4 गुना कम डीजल-पेट्रोल की खपत, हवा साफ
जिले में लॉकडाउन का एक माह पूरा हो चुका है। इन 30 दिनों में लोगों ने बेरोजगारी, परेशानी और बेबसी का मंजर देखा। हालांकि जरूरतमंदों की मदद के लिए जिला प्रशासन सहित समाजसेवियों ने खाद्य सामग्री पहुंचाकर मदद की है। अच्छी बात ये भी है कि वायु प्रदूषण कम होने के साथ ही नर्मदा का जल भी निर्मल हो गया है। लॉकडाउन के बाद से मजदूर बेरोजगार हो चुके हैं। व्यापारी अपना व्यवसाय नहीं कर पा रहे हैं। जिले के मजदूर तो अन्य राज्य व जिलों से वापस लौट चुके हैं। लेकिन अब भी जिले में अन्य राज्यों व जिलों के मजदूर फंसे हुए हैं। हालांकि राहत है कि पिछले एक सप्ताह से कोरोना के नए केस सामने नहीं आए हैं। इसके चलते लोगों को लग रहा है कि तीन मई तक लॉकडाउन खुल सकता है और फिर से पहले की तरह लोग काम-धंधे में लग जाएंगे।

24 मार्च की रात लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद किराना दुकानों पर भीड़ बढ़ गई। हालांकि 4 अप्रैल तक किराना, दूध, सब्जी की दुकानें खुली रही। 5 अप्रैल से टोटल लॉकडाउन किया गया। इसके बाद से जरुरी सामग्री की होम डिलेवरी सेवा शुरू की गई और पुलिस ने सख्ती बढ़ाई। तीन से चार दिन तक पुलिस ने बेवजह घूमने वालों पर डंडे भी चलाए। हालांकि इसके बाद से पुलिस ने नरमी बरती। लेकिन इसके बाद से पुलिस सभी पाइंट पर तैनात है और बेवजह घूमने वालों को घरों में रहने की हिदायत दे रहे है। चार अप्रैल से जिले में कोरोना के केस मिलने शुरू हुए। एक सप्ताह तक जिले में हड़कंप मचा रहा। हालाकि इसके बाद कुछ लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आने पर लोगों ने राहत की सांस ली। 14 अप्रैल को लोग यही आस लगाए बैठे थे की लॉकडाउन खुलेगा। लेकिन इसका द्वितीय चरण शुरू हो गया।

संक्रमण सेराहत...
6 लोगों की दूसरी रिपोर्ट भी निगेटिव, आज होगी छुट्‌टी

शुक्र है कि शुक्रवार को 6 लोगों की इलाज के बाद दूसरी रिपोर्ट भी निगेटिव आ गई। प्रभारी सीएमएचओ डॉ. बीएस सैत्या ने बताया शनिवार को इन्हें आइसोलेशन वार्ड से डिस्चार्ज किया जाएगा। वहीं 2 अन्य की पहली रिपोर्ट निगेटिव आई है। दूसरी रिपोर्ट भी निगेटिव आने पर छुट्टी मिलेगी। एक अन्य व्यक्ति की रिपोर्ट भी निगेटिव आई है। वहीं पिछले एक सप्ताह में कोई नया केस नहीं आया है। 49 लोगों की रिपोर्ट आना बाकी है। सेंधवा विकासखंड के कोटकिराड़ी गांव के युवक की तबियत खराब होने पर 4 दिन पहले उसे सिविल अस्पताल लाया गया था। कोरोना जांच के लिए उसका सैंपल लिया गया। शुक्रवार को उसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई है। बीएमओ डॉ. ओएस कनेल ने बताया 18 वर्षीय युवक का स्वास्थ्य खराब होने से जिला अस्पताल रैफर किया गया था। जांच में उसकी रिपोर्ट निगेटिव प्राप्त हुई है।

