कोटा/बूंदी.मेज नदी बस दुखांतिका ने 11 साल के साैम्य और जिया का सबकुछ छीन लिया। हादसे में साैम्य के माता-पिता और छाेटे भाई की माैत हाे गई। वहीं जिया के भी माता-पिता और छाेटी बहन की भी इस हादसे में जान चली गई। हादसे के बाद से दाेनाें की जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। साेमवार काे भास्कर रिपाेर्टर दाेनाें बच्चाें के घर पहुंचा ताे परिवार के लोग उनको ढांढस बंधा रहे थे। हर काेई साैम्य और जिया काे दुलार रहा था ताकि उनका दर्द कुछ कम हाे सके। दोनों बच्चों की परीक्षा सिर पर हैं। इस दुखद घड़ी में परीक्षा की तैयारी कैसे हो? परिजनों, शिक्षकों व कक्षा के साथियों ने हिम्मत बंधाई तो हादसे के भीषण दर्द को किनारे रख दोनों बच्चे किसी तरह परीक्षा की तैयारी में जुट गए हैं। लक्ष्य है - परीक्षा में अच्छे अंक लाना ताकि उनके दिवंगत मम्मी-पापा ने उनके लिए जो सपने देखे थे वे पूरे हो सकें।
अपने मम्मी-पारा को खो देने वाले सौम्य अाैर जिया की पूरी जिंदगी बदल गई है
6 दिन पहले तक माता-पिता पढ़ाते थे, अब दाेस्त के घर एग्जाम की तैयारी कर रहा है साैम्य
सौम्य सेंट पॉल्स माला रोड में चौथी क्लास में पढ़ता है। इन दिनों उसके एग्जाम चल रहे हैं। 6 दिन पहले तक उसे मां मिथलेश और पिता दिनेश साथ बैठाकर पढ़ाते थे, लेकिन अब वे नहीं हैं। इन दिनों उसके बजरंग नगर निवासी दोस्त की मां उसे पढ़ाने के लिए अपने घर लेकर जाती है। वह साेमवार काे ही अपने माता-पिता अाैर भाई की अस्थियां विसर्जित करके हरिद्वार से लौटा है। सौम्य के चाचा मनीष बताते हैं- भैया इसे डॉक्टर बनाना चाहते थे, पढ़ाई में भी यह होशियार है, लेकिन अब तो जैसे सबकुछ तबाह हो गया। बुधवार को इंग्लिश ग्रामर का एग्जाम है। तैयारी अपने दोस्त के यहां जाकर ही करेगा, क्योंकि घर का मौजूदा माहौल गमगीन है। मिस किया हुआ एग्जाम बाद में देगा।
इस बार क्लास टॉप करना चाहती थी जिया, अब खुद को मुश्किल से संभाल कर रही तैयारी
जिया इस बार क्लास को टॉप करना चाहती थी, लेकिन यह हादसा हो गया। हालांकि हादसे ने जिया को कम उम्र में ही मजबूत बना दिया है। घर वालों के हिम्मत बंधवाने पर अब वह एग्जाम की तैयारियाें में जुट गई है। जिया का कहना है कि इस बार वह क्लास जरूर टाॅप करेगी। छठी क्लास में पढ़ने वाली जिया कहती है कि उसे बड़ा हाेकर पुलिस अाॅफिसर बनना है। भास्कर रिपाेर्टर उसके घर पहुंचा ताे भीगी अांखाें से छाेटी बहन कनिका का बैग अाैर बुक्स िदखाने लगी। कनिका अाैर जिया साथ ही स्कूल जाती थीं। स्कूल से लाैटने के बाद जिया उसका हाेमवर्क कराती थी। जिया रात में उठकर मम्मी-पापा को याद करते हुए रोने लगती है। अंकल सुरेश और बूढ़े दादा बाबूलाल उसे संभालते हैं।

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