एमटीएच महिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में 103 संदिग्ध मरीजों को रखा है। सभी रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें डर सता रहा है कि कहीं उनके पड़ोस के मरीज तो संक्रमित नहीं? क्योंकि रिपोर्ट में देरी के कारण संक्रमित व्यक्ति के साथ वे लोग भी हैं, जिन्हें संक्रमण नहीं हुआ है।

दरअसल, एमटीएच अस्पताल सहित अलग-अलग होटलों, मैरिज गार्डन व अन्य भवनों में कोरोना वायरस संक्रमण के संदिग्ध मरीजों को भर्ती किया है लेकिन मरीजों की जांच रिपोर्ट न मरीजों को पता चल पा रही है और न ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को जानकारी मिल पा रही है। आइसोलेशन वार्ड में भेजे गए लोगों के परिजन रोजाना एमजीएम मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य विभाग कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। अक्षत गार्डन, दस्तूर गार्डन, एमवायएच सहित सभी जगह आइसोलेशन में भेजे गए लोगों की यही स्थिति है।

3-3 दिन बाद भी उन्हें बीमारी का पता नहीं चल पा रहा है। मेडिकल कॉलेज को वायरोलॉजी लैब से रोज रात 11 बजे के बाद रिपोर्ट मिलती है। इसमें पॉजिटिव मरीजों की जानकारी होती है लेकिन निगेटिव मरीजों की सूची नहीं मिल पा रही है। यही कारण है कि अस्पतालों में भर्ती मरीज डर के साए में जी रहे हैं। उन्हें यह भी नहीं पता चल पा रहा है कि उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव है या नेगेटिव। इस बारे में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में बात की गई तो जवाब मिला कि मेडिकल कॉलेज से कोई जानकारी नहीं आई है।

आईईटी होस्टल को आइसोलेशन सेंटर बनाने का विरोध

कुलपति डॉ. रेणु जैन ने आईईटी होस्टल को आइसोलेशन सेंटर बनाने का फैसला लिया। इसका पास में ही क्वार्टर में रहने वाले कर्मचारियाें ने विरोध शुरू कर दिया। उधर, खंडवा रोड स्थित अरिहंत कॉलेज ने परिसर काे आइसोलेशन सेंटर के लिए देने की इच्छा जताते हुए कलेक्टर को पत्र लिखा। काॅलेज संचालक कविता कासलीवाल ने पत्र में कहा कि यहां 20 रूम में कम कम साै लोगों को पर्याप्त दूरी के साथ रखा जा सकता है।

मेडिकल कॉलेज को वायरोलॉजी लैब से रोज रात 11 बजे के बाद रिपोर्ट मिलती है।


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