कृषि विज्ञान केंद्र भोजपुर एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिवस का जागरुकता सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

 उद्घाटन केवीके के हेड डॉ पीके द्विवेदी, सहायक निदेशक मृदा दिनेश कुमार, डीडीएम नाबार्ड रंजीत सिन्हा ने किया।

डॉ द्विवेदी ने कहा कि मृदा स्वास्थ्य का सीधा संबंध मानव स्वास्थ, भूगर्भ जल, पर्यावरण एवं बच्चों के स्वास्थ्य जुड़ा है। खेतों में असंतुलित उर्वरक के प्रयोग से फसलों का असंतुलित विकास होता है। इसके वजह से फसल के उत्पादन में कमी होती है।

मिट्टी रसायनिज्ञ उमेश साहू ने मृदा नमूना संग्रह की जानकारी देते हुए कहा कि प्रत्येक 3 वर्ष पर औसतन मृदा की जांच करानी चाहिए।

 इससे यह पता चलता है कि मिट्टी में कौन कौन सी चीज की कमी है। उसे पूरा किया जाना चाहिए। इफको के प्रबंधक विनय कुमार सिंह ने कहा कि यूरिया का प्रयोग ज्यादा होने के कारण खेतों में पौधे ज्यादा बीमार हो रहे हैं।

तथा पानी की मांग बढ़ जाती है। जिसके कारण भूजल स्तर में कमी हो रही है। इसके साथ ही उन्होंने आगे बताया कि आने वाले समय में स्वास्थ्य कार्ड के साथ जोड़ा जा रहा है। जिससे कि निर्धारित मात्रा में ही उर्वरक की आपूर्ति की जाएगी।

सहायक निदेशक मृदा दिनेश कुमार ने कहा कि आज के ही दिन भारत सरकार ने पूरे देश की मिट्टी की जांच के लिए संकल्प लिया था। इस कड़ी में आज पूरे देश में एक साथ जागरूकता शिविर का आयोजन किया जा रहा है।

 इस अवसर पर डीडीएम नाबार्ड रंजीत सिंह ने कहा कि संतुलित उर्वरक प्रयोग हो इसके लिए किसान क्रेडिट कार्ड का बड़ा ही महत्व है। जिस समय से ऋण का भुगतान करने पर 1 वर्ष के अंदर देने पर मात्र 3% ही सूद देना है इस क्रम में उन्होंने किसानों को एक सलाह दिया कि एक सही प्रोजेक्ट तैयार करके बैंकों से पैसा लेकर आए हैं। धन्यवाद ज्ञापनडॉ सुप्रिया वर्मा ने किया। मौके पर कई किसान मौजूद थे।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिवस पर कृषि वैज्ञानिक डॉ द्विवेदी ने किसानों को दी जानकारी

कृषि विज्ञान केंद्र में प्रशिक्षण में शामिल अतिथि।


Ara News - for good yield do soil test once in 3 years


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