पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष प्रकृति में काफी परिवर्तन नजर आ रहा। कोई भी महीना ऐसा नहीं है, जिसमें बारिश नहीं हुई है। इस कारण पेड़-पौधों में पतझड़ का अहसास नहीं हो रहा। अप्रैल के अंत में भी जंगलों में हरियाली झलक रही है। ठंडकता भी बनी हुई है। लॉकडाउन भी प्रकृति में हरियाली बनाए रखने में सहायक बन रही है। लॉकडाउन लोगों के भले ही समस्या बनी हो लेकिन पर्यावरण व वन्य जीवन के लिए वरदान साबित हुआ है।
लॉकडाउन के समय में पेड़-पौधों की वृद्धि व पक्षियों की ध्वनि व वन्य जीव जंतुओं के क्रियाकलाप से इसका प्रभाव स्पष्ट दिख रहा। हवा में धूल, वाहनों, उद्योगों से निकलने वाले धुएं दिखाई नहीं पड़ रहे। लॉकडाउन में वाहनों की शोरगुल भी नहीं है। नदियों के पानी का दोहन कम होने के कारण मार्च में सूखने वाली नदी में पर्याप्त व स्वच्छ जल प्रवाहित हो रही है।
पंडरिया वनपरिक्षेत्र के वन्यजीवों के क्रियाकलाप में भी परिवर्तन दिख रहा है। क्षेत्र शांत होने के कारण वन्यप्राणी अब शहर व घनी बसाहटों की ओर पहुंच रहे हैं। पिछले महीने भर में ब्लाॅक के मैदानी क्षेत्र में जंगली सुअर, भालू सहित 11 हाथियों का दल बसाहटों के बीच पहुंच चुके हैं। वहीं वनांचल में लोगों की आवाजाही कम होने के चलते शांत जीवनयापन में कर रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन मौसम में दिखाई पड़ रहा है। फिलहाल तेज धूप व गर्मी नहीं के बराबर है।
जंगली जानवरों का नहीं हो रहा शिकार: लव कुमार
पंडरिया कॉलेज के जंतु विज्ञान प्राध्यापक लव कुमार ने बताया कि कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन में जानवरों का शिकार रुका है। साथ ही सभी जीव जंतुओं को स्वच्छ वातावरण मिला है। वन्य जीव शांत महसूस कर रहे। इससे उनको फायदा हो रहा है। वनस्पति शास्त्र की प्राध्यापक कामिनी वर्मा ने बताया कि लॉकडाउन के कारण पर्यावरण स्वच्छ हो गया है।

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