ग्राम दुधली (मालीघोरी) में सोमवार को एक बेटी ने अपनी मां के निधन के बाद मुखाग्नि दी। मृतक पुहीपी बाई ठाकुर का कोई बेटा नहीं था। सिर्फ एक बेटी है। जिसने बेटे का फर्ज निभाते हुए मां को अंतिम विदाई दी। होली पर ही इस बेटी पर गम का पहाड़ टूट गया। कुछ साल पहले उनके पिता का भी निधन हो चुका है। अब परिवार में सिर्फ बेटी बची है। उसने हिम्मत नहीं हारी। किरण कक्षा 12वीं की छात्रा है। अभी बोर्ड परीक्षा भी चल रही है।
ऐसे हालात में मां के चले जाने के बाद भी उसने अपना हौसला मजबूत रखा है। साहस जुटाते हुए परीक्षा की तैयारी भी कर रही है। कुछ महीने से उनकी मां की तबीयत खराब थी। जिसके चलते होलिका दहन के दिन ही उनकी मौत हो गई। किरण ने कहा कि उनकी मां ने कभी बेटी-बेटा में फर्क नहीं किया। वह हमेशा कहा करती थी मेरा बेटा नहीं तो क्या हुआ? मेरी बेटी ही मुझे कंधा देने के लिए काफी है। जब पिता का निधन हुआ तब भी बेटी ने अपना फर्ज निभाया और आज मां चल बसी तब भी उसने अंतिम संस्कार किया।
कार्यक्रम में करेंगे मदद
गांव के मोहित देशमुख ने बताया कि ऐसे हालात में बेटी को हम हौसला तो बढ़ाएंगे ही, उनकी मदद भी करेंगे। शोक कार्यक्रम के लिए युवा मित्र मंडल मदद करेंगे।
शुरू हुई जिंदगी की परीक्षा
जनपद सदस्य राजू प्रभाकर, कृष्णा रामटेके ने कहा कि बेटी को इस तरह मुखाग्नि देख लोगों की आंखें नम हो गई थी। बेटी ने एक मिसाल पेश की है तो समाज को एक सीख भी दी है कि हमें हर हालात से निपटना आना चाहिए। कभी हार नहीं मानना चाहिए। इस बच्ची की परीक्षा चल रही है और मां की मौत के बाद जिंदगी की की परीक्षा भी शुरू हो चुकी है। परिवार में और कोई नहीं है।
मां के शव का अंतिम संस्कार करती हुई बेटी किरण ठाकुर।

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