एक्सपर्ट व्यू

सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों में पीजी की सीटें बढ़ने से प्रदेश के उन छात्रों को फायदा होगा, जो एमबीबीएस के बाद पीजी की तैयारी कर रहे हैं। पिछले साल की तुलना में पीजी की सीटें काफी बढ़ी हैं। प्रदेश को विशेषज्ञ डॉक्टरों की जरूरत है। आने वाले दिनों में सीटें और बढ़ने की संभावना है।
डॉ. देवेंद्र नायक,
सीनियर गैस्ट्रो सर्जन

सभी नॉन क्लीनिकल की सीटें इसलिए खाली रहने की आशंका

निजी कॉलेज में जिन 18 सीटों को मान्यता मिली है, वे नॉन क्लीनिकल विभाग की हैं। ऐसे में पैथोलॉजी व माइक्रो बायोलॉजी की सीट को छोड़कर बाकी सीटें खाली रहने की आशंका है। सीनियर कैंसर सर्जन डॉ. युसूफ मेमन व हिमेटोलॉजिस्ट डॉ. विकास गोयल का कहना है कि आजकल एमबीबीएस के पास डॉक्टर प्रैक्टिस वाले कोर्स में एडमिशन लेना चाहते हैं। इसलिए सरकारी ही नहीं निजी मेडिकल कॉलेजों में नॉन क्लीनिकल विभागों की सीटें खाली रह जाती हैं। नेहरू मेडिकल कॉलेज रायपुर, सिम्स बिलासपुर में चार साल व एम्स में दो साल का ट्रेंड तो यही कहता है। रायपुर व बिलासपुर में एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, बायो केमेस्ट्री, फोरेंसिक मेडिसिन व पीएसएम की 95 फीसदी सीटें लैप्स हो रही हैं। एम्स में भी यही स्थिति है। इस साल एम्स में पीजी की 10 सीटें लैप्स हो गई हैं।


फीस में भारी अंतर से दूर भाग रहे हैं छात्र

सरकारी कॉलेज की तुलना में निजी में फीस में भारी अंतर है। रायपुर में पीजी की 137 सीटें हैं। वहां तीन साल की फीस महज 60 हजार रुपए है। निजी में 15 से साढ़े 25 लाख रुपए है। जब छात्र 60 हजार फीस में भी एनाटॉमी, बायो केमेस्ट्री, फिजियोलॉजी, फार्माकोलॉजी व पीएसएम में एडमिशन नहीं ले रहे हैं तो निजी कॉलेज में भारी भरकम फीस क्यों देंगे?

निजी कॉलेज की फीस

विषय फीस सालाना

पैथोलॉजी 8.5 लाख

पीएसएम 07

माइक्रो बायोलॉजी 07

फोरेंसिक मेडिसिन 06

बायो केमेस्ट्री 06

फार्माकोलॉजी 06

फिजियोलॉजी 05

एनाटॉमी 05

(फीस लाख रुपए में)

हेल्थ रिपोर्टर | रायपुर

फीस विनियामक आयोग एएफआरसी ने निजी मेडिकल कॉलेज में संचालित एमडी के विभिन्न कोर्स के लिए फीस तय कर दी है। पैथोलॉजी की एक साल के लिए साढ़े आठ लाख रुपए जबकि एनाटॉमी व फिजियोलॉजी के लिए पांच-पांच लाख रुपए फीस देनी होगी। पीजी कोर्स तीन साल का होता है। इस हिसाब से एडमिशन लेने वाले छात्रांे को एमडी के लिए 15 लाख से लेकर साढ़े 25 लाख रुपए फीस भरनी होगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भिलाई स्थित निजी मेडिकल कॉलेज को नए सत्र में एडमिशन के लिए 18 सीटों को मान्यता दी है। सभी सीटें नॉन क्लीनिकल विभाग की हैं। एएफआरसी ने पड़ोसी राज्यों के निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस का अध्ययन कर फीस निर्धारित की है। छत्तीसगढ़ में भिलाई का निजी कॉलेज पहला है, जहां पीजी कोर्स को मान्यता मिली है। इसलिए फीस निर्धारण में इस बात का ध्यान रखा गया है कि वहां सुविधाएं व फैकल्टी की सुविधा किस तरह है। जिन विभागों में पीजी की सीटों को मान्यता मिली है, उनमें एमडी पैथोलॉजी, कम्युनिटी मेडिसिन, माइक्रो बायोलॉजी, फोरेंसिक मेडिसिन, बायो केमेस्ट्री, फार्माकोलॉजी, फिजियोलॉजी व एनाटॉमी की 18 सीटें शामिल हैं। इस माह के आखिरी सप्ताह में होने वाली काउंसिलिंग में इन सीटों पर एडमिशन होगा। चूंकि कॉलेज निजी है, इसलिए वहां आधी सीटों पर मैनेजमेंट व इतनी ही सीटों पर स्टेट कोटे से एडमिशन दिया जाएगा। दोनों ही कोटे के लिए फीस एक समान होगी। ये केवल ट्यूशन फीस है। एएफआरसी ने कॉलेज प्रबंधन को होस्टल व ट्रांसपोर्टेशन के लिए अलग से फीस तय करने की स्वतंत्रता दी है। खास बात यह है कि ये फीस 2022-2023 तक यानी तीन साल के लिए तय की गई है। तीन साल बाद फीस का निर्धारण नए सिरे से होगा। फीस 10 फीसदी तक बढ़ाई जा सकती है।

Bhilai News - chhattisgarh news fee of eight and a half lakhs for one seat of pathology while five lakhs for anatomy



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