पोटका प्रखंड के भुरकाडीह गांव में आयोजित भागवत कथा में शाम में हरिद्वार से आए स्वामी हंसानंद गिरि महाराज की अमृतवाणी से यह क्षेत्र प्लावित हो रहा है।
भागवत कथा ज्ञान यज्ञ शिविर के दूसरे दिन गुरुवार काे स्वामी हंसानंद ने व्यासपीठ से कहा- सुकदेव महाराज ने राजा परीक्षित को भागवत कथा का श्रवण कराकर मुक्ति का मार्ग दिखाया था। उन्होंने कहा कि भागवत कथा मन के अंदर के भय को समाप्त करती है। कलयुग में भागवत कथा का बहुत ही महत्व है। बहुत बड़ा सौभाग्य है कि झारखंड के इस क्षेत्र में इस प्रकार का आयोजन ईश्वर की असीम इच्छा और अनुकंपा से संभव हो पा रहा है।
कथा के अंत में प्रसाद का वितरण किया गया। भारतीय परंपरा सनातन संस्कृति एवं अाध्यात्म यहां देखने को मिल रहा है। सभी भक्त अपने जीवन में भागवत कथा उतारकर अपने को समर्पण करना चाहते हैं। भक्ति ही एक ऐसी अवस्था है, जहां ऊंच-नीच का भेदभाव मिट जाता है। भागवत कथा का श्रवण मानव जीवन में बहुत ही अहम है। भागवत कथा सुनने से भक्ति भाव का सृजन होता है।
मां तारा मंदिर के 18वें वार्षिकोत्सव पर निकाली गई कलशयात्रा
घाटशिला | शहर के नुआगांव मुहल्ला स्थित मां तारा मंदिर का 18वां वार्षिकोत्सव मंत्रोच्चारण तथा शंखोनाद केे साथ मनाया गया। इस दौरान महिलाअों ने सुवर्णरेखा नदी तट से जल भरकर कलशयात्रा निकाली। उसके बाद विभिन्न तरह के धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। मुख्य पुजारी राजेश अवस्थी ने पूरे विधि-विधान के साथ मां का ऋंगार करके पूजा अर्चना किया। दोपहर में चंडीपाठ तथा शाम में हवन किया गया। उसके बाद भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। इस संबंध में मंदिर कमेटी के संयोजक कौशल कुमार ने बताया कि सुबह 8 बजे से महिलाओं द्वारा कलशयात्रा निकाली गई।
सुकदेव महाराज ने राजा परीक्षित को दिखाया था मुक्ति का मार्ग, कलयुग में भागवत कथा का बहुत महत्व
बहरागोड़ा में निकली साईं बाबा की पालकी शोभायात्रा
बहरागाेड़ा | बहरागोड़ा नेताजी सुभाष शिशु उद्यान में साईं परिवार बहरागोड़ा की ओर से साईं बाबा की भव्य पालकी शोभायात्रा निकाली गई। सुबह 6 बजे काकड़ आरती हुई, अपराह्न 12:30 बजे मध्याह्न आरती, 3 बजे बाबा की पालकी यात्रा, शाम 7 बजे भजन संध्या और भोग का वितरण किया गया। नेताजी सुभाष शिशु उद्यान से गाजे-बाजे के साथ निकली पालकी यात्रा बाजार में भ्रमण की। साईं परिवार बहरागोड़ा की अहम भूमिका रही।
बहरागाेड़ा : पालकी यात्रा में शामिल भक्त।



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