जयपुर (शिवांग चतुर्वेदी).सोमवार को गलत ट्रेन में बैठ बच्ची के साथ जयपुर पहुंची अस्मिता मंगलवार शाम 4 बजे भाई रितेश के साथ नागपुर के लिए रवाना हुई। डीआरएम मंजूषा जैन, स्टेशन डायरेक्टर जयप्रकाश और सीनियर डीएससी एमएम खान और स्टेशन मैनेजर देवेंद्र सिंह ने तीनों यात्रियों को बाडमेर-गुवाहाटी एक्सप्रेस के खाली रैक को जयपुर में रुकवाकर आगरा के लिए रवाना किया। आगरा से वे सड़क मार्ग से विशेष अनुमति लेकर नागपुर जाएंगे।

गौरतलब है कि अस्मिता अपनी 4 साल की बच्ची के साथ नागपुर से गलत ट्रेन में बैठ कर सोमवार सुबह जयपुर पहुंची थी। जब उसने अपने रिश्तेदारों को फोन किया, तो उन्होंने घर पर बच्चे होने का बहाना बनाकर उसे घर आने से मना कर दिया। जिसके बाद स्टेशन सुपरिंटेंडेंट डीएल तनेजा, आरपीएफ इंस्पेक्टर राजकुमार, हैड कानिस्टेबल ममता और अशोक कुमार ने महिला को गले लगाते हुए स्टेशन पर पनाह दी थी।

रितेश की जुबानी जानिए,इस परेशानी के सफर में अपने-पराए का चेहरा दिख गया

भोपाल में सिर्फ 4 घंटे की नींद ली-जयपुर पहुंचे रितेश ने भास्कर से विशेष बातचीत में बताया कि वो नागपुर में एक निजी कंपनी में सिक्यूरिटी गार्ड का काम करता है। बहिन अस्मिता को पटना इंटरव्यू के लिए जाना था और वो गलत ट्रेन में बैठकर जयपुर पहुंच गई। इसकी सूचना मुझे सोमवार सुबह करीब 7 बजे मिली। जिसके बाद रेलवे स्टेशन जाकर ट्रेन की जानकारी तो सभी स्टेशन स्टाफ ने कोई भी ट्रेन नहीं होने की सूचना दी। फिर कई टैक्सी वालों से बात की, तो उन्होंने भी दो राज्यों के बॉर्डर क्रॉस करने के चलते जाने से मना कर दिया। ऐसे में मैंने बाइक से जाने का निर्णय लिया।

सुबह 10 बजे नागपुर से रवाना हुआ। तो कई जगह पुलिसकर्मियों ने रोका, लेकिन सिक्यूरिटी गार्ड की वर्दी पहने होने के कारण कई जगह सहूलियत मिली। शाम करीब 7 बजे भोपाल में एक मित्र के यहां रुका और खाना खाया। करीब देर रात 1 बजे भोपाल से फिर रवाना हुआ। इस दौरान भोपाल से निकलते ही पुलिस ने रोक लिया। ऐसे में उन्हें पूरा वाकया बताया, तो उन्होंने मुझे सराहा और चाय पिलाकर रवाना किया। जिसके बाद राजस्थान के कोटा के पास पहुंचकर चाय-नाश्ता किया और दोपहर 2 बजे जयपुर पहुंचकर।

जयपुर का दिल बहुत बडा है, मैं इस अहसान को कभी नहीं भूल सकता

शाम करीब 4 बजे जयपुर से आगरा के लिए रवाना हुए रितेश और अस्मिता ने आरपीएफ और स्टेशन स्टाफ का धन्यवाद दिया। रितेश ने स्टेशन सुपरिंटेंडेंट डीएल तनेजा और आरपीएफ इंस्पेक्टर राजकुमार से भावुक होकर कहा कि आपने खून के रिश्ते से भी ज्यादा फर्ज निभाया है। मैं आपके और पूरे जयपुर स्टेशन स्टाफ द्वारा किए गए इस अहसान को कभी भी नहीं भूल सकता। तो वहीं अस्मिता ने कहा कि आरपीएफ और स्टेशन कर्मचारियों ने मेरी इस तरह से देखभाल की है जैसे मैं अपने पीहर आई हूं। ये मेरे जीवन का सबसे अच्छा अनुभव है और मुझे विश्वास हो गया है कि भगवान हैं। रितेश की बाइक को स्थानीय रेलवे प्रशासन द्वारा अगले दो-तीन दिन में मालगाडी से भेजी जाएगी।
प्रतीकात्मक फोटो।



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