जयपुर.फेसबुक और ट्विटर की तर्ज पर अब राजस्थान पुलिस भी वर्चुअल क्राइम के खिलाफ जंग शुरू करेगी। अब पुलिस प्रदेश में वायरल हाे रहे वीडियाे की जांच करेगी और बताएगी कि यह वायरल वीडियो सही है या फेक... ताकि किसी तरह का तनाव न फैले। फैक्ट चेक की जानकारी पुलिस नियमित रूप से अपने ट्विटर हैंडर पर बता रही है। जांच में वीडियाे गलत निकलने पर पुलिस इसकी सारी डिटेल अपने हैंडल पर भी शेयर कर रही है। इसे संभवतया प्रदेश में द्वेष फैलाने के इरादे से शेयर किया गया है। पुलिस इस वीडियाे काे शेयर न करने और उत्तेजित न होने की अपील भी कर रही है।
फैक्ट चेक 1 : दुष्कर्म के मामले में पुलिस कार्रवाई नहीं करने का वीडियो फेक निकला
राजस्थान की युवती बता उसके साथ दुष्कर्म करने और आराेपियाें के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं करने का वीडियाे गत दिनाें तेजी से वायरल हुआथा। पुलिस ने वीडियाे की जांच की और पाया की यह राजस्थान का नहीं है। इसके बाद पुलिस ने फेसबुक और ट्वीटर पर वीडियाे अपलाेड़ कर इसे फेक बताया। यह वीडियाे प्रदेश में द्वेष फेलाने के इरादे से वायरल किया गया है।
फैक्ट चेक 2 : बच्चा चाेरी की घटनाएं अफवाह... इसे फॉरवर्ड न करें, प्रदेश में हिंसा बढ़ रही है
प्रदेश में बच्चा चाेर गिराेह के वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहे हैं। इसमें गिरोह के लोगों से मारपीट करते हुए बताया गया था। पुलिस ने वीडियाे की जांच की ताे सभी वीडियाे फेक निकले। पुलिस ने अपने फेसबुक पर लिखा कि बच्चा चाेरी काे लेकर अफवाह फैल रही है। जिससे हिंसा की घटनाएं बढ रही है। इसलिए इस तरह की किसी भी अफवाह पर ध्यान ना दें।
बी स्मार्ट, बी एवेयर एडं बी सेफ-मैसेज फॉरवर्ड करने से पहले एक कदम पीछे जाएं, इसे जांचें
पुलिस ने अपने फेसबुक व ट्विटर पर लिखा है कि हर काेई जानता है कि फेक न्यूज या वीडियाे से समाज में अशांति फैलती है। लाेगाें काे परेशानी में डालती है और सबमें भय का माहाैल बना देती है। ऐसे में किसी भी तरह के वीडियाे पर अंधा होकर विश्वास न करें। समझदार बनें और किसी भी मैसेज को आगे भेजने से पहले एक कदम पीछे जाएं, यानी इसे जांच लें।

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