शहर में कोरोना के मरीजों की संख्या थमने का नाम नहीं ले रही। रविवार को 22 और नए मरीज मिले, जबकि दो मरीजों की मौत हो गई। इंदौर में इस महामारी से मरने वालों का आंकड़ा 10 हो चुका है। यह देश के कुल मृत्यु के आंकड़े 110 का 9 फीसदी है। देर रात दो और संदिग्धों की मौत का पता चला, लेकिन प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की। एमजीएम मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में भी गफलत जारी है। विभाग ने शनिवार को जो रिपोर्ट दी, उसके हिसाब से रविवार को मरीजों की संख्या 150 होना थी, जबकि मेडिकल कॉलेज 135 बता रहा।
स्नेहलतागंज की नसरीन बी (53) और उदापुरा के मो. रफीक (50) ने दम तोड़ा। दोनों की कोई ट्रैवल हिस्ट्री सामने नहीं आई है। यह भी पता नहीं चला कि वे किस संक्रमित के संपर्क में आए। इधर, नए मिले मरीजों में सबसे ज्यादा 6 टाटपट्टी बाखल के हैं। इनमें भी 5 मरीज उस मकान के हैं, जहां शनिवार को 7 मरीज मिले थे। यानी यहां एक ही घर में 12 संक्रमित हो गए।
- नए मरीजों में शिक्षक नगर और नेहरू नगर के
- रानीपुरा के 52 साल और नयापुरा के 48 साल के पुरुष।
- उषा फाटक जेल रोड के 50 वर्षीय और चंदन नगर के 51 वर्षीय पुरुष
- नेहरू नगर का 30 वर्ष का युवक व शिक्षक नगर के 78 साल के बुजुर्ग।
- दौलतगंज की 70 साल की बुजुर्ग महिला, ब्रुकबांड कॉलोनी के 50 साल के पुरुष।
- टाटपट्टी बाखल के 40 वर्षीय पुरुष, 27 वर्ष की युवती, 35 वर्ष की युवती, 40 वर्ष का पुरुष, 20 व 25 साल की युवती।
- इकबाल कॉलोनी खजराना का 31 वर्षीय युवक, ग्रीन पार्क के 56 वर्षीय बुजुर्ग और साकेतधाम कॉलोनी का 35 वर्षीय युवक।
उप्र के कौशाम्बी से आए एक 46 वर्षीय व्यक्ति भी पॉजिटिव निकला। उसका उपचार चल रहा है। भर्ती 131 में मरीजों में से 23 की हालत गंभीर है, जबकि 108 स्थिर हैं।
पहले दौर के 30 मरीजों में से 20 ठीक, जल्द होंगे डिस्चार्ज
कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़ने के बीच रविवार को अच्छी खबर आई। पहले दौर में जो 30 पॉजिटिव मरीज मिले थे, उनमें से 20 की तबीयत ठीक हो गई है। कलेक्टर मनीष सिंह के मुताबिक, इनकी पहली टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई है। दूसरी जांच होते ही इन्हें डिस्चार्ज कर देंगे। शहर में 24 मार्च को पहला मरीज मिलने के बाद ये पहली बार होगा, जब पॉजिटिव मरीज डिस्चार्ज किए जाएंगे।
पहले एक दिन में 40 टेस्ट हो रहे थे, अब 200 होंगे
कोरोना संक्रमण की जांच करने के लिए एमजीएम मेडिकल कॉलेज की वायरोलॉजी लैब की क्षमता पांच गुना तक बढ़ गई है। संभागायुक्त आकाश त्रिपाठी ने बताया कि पहले जहां हम केवल 40 टेस्ट कर पाते थे, अब 200 टेस्ट कर रहे हैं।
इससे शहर में ज्यादा सैंपल लिए जा सकेंगे। इसके अलावा लैब के लिए यूनिवर्सिटी सहित कुछ अन्य संस्थानों से माइक्रोबायोलॉजिस्ट की सेवाएं ली हैं। इससे लैब 24 घंटे काम करेगी।
त्रिपाठी के मुताबिक एक टेस्ट को पूरा करने में 14 से 16 घंटे लगते हैं। पहले यहां के टेस्ट आईसीएमआर (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) में पुनः परीक्षण के लिए भेजते थे, अब नहीं भेजे रहे। डीन डॉ. ज्योति बिंदल ने बताया कि डॉ. हेमचंद्र झा और डॉ. हेमेंद्र सिंह परमार वॉलेंटियर सेवा दे रहे हैं। वे लोग खुद पीसीआर मशीन लेकर लैब में जांच में सहयोग करेंगे।
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