मैनेजमेंट ग्रुप की बैठक

कलेक्टोरेट में शुक्रवार को डिस्ट्रिक्ट मैनेजमेंट ग्रुप की बैठक हुई। कलेक्टर अमित तोमर ने बताया जिले में कुछ दिनों में किसी की पॉजिटिव रिपोर्ट नहीं आई है। यह हम सबके लिए अच्छी बात है। उन्होंने बताया बड़वानी व इंदौर में भर्ती कोरोना संक्रमितों की स्थिति सामान्य है। इलाज के बाद दूसरी रिपोर्ट भी निगेटिव आने पर उन्हें छुट्‌टी मिलेगी। लेकिन उन्हें 14 दिन होम क्वारंटाइन रहना होगा। इस दौरान एसपी डीआर तेनीवार, जिपं सीईओ मनोज सरियाम, सीएमएचओ डॉ. सैत्या, जिला आपूर्ति अधिकारी बीके कोष्ठा, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी एचएल अवास्या, डॉ. जगदीश यादव मौजूद थे।

पूरे होंगे ये काम...
शहर विकास की गति रुकी, 8 निर्माण कार्य अधूरे पड़े

लॉकडाउन के कारण शहर विकास की रफ्तार भी थम गई है। यदि लॉकडाउन नहीं होता तो अब तक सेल्फी पाइंट, दो सुलभ कॉम्पलेक्स, तीन नाली निर्माण सहित अन्य निर्माण कार्य पूरे हो जाते। सभी का नगर पालिका तेजी से काम करा रही थी। लेकिन लॉकडाउन की शुरू होने के बाद से काम बंद हैं। अब लोगों को ये सुविधाएं देरी से मिलेगी।

कुछ काम 50% हो चुके पूरे
नपा अध्यक्ष लक्ष्मण चौहान ने बताया इंदिरा बाल रेल उद्यान के पास सेल्फी पाइंट, पाटी रोड और भवती रोड पर सुलभ कॉम्पलेक्स, वार्डों में नाली निर्माण सहित अन्य निर्माण कार्य चल रहे थे। इनमें से कुछ काम 50 फीसदी तक पूरे हो चुके हैं। यदि लॉकडाउन न हीं होता तो एक से दो माह में लोगों को इनकी सुविधा मिलने लगती। इसके अलावा शहर में शॉपिंग कॉम्पलेक्स, कारंजा चौक से अंजड़ नाका तक डिवाइडरयुक्त सड़क, हॉकर जोन सहित अन्य निर्माण कार्यों को शुरू कराने की भी तैयारी चल रही थी।

हाथों को मिलेगा काम...
2 माह से काम बंद, लॉकडाउन के कारण नहीं जा पाए घर

लॉकडाउन के कारण सबसे ज्यादा परेशानी अन्य जिला या राज्य से जिले में काम करने आए मजदूरों को उठानी पड़ रही है। न तो ये अपने घर जा पा रहे हैं और न ही यहां रहकर जीवनयापन कर पा रहे हैं। चूनाभट्टी के पास तैयार हो रही पुलिस लाइन में मजदूरी करने के लिए कोलकाता, कटनी, धार, खरगोन, खंडवा के 70 से ज्यादा मजदूर आए थे। जो लॉकडाउन के कारण फंस गए हैं। मजदूरों ने बताया की दो माह से काम बंद हैं और लॉकडाउन के कारण घर नहीं जा पा रहे हैं।

नपा कर रही व्यवस्था
लॉकडाउन में फंसे अधिकांश मजदूर पूरे परिवार के साथ हैं। इनमें कुछ छोटे बच्चे भी हैं। हालांकि इन्हें नगर पालिका के प्रयास से राशन की व्यवस्था कराई गई है। कुछ मजदूरों ने बताया ठेकेदार कभी-कभी 200-300 रुपए देता है। इतने में परिवार का खर्च नहीं चलता। लॉकडाउन खुलने की उम्मीद थी। लेकिन 19 दिन और लॉकडाउन बढ़ने के बाद इनकी आशा निराशा में बदल गई।

हवा में शुद्धता...

