शुक्रवार को जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव तनावपूर्ण माहौल में हुआ और भाजपा के समर्थन से पूर्व विधायक जनकराम वर्मा के पुत्र कांग्रेस के बागी राकेश वर्मा जिला पंचायत अध्यक्ष बन गए। राजनीतिक सौदागरों के सौदों की कहानियों से शुरू हुआ यह हाई वोल्टेज ड्रामा खत्म होने के बाद जुबानी जंग पर आकर टिक गया है। अध्यक्ष के बदले
उपाध्यक्ष के सौदे में मात खाई भाजपा की तिलमिलाहट छिपाए नहीं छिप रही है।
तीखे तेवरों के साथ भाजपा के जिलाध्यक्ष सनम जांगड़े ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कह भी दिया कि हमने जिन्हें फूलों की थाली सजाकर समर्थन दिया था, उन फरेबियों को अब कांटो पर चलकर अपना सफर तय करना पड़ेगा। उन्होंने भास्कर से कहा कि निश्चित समय पर अविश्वास प्रस्ताव लाकर छल की बुनियाद पर बनी इस ग्राम सरकार को हम गिरा देंगे। इधर पुत्र पर लगे आरोप के संबंध में पूर्व विधायक जनकराम वर्मा ने खुद को अनभिज्ञ बताते हुए किनारा कर लिया तो भाजपा के आरोपों से घिरे नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष राकेश वर्मा ने अपनी सफाई में कहा कि समर्थन के एवज में उपाध्यक्ष पद को लेकर भाजपा से कोई सौदेबाजी नहीं हुई थी, बल्कि भाजपा के लोग नहीं चाहते थे कि घोटालों के आरोपों से घिरा किसी जाति विशेष का व्यक्ति अध्यक्ष बने। इसी कारण से भाजपा ने हमारा समर्थन किया।
हमारे समर्थित सदस्यों की भी राय भाजपा की तरह ही थी। अधिकृत न होने के बावजूद पीसीसी के बड़े नेता मुझसे संपर्क कर मेरा समर्थन तो कर ही रहे थे, स्थानीय संगठन के भी कई लोग मेरे साथ थे। सभी की भावनाओं को समझने के बाद ही मैंने नाम वापस न लेकर मैदान में उतरने का फैसला किया था।
मारपीट के मामले में नहीं हुई कार्रवाई
शुक्रवार को राकेश वर्मा के समर्थक विमल साहू ने सिटी कोतवाली थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि रज्जू खान समर्थक यूसुफ खान व कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी अल्लीमुद्दीन के भाई ने उससे मारपीट की थी। इस दौरान उनके 50 हजार रुपए तथा गले में पहनी सोने की चैन गायब हो गई थी। इस संबंध में थाना प्रभारी विजय चौधरी ने बताया कि शिकायत मिली है लेकिन गवाहों के बयान व पूरे मामले की जांच के बाद ही एफआईआर दर्ज की जाएगी। मामले में शनिवार तक कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
राकेश वर्मा
सनम जांगड़े


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