इंदौर.इंदौर के डॉक्टराें के लिए स्थानीय कंपनी से कोरोना प्रोटेक्टिव किट बनवाई जा रही है। इसकी लागत 400 रुपए है। ऐसे 250 सूट तैयार कर स्वास्थ्य विभाग को सौंपे गए हैं। इसे चीन की तर्ज पर डबल लेयर करने के लिए अधिकारियों ने सूरत से संपर्क कर मटेरियल मंगवाने के प्रयास शुरू किए हैं। बाजार में बड़ी कंपनियाें में यही किट तीन गुना महंगे हैं।

इंदौर में सैनिटाइजर, मास्क, बॉयो मेडिकल इक्यूपमेंट, पर्सनल प्रोटेक्शन इक्यूपमेंट और आवश्यक दवाओं के लिए संभागायुक्त आकाश त्रिपाठी ने पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। कमेटी में शामिल आईडीए सीईओ विवेक ने बताया कि सूट बनाने में बड़ी चुनौती सिलाई की है। पहले से अस्पतालों और डॉक्टरों के पास बैक्टीरिया प्रोटेक्शन सूट तो हैं, लेकिन वायरस प्रोटेक्शन सूट के लिए सिलाई भी नहीं की जा सकती, जिससे वायरस वहां से प्रवेश कर सकता है।

डाॅक्टरों के प्रोटेक्टिव सूट के लिए मापदंड
  • गाउन : फुल स्लीव्ज का लंबे गाउन के पैटर्न में, जिसका हुड पूरी तरह अलग से हो। डिस्पोजेबल हो तथा उसका फेब्रिक नॉन वोवन होना चाहिए।
  • शू कवर : पॉलिस्टर वोवन फेब्रिक का शू कवर डिस्पोजेबल होना चाहिए।
  • फेस मास्क : तीन लेयर का नॉन वोवन मटेरियल का हो, जिसकी फिल्टरेबल एफिशिएंसी 3 माइक्रोन पार्टिकल साइज के लिहाज से 99 प्रतिशत हो।
  • ग्लव्ज : डिस्पोजेबल हाई क्वालिटी लेटेक्स ग्लव्ज होना चाहिए।
  • रातोरात 17 लोगों को हॉस्टल में बंद किया, बिजली-पानी भी नहीं
स्वास्थ्य विभाग का अमला कोरोना संक्रमित मरीजों के परिवार को आईसोलेट करने में बड़ी मुस्तैदी दिखा रहा है। ऐसा ही मामला शुक्रवार तड़के हुआ, जब खजराना क्षेत्र में टीम पहुंची। एक परिवार की 70 वर्षीय महिला सदस्य में कोरोना संक्रमण की पुष्टि बुधवार को ही हो गई थी लेकिन अगले दिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। शुक्रवार मध्यरात्रि करीब 3 बजे विभागीय अमला पहुंचा और परिवार के 17 लोगों को 20 किमी दूर ग्राम असरावदखुर्द के हॉस्टल में शिफ्ट किया गया। जहां बिजली-पानी की व्यवस्था भी नहीं थी। परिजन का कहना है कि सुबह हम दूध-बिस्किट लेकर गए तो वहां ताला लगा था।
गुजरात के सूरत में फंसे 180 लोगों को शुक्रवार को स्लीपर कोच से इंदौर लाया गया।


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