दुर्ग.अक्टूबर 2019 से शुरू हुई एपीएल राशनकार्ड योजना के तहत अब तक सभी हितग्राहियों के हाथों तक राशनकार्ड नहीं पहुंच पाया है। राशनकार्ड को लेकर आए आवेदनों के आधार पर खाद्य विभाग द्वारा पीडीएफ तो शत प्रतिशत जारी कर चुका है, लेकिन त्रुटि सुधार के 25 फीसदी मामले अब तक अटके हुए हैं। अब इनके राशनकार्ड कवर व पन्नों को लेकर हितग्राहियों को निगम से लेकर खाद्य विभाग के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इधर निगम व खाद्य विभाग के अधिकारियों में सामंजस्य नहीं होने से वे परेशान हो रहे। खास बात यह है कि कवर व पन्ने जारी नहीं होने से निकायों द्वारा हितग्राहियों को पीडीएफ जारी नहीं किया जा रहा। इस वजह से उन्हें राशन दुकानों तक पहुंचने के बाद भी खाद्यान्न नहीं मिल पा रहा। इस प्रकार से पूरे जिले में करीब 27 हजार लोग परेशान हैं।

आखिर विवाद क्या है...

छत्तीसगढ़ शासन ने अक्टूबर 2019 से एपीएल राशनकार्ड बनाने की योजना शुरू की। योजना के तहत जिले में अब तक 1,11,075 राशनकार्ड बनाए जा चुके हैं। इनमें 25 फीसदी करीब 27 हजार कार्ड ऐसे हैं, जिनमें हितग्राहियों के नामों में त्रुटियां हैं। अकेले दुर्ग में 6750 कार्ड त्रुटिपूर्ण हैं। इन त्रुटियों को सुधारकर नया पीडीएफ जारी होना है। पीडीएफ जारी कर निकायों को भेजा जा रहा है, लेकिन राशनकार्ड कवर व अंदर लगाए जाने वाले पन्ने उपलब्ध नहीं कराए जा रहे। निकाय को वजह बता रहे हैं।

आए 1.70 लाख आवेदन, बन गए 1.11 लाख कार्ड

एपीएल राशनकार्ड बनाए जाने को लेकर शासन के निर्देश पर निकायों व पंचायत स्तर पर शिविर लगाए गए। पहले करीब 1.05 लाख आवेदन प्राप्त हुए। शिविर के बाद भी आवेदन लिया जाना जारी रहा, वर्तमान में इनकी संख्या बढ़कर करीब 1.70 लाख तक पहुंच गई। इनमें से 1,11,075 राशनकार्ड जारी कर दिए गए हैं। कुछ आवेदन अपात्र होने की वजह से निरस्त कर दिए गए। इस प्रकार शिविर के बाद भी एपीएल राशनकार्ड बनाने आवेदन लिए गए।

मिलना है 10 रुपए किलो में चावल: योजना के तहत पात्रता के आधार पर 10 रुपए प्रति किलो के हिसाब से चावल दिया जाना है। चावल 1 सदस्य को 10 किलो, 2 सदस्य को 20 किलो, 3 या 3 से अधिक सदस्य को 35 किलो तक चावल योजना के तहत दिया जाना है।

बड़ा सवाल? कार्ड ही नहीं तो आवंटन किसे किया?

वर्तमान में जिन लोगों ने एपीएल राशनकार्ड बनवाया है, उनमें से 70 फीसदी तक चावल के लिए राशन दुकान नहीं पहुंच रहे, लेकिन शासन द्वारा एपीएल के लिए 3 हजार क्विंटल तक आवंटन जारी किया है। इसे राशन दुकानों तक पहुंचाया भी जा चुका है। इसे लेकर अब तक कहीं किसी प्रकार की मॉनीटरिंग नहीं हुई है। इधर दिसंबर में जिन हितग्राहियों को कार्ड बन गए, उन तक राशनकार्ड पहुंचा नहीं। इस बीच जिन दुकानों में उनके नाम दर्ज हुए। इससे कई सवाल उठ रहे हैं।

जिले में 4052 कार्ड की राशि अब भी जमा नहीं

खाद्य विभाग द्वारा प्रति राशनकार्ड के हिसाब से डिमांड नोटिस निकायों को जारी कर रहा। दुर्ग निगम क्षेत्र में 27,391 पीडीएफ जारी हुए हैं, लेकिन दुर्ग ने 23,390 हितग्राहियों से मिली राशि 2.33 लाख रुपए ही खाद्य विभाग में जमा कराए हैं। शेष 4052 राशनकार्डों के लिए हितग्राहियों से जमा ली गई राशि 40,520 रुपए जमा नहीं कराया है। इसी प्रकार अन्य निकायों से भी राशि जमा नहीं हुई है। इस वजह से राशन कार्ड के कवर जारी नहीं किए जा रहे। इसके चलते हितग्राहियों को राशन कार्ड जारी नहीं हो पा रहा।

कहीं कोई दिक्कत नहीं, कवर जारी कर रहे हैं...
खाद्य विभाग और निगम के बीच समन्वय की कमी वजह से हितग्राही कार्ड के लिए चक्कर काट रहे हैं।


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