भोपाल. होम क्वारेंटाइन में रहना दाग नहीं है, बल्कि खुद की, परिवार की और समाज की सुरक्षा का घेरा है। क्वारेंटाइन में रहने का मतलब ये नहीं कि संबंधित को कोरोना वायरस का संक्रमण है।
इसी एकांतवास से कोरोना को मात दे सकते हैं....
अमेरिका से लौटने के बाद 14 दिन एक कमरे में सिमट गई मेरी दुनिया:राजीव तिवारी, ओल्ड सुभाष नगर
मैं ऑनलाइन रिसर्च पेपर पब्लिकेशन का काम करता हूं। इसी केे संबंध में जनवरी की शुरुआत में अमेरिका गया था। वहां से लाैटते वक्त मेरी फ्लाइट करीब 6 घंटे के लिए चीन के संघाई एयरपाेर्ट पर रुकी थी। 10 जनवरी काे वापस आने के बाद मैंने खुद काे हाेम क्वारेंटाइन में रखा था। इस दाैरान घर से बाहर जाना और लाेगाें से मिलना-जुलना बिल्कुल ही छाेड़ दिया था। परिवार के सदस्याें से भी पूरी तरह से दूरी बना ली थी। होम क्वारेंटाइन के इन 14 दिनाें में मेरी दुनिया पूरी तरह से एक कमरे तक ही सीमित हाे गई थी। हालांकि जनवरी की शुरुआत में काेराेना वायरस का इतना संक्रमण नहीं फैला था, इसलिए बहुत सारे लोगों को इस बारे में ज्यादा जानकारी भी नहीं थी। मैंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियाें से जानकारी लेकर होम क्वारेंटाइन के बारे में सीखा अाैर समझा था। अफसरों द्वारा दी गई सलाह को मैंने पूरी तरह से फॉलो किया और बिना किसी परेशानी के होम क्वारेंटाइन का 14 दिन का पीरियड पूरा किया। इस दौरान मैंने हर एक बात का बारीकी से ध्यान रखा। मैं बस यही कहना चाहता हूं कि जाे लाेग विदेश यात्रा करके आए हैं उन्हें हाेम क्वारेंटाइन का पालन करना ही चाहिए। क्याेंकि काेराेना का संक्रमण फैलने से राेकने के लिए यही एक मात्र तरीका है।
पत्नी-बेटे संग न्यूजीलैंड गया था, 14 की जगह 20 दिन किसी से नहीं मिला:थाॅमस मैथ्यू, अयाेध्या नगर
जनवरी में पत्नी और बेटे के साथ मैं न्यूजीलैंड गया था। तब वहां भी काेराेना वायरस के संक्रमण उतना ज्यादा नहीं फैला था। फिर भी इसके संबंध में बेटे से बहुत कुछ जानकारी ले ली थी। जब हम पति-पत्नी 5 जनवरी काे न्यूजीलैंड से वापस आए ताे अपनी और दूसरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खुद ही निर्णय लिया और अपने स्तर पर ही दाेनाें ने खुद काे होम क्वारेंटाइन कर लिया। बिजनेस के सारे काम वैसे भी घर से चलते थे, इसलिए हमें ज्यादा परेशानी नहीं हुई। इस दौरान मैंने हमारे यहां काम करने वाले कर्मचारियाें से उचित दूरी बनाकर रखी थी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जाे भी डायरेक्शन मिलते थे, उनका पूरी तरह से पालन किया और 14 दिन की बजाय 20 दिन का होम क्वारेंटाइन पीरियड पूरा किया। इस दौरान लगभग हर रोज स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी हमसे हमारे स्वास्थ्य का अपडेट लेते रहते थे। हमने बिना किसी झिझक के उनसे अपनी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी साझा की। यही वजह रही है कि न सिर्फ हम दाेनाें स्वस्थ हैं, बल्कि हमारे मिलने वाले भी स्वस्थ हैं। दूसराें के लिए मैं यही संदेश देना चाहता हूं कि किसी भी व्यक्ति के ऊपर खुद की और परिवार के साथ ही समाज की सुरक्षा की भी जिम्मेदारी हाेती है। इसलिए हमें क्वारेंटाइन का पूरी गाइडलाइन के अनुसार पालन करना चाहिए।
दुबई से लौटा तो जांच कराई, कुछ नहीं निकला, फिर भी एकांतवास में रहा:अक्षय सेलुकर, ऑर्किटेक्ट
अपने माता पिता के साथ मैं फरवरी के आखिरी सप्ताह में दुबई यात्रा पर गया था। वहां से 3 मार्च काे वापस लाैटा था। इस दौरान पहले मुंबई एयरपोर्ट पर और फिर भोपाल एयरपोर्ट पर भी हमारी जांच की गई थी। इस दौरान मैं और मेरे माता-पिता पूरी तरह स्वस्थ्य पाए गए थे। इस आधार पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने हमें घर जाने दिया था। इसके बाद भी मैंने सावधानी के तौर पर एम्स में अपनी और माता-पिता की जांच कराई। इसमें कोरोना वायरस का कोई लक्षण नहीं मिला। डाॅक्टराें ने उन्हें पूरी तरह फिट बताया था, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से 14 दिन तक हाेम क्वारेंटाइन में रहने की सलाह दी। मैंने डाॅक्टराें की सलाह काे अपनी जिम्मेदारी समझा और हाेम क्वारेंटाइन में चला गया। इस दाैरान ऑफिस के काम प्रभावित न हाें,इसके लिए ऑफिस का सिस्टम घर पर एक कमरे में लगाया और खुद काे उस कमरे तक सीमित कर लिया। पत्नी अाैर बेटी उसी घर में थीं, बावजूद इसके उनके सीधे संपर्क में नहीं रहा। हाेम क्वारेंटाइन पूरा करने के बाद अब लॉकडाउन का भी पालन कर रहा हूं। दूसराें के लिए यही संदेश देना चाहता हूं कि यदि आपने विदेश यात्रा की है या विदेश यात्रा करने वाले किसी व्यक्ति के संपर्क में अाए हैं ताे हमें अपने अाैर अपनाें के लिए क्वारेंटाइन का पालन करना ही चाहिए।

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