(आलोक द्विवेदी) प्रदेश के 678 मेडिकल कॉलेज, सदर हॉस्पिटल, पीएचसी-सीएससी, रेफरल हॉस्पिटलों सहित दूसरे सरकारी हॉस्पिटलों में कार्यरत डॉक्टर, मेडिकल ऑफिसर, पैरामेडिकल स्टॉप सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी खाली पेट लोगों को कोरोना वायरस से बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। प्रदेश के सरकारी हॉस्पिटलों में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों को पिछले 6 से 8 महीने से सैलरी नहीं मिली है।

स्वास्थ्यकर्मी और उनसे जुड़े संगठनों ने प्रदेश सरकार सहित स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारियों से मुलाकात कर कई बार पैसे की मांग की। सैलरी और मानदेय की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। इसके बाद भी पैसा नहीं मिला।

इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने हर महीने स्वास्थ्यकर्मियों को वेतन रिलीज करने का दावा किया है, जबकि स्वास्थ्य विभाग से जुड़े संगठन बिहार चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के महामंत्री विश्वनाथ सिंह ने उनके दावे काे गलत बताया है।

विश्वनाथ सिंह के मुताबिक प्रदेश के 7 मेडिकल कॉलेज व हॉस्पिटल, 36 सदर हॉस्पिटल, 38 सब डिविजनल हॉस्पिटल और 67 रेफरल हॉस्पिटल सहित लगभग 530 पीएचसी-सीएसी हॉस्पिटलों में कार्यरत लगभग 15 हजार डॉक्टर व 20 हजार कर्मचारियों को पिछले 6 से 8 महीने से सैलरी नहीं मिली है।

मार्च में वेतन के लिए होने वाली थी हड़ताल, कोरोना वायरस की वजह से स्थगित की

मार्च के अंतिम सप्ताह में स्वास्थ्यकर्मी हड़ताल की तैयारी कर रहे थे, लेकिन कोरोना वायरस की महामारी को लेकर उन्होंने योजना स्थगित कर दी। सैलरी और मानदेय की मांग को लेकर प्रदेश के स्वास्थ्यकर्मियाें ने 8 फरवरी को वेतन नहीं तो काम नहीं के नारे के साथ धरना-प्रदर्शन शुरू किया था।

लेकिन, अधिकारियों के आश्वासन के बाद हड़ताल स्थगित कर दिया गया। 17 दिनों के इंतजार के बाद जब पैसा नहीं मिला, तो फिर 25 फरवरी को धरना-प्रदर्शन किया था।

सैलरी नहीं मिलने से कर्मियों को हो रही परेशानी

सरकार पर जहां डॉक्टर, मेडिकल ऑफिसर, पैरामेडिकल स्टॉप का लगभग 200 करोड़ रुपए बकाया है, वहीं स्वास्थ्य से जुड़े दूसरे तकनीकी कर्मचारियों की सैलरी और मानदेय के रूप में लगभग 350 करोड़ रुपए सरकार ने नहीं दिए हैं। इसकी वजह से कर्मचारियों का काफी परेशानी हो रही है। स्वास्थ्यकर्मी हरीश कुमार का कहना है कि सैलरी नहीं मिलने से घर खर्च के साथ अन्य कामों पर असर पड़ा है।

प्रदेश में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों को 6 से 8 महीने से वेतन नहीं मिला है। ऐसे में यदि सरकार की ओर से स्वास्थ्यकर्मियों को वेतन नहीं मिला तो वह हड़ताल करने के लिए बाध्य होंगे। -

विश्वनाथ सिंह, महामंत्री, बिहार चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ

बिहार के सभी स्वास्थ्यकर्मियों को हर महीने निर्धारित समय पर वेतन दिया जा रहा है। इसके बाद भी यदि प्रदेश के किसी हॉस्पिटल में कार्यरत कर्मी या स्वास्थ्यकर्मी को वेतन नहीं मिला है, तो वे शिकायत करें। -मंगल पांडेय, स्वास्थ्य मंत्री
(प्रतीकात्मक तस्वीर) स्वास्थ्यकर्मी और उनसे जुड़े संगठनों ने प्रदेश सरकार सहित स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारियों से मुलाकात कर कई बार पैसे की मांग की। सैलरी और मानदेय की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। इसके बाद भी पैसा नहीं मिला।

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