जिले का एक्यूआई 68 जो संतोषजनक की श्रेणी में

टोटल लॉकडाउन के कारण एक महीने में शहर की आबोहवा बदल गई है। लोगों की माने, तो अब पेड़ों से महक आने लगी है, जो एक माह पहले नहीं आती थी। क्योंकि एक महीने से वाहन चलना बंद है। पेट्रोल और डीजल की खपत 4 गुना कम हो गई है। इससे वायु प्रदूषण में 80 प्रतिशत तक कमी आई है। पंप संचालकों के अनुसार एक महीने पहले रोजाना 2500 लीटर पेट्रोल और 5 हजार लीटर से ज्यादा डीजल की खपत होती थी। लेकिन लॉकडाउन के कारण रोजाना 600 से 700 लीटर पेट्रोल व 1000 से 1200 लीटर डीजल की खपत हो रही है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एसके बड़ोदिया ने बताया वायु प्रदूषण की मात्रा नापने के लिए कोई उपकरण नहीं हैं।

जिले का एक्यूआई 68

पीजी कॉलेज में वनस्पति विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. वीणा सत्य ने बताया केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार वायु गुणवत्ता 8 तरह के प्रदूषकों की मात्रा से निर्धारित होती है। इसमें सल्फर डाईऑक्साइड, कार्बन डाईऑक्साइड,, नाइट्रोजन ऑक्साइड,, ओजोन, अमोनिया, लेड शामिल है। पीएम (पार्टीकुलेटेड मेटर-धूल के कण) पीएम-10 व पीएम-2.5 मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। इससे श्वसन संबंधी रोग होते हैं। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) को 6 श्रेणी अच्छा, संतोषजनक, मध्यम, प्रदूषित, खराब, बहुत खराब व खतरनाक में बांटा गया है। मप्र प्रदूषण बोर्ड के अनुसार जिले का एक्यूआई 68 है, जो संतोषजनक श्रेणी (51-100) में रखा जा सकता है।

बदलेगी ये तस्वीर...

सप्लाय नहीं हुई इसलिए मवेशियों को खिला रहे फसल

लॉकडाउन के कारण सभी लोगों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। लेकिन सबसे ज्यादा किसानों को इसकी मार झेलनी पड़ रही है। सब्जी, फलों संबंधी फसल पूरी तरह से चौपट हो गई है। सब्जी मंडियां बंद होने से कई किसान टमाटर, गिलकी, ककड़ी सहित अन्य सब्जियां मवेशियों को खिला रहे हैं। वहीं अब वे किसान भी चिंतित है, जिन्होंने पपीता, केला, अमरूद, तरबूज की फसल लगाई है।

1 लाख रुपए हुए थे खर्च

किसान कैलाश मुकाती ने बताया उन्होंने एक लाख रु. खर्च कर एक एकड़ में पपीता लगाया था। जो बिकने के लिए तैयार हैं। लेकिन लॉकडाउन के कारण सप्लाय नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में कुछ पपीता खराब होने लगे हैं। इसी तरह पांच लाख रुपए खर्च कर 10 एकड़ में केला लगाया था। ये भी बिकने के लिए तैयार है। 4.5 लाख रु. खर्च कर 14 एकड़ में तरबूज लगाया था। जिसे मवेशियों को खिला दिया है। 6 एकड़ के टमाटर 30 रु. कैरेट बेसफर.पड़े।

वापसी का सफर..
वाहन नहीं मिले, गुजरात से पैदल मप्र आ रहे मजदूर

लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में लोग बाहर राज्यों में फंस गए हैं। इनमें से कई लोग पैदल ही घर जाने के लिए निकले हैं। ऐसे ही 5 लोग गुजरात से पैदल चलकर जंगल के रास्ते बोकराटा पहुंचे। इन्हें रोककर बोकराटा पुलिस चौकी प्रभारी ने जांच कराई। पैदल चल रहे राहगीर टीकमगढ़ व सीधी के लिए पैदल निकले हैं। बोकराटा में पांच लोग पंहुचे तो ग्रामीणजनों ने तत्काल पुलिस व स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी

स्वास्थ्य परीक्षण कराया

ग्रामीणजनों की सूचना पर मेडिकल ऑफिसर देवेंद्र वास्कले बोकराटा पहुंचे। यात्रियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं पाए गए। मजदूरों ने बताया गुजरात के बडोली से पैदल चलकर आए हैं। पुलिस चौकी प्रभारी पिंकी सिसौदिया ने मजदूरों के बताया चार मजदूर जिला सीधी व गोविंद पाल लुहरगांव जिला टीकमगढ़ का होना बताया। इन्हें पाटी थाना भेजा है। यहां से बड़वानी भेजा गया।

4 गुना कम डीजल-पेट्रोल की खपत, हवा साफ
4 times lower diesel-petrol consumption, air cleaner


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