भोजपुर जिले में सरकारी व निजी सहायता से बने 150 तालाब के मेढ़ों पर लगाये जायेंगे जामुन, अमरूद व पपीता के पौधे। इसके लिए मत्स्य विभाग ने सभी जलकरों (तालाब) के संचालकों से उनकी लंबाई और चौड़ाई का विवरण मांगा गया है। इसे ले जिला मत्स्य विभाग के द्वारा 50 सरकारी सहायता से 50 और 100 निजी लागत से बने संचालकों से संपर्क किया गया है। वहीं पूरे जिले में कुल 682 आहर, पोखर व पईन पर विभिन्न प्रकार के पौधें लगाने की योजना है। मत्स्य विभाग विशेष कर अपने जलकरों के मेढ़ों पर इस तरह से फलदार पौधों को लगाकर 3 प्रकार से लाभ देना चाहता है। पहला इन फलदार पौधों के लगाने से तालाब में धूप की मात्रा नहीं घटेगी। वहीं तालाब के अंदर मछलियों को पौष्टिक भोजन मिलने के साथ मत्स्य पालन करने वाले किसान को मछली पालन के साथ-साथ इन पौधे से फल भी मिलने लगेगा। इस कारण उनकी आमदनी भी बढ़ जायेगी। इन्हीं लाभों को देखते हुए तालाबों के मेढ़ों पर इन फलदार पौधों को लगाने की योजना बनी है। सभी से विवरण मिलते ही वन विभाग को पौधों की सूची भेज फलदार पौधों की मांग की जायेगी। उक्त कवायद मत्स्य विभाग जल जीवन अभियान के तहत कर रहा है।
इन पौधों के लगने से जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ने से मछली उत्पादन बढ़ेगा
किसी भी तालाब के मेढ़ पर यदि जामुन, अमरूद व पपीता जैसे छोटे व फलदार पौधे लगाये जाते है, तो इससे कई प्रकार के लाभ होते है। इसी जानकारी देते हुए आरा केवीके के हेड डॉ. पीके द्विवेदी ने बताया कि इसके पत्ते के तालाब में गिरने से जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ती है। इस कारण फ्लैक टोन की मात्रा बढ़ जाती है। फ्लैक टोन मछलियों का सबसे पसंद वाला मुख्य भोजन है। इसके खाने से मछली का ग्रोथ तेजी से होता है। वहीं फलों को बेच कर भी तालाब संचालक लाभ कमाते है।
मत्स्य पदाधिकारी बोले: पौधों के लगाने से तालाब संचालकों को मिलेगा
जिले में सरकारी व निजी 150 जलकर है। इन सभी के मेढ़ों पर जामुन, अमरूद व पपीता के पौधे लगाये जायेंगे। इन पौधों से पार्यावरण, संचालक व मछली तीनों को लाभ होगा। इसे देखते हुए सभी संचालकों से तालाब का पूरा विवरण मांगा गया है।
सियाशरण सिंह, जिला मत्स्य पदाधिकारी, भोजपुर
जागरुकता शिविर
{ सदर अस्पताल में कोरोना वायरस से बचाव के लिए किया जाएगा जागरूक।
जिले के इसी तरह के तालाबों के मेंढ पर लगेंगे फलदार पौधे।


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