रिपोर्ट-1 दीपेश शर्मा.इंदौर में टाटपट्टी बाखल, रानीपुरा, सिलावटपुरा सहित कई क्षेत्रों में कोरोना का संक्रमण लोगों की लापरवाही से फैल चुका है। इन क्षेत्रों में न सिर्फ मेडिकल टीम पर पथराव हुए, बल्कि पुलिस को यहां लोगों को घरों में रखने के लिए डॉमिनेशन मार्च निकालना पड़ा। कैमरे लगाकर लोगों की घेराबंदी करना पड़ी तो वहीं दूसरी तरफ अधिकांश कॉलोनियों में पुलिस का एक भी जवान नहीं है, लेकिन अनुशासन ऐसा कि गलियों में तो दूर, गैलरी में भी कोई नजर नहीं आया।
भंवरकुआं में आनंद कोचिंग क्लास से इंद्रपुरी में दाखिल हुए तो ऐसा लगा ही नहीं कि यह वही क्षेत्र हैं, जहां सबसे ज्यादा छात्र रहते हैं। यहां करीब 70 हजार लोग रहते हैं। इस हिसाब से यह सबसे ज्यादा आबादी वाली कॉलोनी है। इंद्रपुरी, ब्रह्मपुरी, सर्वानंद नगर सहित आसपास हजार से ज्यादा होस्टल हैं। यहां लगभग हर गली में रेस्त्रां, चाय की दुकान और स्नैक्स के पॉइंट हैं।
इन जगहों पर रात तीन बजे भी सन्नाटा नहीं होता था, लेकिन सोमवार सुबह 11 बजे यहां चारों तरफ बंद दुकानें और सन्नाटा पसरा हुआ था। दूर से भी कोई वाहन निकले तो पूरी कॉलोनी में उसकी आवाज गूंज रही थी। यहां रहने वाले मनीष और सुदीप ने बताया कि 20-25 साल पहले कॉलोनी ऐसी ही हुआ करती थी, जब यहां सिर्फ रहवासी रहते थे। यूनिवर्सिटी के बाद छात्र आने लगे तो ऐसी शांति फिर कभी नजर नहीं आई। सबसे बड़ी बात थी कि यहां गलियों में एक भी पुलिसकर्मी नहीं था, लेकिन लोग अनुशासन में नजर आए।
इन कॉलोनियों का अनुशासन भी बढ़ा रहा शहर का मान
पश्चिमी क्षेत्र की दूरस्थ कॉलोनियों में शामिल राजेंद्र नगर, विज्ञान नगर, धनवंतरी नगर, वैशाली नगर और आसपास की कॉलोनियों में भी बड़ा ही शांत नजारा था। यहां सिर्फ प्रमुख चौराहों पर पुलिस के एक या दो जवान बैठे थे। कॉलोनियों में एक भी व्यक्ति न बाहर नजर आया और न बालकनी में दिखा। यहां के मेडिकल स्टोर जरूर खुले थे। वहां भी एक या दो ग्राहक ही थे।
भूख की आग मिटाने गंदा नाला लांघ राशन लेने जा रहे लोग
रिपोर्ट-2-राघवेंद्र बाबा. शहर के कई इलाकों में जहां दाना-पानी की किल्लत है तो वहीं कुछ इलाकों में धड़ल्ले से अवैध शराब तक बेची जा रही है, लेकिन किराना दुकान, डेयरी व अन्य दुकानों पर निगरानी रखने वाली पुलिस यहां नहीं पहुंच पा रही है। ऐसा ही वाकया सोमवार दोपहर 12.30 बजे लिंबोदी गांव में देखने को मिला। दरअसल, यहां आधा दर्जन से ज्यादा घरों और झोपड़ियों से अवैध शराब बेचे जाने की खबर मिली थी।
गांव पहुंचकर एक युवक से शराब की मांग की तो उसने पैसे लिए और मिथुन नाम के शख्स के यहां पहुंच गया। वहां उसकी पत्नी मिली। युवक से रुपए लेकर महिला ने थैली में शराब दे दी। कुछ दूर जाकर गांववालों से बात की तो उन्होंने बताया कि तेजाजी नगर पुलिस की शह पर दारा सिंह, मौसी, काकी, सुरेश, मामा, अनिल और अन्य लोग घरों से शराब बेचते हैं। ऐसी ही स्थिति स्कीम 140 और स्कीम नंबर 51 के एक खेत में, टिगरिया बादशाह में भी दिखी। लोग दोगुने रेट पर शराब खरीद भी रहे थे।

रानीपुरा का रास्ता सील होने से कबूरतखाना से तोड़ा जा रहे लोग
प्रेमसुख सिनेमा के पास गंदा नाला बहता है। यहां कुछ लोग कंधे व हाथों में राशन ले जाते दिखे। वे कबूतरखाना से तोड़ा की तरफ जा रहे थे। रशीद नाम के युवक ने बताया कि बाहर कर्फ्यू लगा हुआ है। गरीब लोग जैसे-तैसे राशन लेकर जाते हैं तो पुलिस उन्हें डंडे मारती है। इससे बचने के लिए लोग जान जोखिम में डालकर नाले के अंदर से जा रहे हैं। इससे भी बीमारी का खतरा हो सकता है। इस बीच एक बुजुर्ग ने कहा कि अफसरों ने रानीपुरा जाने वाला सारा रास्ता सील कर दिया है। अब वहां से कोई आ-जा नहीं सकता। अंदर जो लोग फंसे हैं, उनके पेट की चिंता किसी को नहीं है। जिन्हें कोरोना निकला है, वे अस्पताल में हैं, लेकिन इसकी सजा पूरा मोहल्ला क्यों भुगते। इसलिए लोग नाला फांदकर आना-जाना कर रहे हैं। यहां कई मजदूर-कामकाजी लोग हैं, लेकिन प्रशासन किसी की सुध नहीं ले रहा।
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