(शशांक त्रिपाठी).कोरोना वायरस के संक्रमण चक्र को तोड़ने के लिए पूरे देश में जारी लॉकडाउन का असर आमजन के साथ ही शहर के मुक्तिधाम में भी नजर आने लगा है।
बिजयनगर रोड स्थित मुक्तिधाम में लॉकडाउन के दाैरान 53 अंतिम संस्कार हुए। इन सभी के अस्थिकलश मुक्तिधाम में ही रखे हुए हैं। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक अस्थियों का पवित्र सराेवराें, नदियों में विसर्जन किया जाता है।
चूंकि आवागमन के तमाम साधन बंद हैं इसलिए ये अस्थिकलश विसर्जन के इंतजार में यहीं लॉकडाउन हैं।जाे हालात हैं उसे देखते हुए लगता है कि लॉकडाउन समाप्त होने के बाद ही इन अस्थियों का विसर्जन हो पाएगा।
बिजयनगर रोड स्थित मुक्तिधाम के व्यवस्थापक कालू सिंह चौहान ने बताया कि ऐसा पहली बार हुआ है कि इतने लंबे समय के लिए एक साथ इतनी बड़ी संख्या में अस्थि कलशों को यहां पर रखा गया है। हिंदू परंपराओं के मुताबिक दाह संस्कार के बाद तीसरे दिन सुबह मुक्तिधाम में अस्थियां या फूल चुनने का संस्कार हाेता है।
प्रदेश के ज्यादातर लाेग परंपराओं के मुताबिक पुष्कर जाते हैं, अस्थियों का गंगा में विसर्जन करने के लिए हरिद्वार जाते हैं।
मृतकों के परिजनों ने अंतिम संस्कार के तीसरे दिन दिवंगतों के फूल चुनने का संस्कार ताे कर दिया, मगर पुष्कर या हरिद्वार जाने का संस्कार नहीं हाे पाया है।
लॉक डाउन के कारण परिजनों को आने-जाने की स्वीकृति न मिलने के कारण अस्थि विसर्जन की धार्मिक प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो पा रही है। उठावने व अन्य धार्मिक कार्यक्रम भी सूक्ष्म रूप में करने
पड़ रहे हैं।
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