पिछले वर्ष 41 केंद्रों पर 50 हजार किसानों ने कराया था पंजीयन, लिंक नहीं खुलने से किसान हो रहे परेशान

शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूं, चना, मसूर, सरसों की खरीदी के लिए अभी तक पंजीयन शुरू नहीं हो सके। जबकि पंजीयन के लिए किसानों के पास पांच दिन शेष रह गए हैं। पहले तो प्रशासन द्वारा पंजीयन केंद्र ही नहीं बनाए गए, हाल ही में केंद्र बनाए तो संख्या बेहद कम कर दी। वहीं जो केंद्र बनाए गए उन पर पंजीयन शुरू नहीं हुआ। जिससे किसान परेशान हो रहे हैं। बता दें कि गेहूं पंजीयन के लिए 28 फरवरी तक का समय निर्धारित किया है। जिले में महज दो दिन पहले यह तय हुआ है कि किन किन केंद्रों पर पंजीयन होगा। सेंवढ़ा में इस बार पांच केंद्र कम कर दिए गए, इस बार यहां महज 8 केंद्रों पर आने वाले 5 दिन में 50 हजार किसानों के पंजीयन का लक्ष्य है। ऐसे में हजारों की संख्या में लोगों को उपार्जन केंद्र पर अनाज की बिक्री से हाथ धोना पड़ सकता है।

गेहूं का रकवा अधिक होने के कारण पिछले वर्ष इस कार्य के लिए जिले में 41 संस्थाओं को कार्य दिया गया था। अकेले गेहूं के लिए 50 हजार किसानों ने पंजीयन करवाया था। दूसरी ओर चना मसूर सरसों के लिए 10 केंद्र बनाए गए थे। चूंकि उपार्जन केंद्र पर फसल बेचने पर किसान को न सिर्फ अपनी उपज के अच्छे दाम मिलते है। वहीं शासन द्वारा बोनस भी दिया जाता है। इसलिए अधिकतर किसान इस सुविधा का लाभ उठाते हैं। इस वर्ष शासन द्वारा गेहूं का पंजीयन कराने हेतु 1 फरवरी से 28 फरवरी तक का वक्त तय किया। यानि 28 दिन तक यह कार्य सीधे किसान द्वारा ई उपार्जन पोर्टल पर जाकर अथवा उपार्जन केंद्र पर जाकर करवाया जा सकता है। वहीं चना मसूर सरसों के लिए 10 फरवरी से 28 फरवरी तक का वक्त तय किया गया था।

पंजीयन के लिए 15 किलोमीटर से अधिक का सफर तय करेंगे लोग

सेंवढ़ा में पिछले वर्ष सेवा सहकारी संस्था एवं भवानी मार्केटिंग सोसायटी को केंद्र बनाया गया था। इस बार केवल सेवा सहकारी संस्था के पास यह कार्य है। चूंकि सेवा सहकारी संस्था के पास उपलब्ध संसाधनों के चलते उसके द्वारा 5 दिन में 3 हजार उन किसानों के पंजीयन की भी जिम्मेदारी होगी, जिनका पंजीयन पिछले वर्ष भवानी मार्केटिंग सोसायटी के पास था। इसके अलावा खुद के पास मौजूद पंजीयन को भी दोबारा करना होगा। ऐसे में किसानों का परेशान होना स्वभाविक है क्योंकि सिर्फ 5 दिन का ही समय है। पंजीयन केंद्र कम होने से देभई के लोगों परसोंदा बामन के लोगों को 10 किलोमीटर से अधिक का सफर तय कर नहला अथवा सेंवढ़ा आना पड़ेगा। थरेट के किसानों के लिए समस्या इसलिए जटिल रहेगी, क्योंकि इस बड़े ग्राम के अलावा आसपास के चीना दिगवां के लोग भी यहीं पंजीयन कराते थे। अब चीना साइड के लोगाें के लिए 15 किलोमीटर दूर सबसे पहला पंजीयन केंद्र टोड़ा में बना है। दिलचस्प यह है कि इस बार इंदरगढ़ जैसे बड़े कस्बे में पंजीयन केंद्र नहीं है। ऐसे में इंदरगढ़ के आसपास के लोगों को भी मुरगुवां, छिकाऊ और उचाड़ ही सहारा है और यह तीनों ग्राम कई ग्रामों से 15 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित हैं।

कब होगा पंजीयन पता नहीं, परेशान हैं


बृजमोहन प्रजापति, किसान, सेंवढ़ा

ऑनलाइन भी कर सकते हैं पंजीयन


उमेश शर्मा, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी

गया था। अकेले गेहूं के लिए 50 हजार किसानों ने पंजीयन करवाया था। दूसरी ओर चना मसूर सरसों के लिए 10 केंद्र बनाए गए थे। चूंकि उपार्जन केंद्र पर फसल बेचने पर किसान को न सिर्फ अपनी उपज के अच्छे दाम मिलते है। वहीं शासन द्वारा बोनस भी दिया जाता है। इसलिए अधिकतर किसान इस सुविधा का लाभ उठाते हैं। इस वर्ष शासन द्वारा गेहूं का पंजीयन कराने हेतु 1 फरवरी से 28 फरवरी तक का वक्त तय किया। यानि 28 दिन तक यह कार्य सीधे किसान द्वारा ई उपार्जन पोर्टल पर जाकर अथवा उपार्जन केंद्र पर जाकर करवाया जा सकता है। वहीं चना मसूर सरसों के लिए 10 फरवरी से 28 फरवरी तक का वक्त तय किया गया था।


उचाड़ पंजीयन केंद्र तैयार, फिर भी अब तक शुरू नहीं हुअा पंजीयन।

सेंवढ़ा में पांच केंद्र कम

पंजीयन व खरीद का कार्य सरलता से हो एवं किसानों को अधिक इंतजार न करना पड़े इस बावत हर दस गांव के अंतर पर एक केंद्र खोला जाता है। मसलन पिछले वर्ष सेंवढ़ा इंदरगढ़ में 13 खरीद केंद्र बनाए गए। इनमें सेंवढ़ा एवं इंदरगढ़ में दो दो केंद्रों पर खरीद का कार्य चला। जिस केंद्र पर खरीद का कार्य होता है उसी पर किसानों को पंजीयन करवाना पड़ता है। इस वर्ष कलेक्टर द्वारा 13 के मुकाबले केवल 8 केंद्रों को ही पंजीयन का कार्य दिया है। खास बात यह है कि पंजीयन कार्य से ब्लाॅक की एक मात्र मार्केटिंग संस्था भवानी मार्केटिंग सोसायटी को दूर रखा गया है। दिलचस्प यह है कि इस संस्था के पास संसाधनों की पर्याप्त व्यवस्था के कारण पिछले वर्ष सेंवढ़ा ब्लाॅक की 13 संस्थाओं में सर्वाधिक 3 हजार किसानों का माल इस संस्था के द्वारा खरीदा गया था। बावजूद इसके इस बार सेंवढ़ा एंव इंदरगढ़ दोनों जगह से भवानी मार्केटिंग सोसायटी को पंजीयन एवं उपार्जन के अधिकार से वंचित रखा गया है। भवानी मार्केटिंग सोसायटी के अलावा परसोंदा बामन, चीना एवं थरेट सोसायटी को भी इस बार पंजीयन के लिए अधिकृत नहीं किया गया है।


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