराम के जन्माेत्सव पर व्रत रखने की परंपरा है। संतान की प्राप्ति के लिए श्रीराम की विधि-विधान से पूजा-अर्चना फलदायक माना गया है। नवमी पर उपवास रखकर पूजा करने से इच्छित फल की प्राप्ति हाेती है। श्रीराम काे भगवान विष्णु का अवतार माना गया है। उन्हाेंने मानवजाति के कल्याण के लिए रावण व अन्य असुराें का संहार किया था।
महावीरी ध्वज के लिए लोगों ने बाजारों में जाकर बांस खरीदे।

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