आ ज विश्व की जो परिस्थितियां है कोई उसमें खुशहाली के बारे में कैसे सोच सकता है। एक जाहिर सा सवाल है क्या इस समय आदमी को परिपक्व होने की जरूरत नहीं है । क्या इन परिस्थितियों में भी मैं खुश रह सकता हूं? क्या इस समय यह सोचना सही होगा कि हमें खुश रहना चाहिए? मुस्कुराना चाहिए? क्या यह सही समय है सुप्रभात या शुभ संध्या कहने का? आप मेरा विश्वास करें मैं कोई अंध अनुयायी नहीं हूं जो यह नहीं देख सकता कि आज हम किस दौर से गुजर रहे हैं?

पर मैं आपको एक बात बताना चाहता हूं मैं कुछ और देख रहा हूं वह यह है कि यह एक बहुत ही इमानदारी से भरी ये भावना है मेरी । एक अदृश्य जीवाणु जिसने पूरे विश्व को खतरे में ला दिया है ।आज पूरे विश्व को देखकर ऐसा लग रहा है जैसे सारे उद्योग समाप्त हो जाएंगें यह सारी अर्थव्यवस्था तहस-नहस हो जाएगी । हमारे दिमाग में एक ऐसा भाव आ रहा है जैसे इस विश्व में कुछ नहीं रहने वाला है ।

क्या इस प्रगति के साथ साथ हम मानवता को आगे लेकर आ पाएंगें ? एक अदृश्य जीवाणु ने हमारे जीवन पर पूरा नियंत्रण प्राप्त कर लिया है । पूरे विश्व के साथ वह हमारे जीवन में घुस गया है । लेकिन हम को इस जीवाणु से लड़ना है तो हमको बहुत सारी शक्ति प्राप्त करनी पड़ेगी । अदृश्य शक्ति हमारी तभी सहायता करेगी जब हमारे पास विश्वास हो प्रार्थना की शक्ति हो । उस अदृश्य शक्ति से हम दिव्य शक्तियां प्राप्त कर सकते हैं जो हमारे भीतर ही हैं ।

हम सभी लोगों में बहुत बड़ा विश्वास है कि वो हमारे साथ है जबकि हमारे सारे मंदिर के दरवाजे बंद हो चुके हैं, चाहे वह मंदिर हो ,मस्जिदों, चर्च हो, आज सभी बंद है केवल दरवाजे मेडिकल हॉस्पीटल के ही दरवाजे खुले हैं । आज इस घड़ी में भी सारे डॉक्टर हमारा इंतजार कर रहे हैं कि वह हमारी मदद कैसे कर सकते हैं इस खतरनाक और भयंकर चरण में भी, तो दोस्तों आज ही हम संकल्प लेते हैं कि हम समस्त डॉक्टरो का आभार व्यक्त कर सकते हैं ।

,मैं आप सभी की ओर से सबसे यह वादा करता हूँ कि आज से हम एक भी आदमी जो मेडिकल इकाई का सदस्य हो या कोई और उनका सहायक हम उनका आदर, सम्मान करेंगे, साथ रहेंगे । हम मानवता के साथ हैं हम उनका उपहास नहीं उड़ाएंगे । इस नाजुक घड़ी में आज हमारे मन में विज्ञान के लिए भी बहुत बड़ा धन्यवाद है ।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब हम किसी जीवाणु को या विषाणु को का सामना कर रहे हैं । इससे भी पहले भूतकाल में भी विज्ञान ने बहुत सारे जीवाणु पर विजय प्राप्त की है । यद्यपि आज स्थिति अलग है आज हम जिस स्थिति में हैं,वहां अभी विज्ञान को इस बीमारी को लेकर पंहुचने में समय लग रहा है। विश्वास करें हम जल्दी ही इसका भी टीका और इलाज ढूंढ लेंगे ,जैसा हमने भूतकाल में भी किया था ।शायद इसका भी इलाज मिल जाएगा और हमको फिर एक इंजेक्शन या फिर गोली ही लेनी होगी, इस बीमारी से सही होने के लिए। आज हम एकजुटता के साथ आगे बढ़ने के लिए संकट में एक दूसरे का हाथ पकड़ कर ही निकल सकते हैं जैसा हमने भूतकाल में भी किया है। आने वाली पीढ़ियों को हमे इस संकट से लड़ने का विवरण देना है कि कैसे हमने इस गंभीर संकट को अपने आपसी तालमेल से विजय प्राप्त की थी ।

यह है एक ऐतिहासिक तथ्य बन जाएगा जिसके बारे में हमेशा आगे आने वाली पीढ़ियों में याद रखेगी हर संकट के समय इसकी चर्चा होगी । मुझे एक अटूट विश्वास है हम अपनी मानवीय ताकतों में सामूहिक तौर पर शामिल कर सकते हैं अपनी निर्मल मानवीय भावनाएं। आज हमें लापरवाह नहीं बनना है, यह आपसी क्लेश करने का समय नहीं है, आज हमें छोटी से छोटी सावधानी रखनी है ।आज हमको संक्रमण से बचना है चाहे वह मास्क पहनना हो या बार-बार हाथ धोना हो या सेनेटाइजर का इस्तेमाल करना हो।

हमको इस संक्रमण को बढने से ,फैलने से रोकना होगा ताकि हमारे द्वारा यह किसी दूसरे व्यक्ति में यह ना फैल जाए। हमको अपनी व्यक्तिगत स्वच्छता का भी पूरा ध्यान रखना होगा , आज हमको अपने हाथ धोने से थकना नहीं है ।आज अगर हम सावधानी से अपने कदम उठाते हैं तो हम आने वाले पीढ़ियों को इसका एक बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत कर सकेंगे। आज हम इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रख कर ही बहुत बड़े बदलाव को ला सकेंगे तभी हम इस प्रकृति में दिखाई दे सकेंगे । धन्यवाद।

महात्रया रा,

स्प्रिचुअल गुरु

soul search**

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