वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में 23 शोधार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। इनका नामांकन होने के बावजूद इन शोधार्थियों को यह कहकर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है कि आपलोगों ने कोर्स-वर्क नहीं किया है। इसलिए आपका नामांकन मान्य नहीं माना जाएगा।

इधर, 12 अक्टूबर को 32 सीटों के लिए संचालित हुई पर पीएचडी की प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण हुए नए शोधार्थियों की फाइनल सूची तैयार कर नामांकन लिया जा रहा है।

 जिसको लेकर पुराने शोधार्थियों के बीच आक्रोश है। शोधार्थी निरंजन केशरी, जितेंद्र कुमार, कमलेश कुमार एवं क्लामुद्दीन सहित अन्य ने बताया कि इतिहास के विभागाध्यक्ष डा हीरा प्रसाद सिंह और छात्र कल्याण अध्यक्ष केके सिंह से गुहार लगाया गया है कि अब हमारे कॅरियर का क्या होगा? विभाग द्वारा कोर्स वर्क शुरू नहीं कराया गया, यह विभाग की लापरवाही है। इसका नुकसान हम शोधार्थी नहीं झेलेंगे। कोर्सवर्क का बहाना बताकर हमलोगों का नामांकन अवैध नहीं करार दिया जाए। यदि हमलोगों के नामांकन को विश्वविद्यालय मान्य नहीं करेगा, उस हालत में कोर्ट की शरण में जाएंगे। विश्वविद्यालय ने 26 सितंबर को पत्र जारी किया था।

बीएड कॉलेजों पर शिकंजा कसने के मामले को वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय को राजभवन ने किया तलब

आरा|बीएड कॉलेजों पर शिकंजा कसने के लिए राजभवन ने वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय को फटकार लगाया है। बीएड कॉलेजों की जांच कर प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराने पर राजभवन ने विश्वविद्यालय को तलब किया है।

राजभवन ने विश्वविद्यालय से पूछा है कि अब तक बीएड कॉलेजों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी। संयुक्त सचिव ने पुन: पत्र जारी कर कार्रवाई करने का फरमान जारी किया है।

 राजभवन ने सूबे के सभी विश्वविद्यालय को प्रत्येक माह में दो बीएड कॉलेजों का निरीक्षण कर प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का आदेश दिया था।

 पत्र के आलोक में कई बीएड कॉलेजों की जांच भी करायी गयी। परन्तु प्रतिवेदन नहीं सौंपने पर राजभवन ने तलब किया है।

 गौरतलब हो कि सिंडिकेट ने राजभवन के पत्र के आलोक में एक कमिटी बनाकर बीएड कॉलेजों के मानकों की जांच कराने का निर्णय लिया था। गठित कमेटी में सिंडिकेट व सीनेट सदस्य को रखा गया है जो प्रत्येक दो-दो बीएड कॉलेजों की जांच करेगा।


छात्रहित में हो रहा है विचार: विभागाध्यक्ष

इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ हीरा प्रसाद सिंह ने कहा कि छात्रहित पर विचार किया जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रबंधन को सारे मामलें से अवगत करा दिया गया है। इस पर अब प्रबंधन को निर्णय लेना है।

पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो नारद सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय के पत्र के आलोक में ही 23 शोधार्थियों का नामांकन लिया गया था। जिससे विश्वविद्यालय को अवगत करा दिया गया था।

2009 रेगुलेशन के आधार पर नामांकन

जिसमें प्री-पीएचडी वर्ष 2009 रेगुलेशन के आधार पर नामांकन लेने का फरमान जारी हुआ था। अधिसूचना में कहा गया था कि अर्हता रखने वाले शोधार्थी वर्ष 2009 रेगुलेशन के आधार पर 30 सितंबर तक नामांकन ले सकते हंै। उक्त तिथि के भीतर हमलोगों ने नामांकन करा लिया, अब हमारे नामांकन को अवैध बताया जा रहा है। हमलोगों को न्याय नहीं मिलने पर चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। गौरतलब हो कि इतिहास के 32 सीट पर नामांकन के लिए प्री-पीएचडी की प्रवेश परीक्षा 12 अक्टूबर को हुई थी। प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण अभ्यर्थी का इंटरव्यू लेकर विश्वविद्यालय प्रबंधन ने 32 नए शोधार्थियों की फाइल सूची प्रकाशित किया है। वे अभ्यर्थी अब विभाग में नामांकन ले रहे है। ऐसी परिस्थिति में पुराने 23 शोधार्थियों का नामांकन अधर में लटका हुआ है।

प्री पीएचडी की प्रवेश परीक्षा के पहले ही 23 शोधार्थियों लिया गया था नामांकन

हर अभ्यर्थी से पांच हजार रुपए तक विवि ने लिया था नामांकन शुल्क

वर्ष 2009 रेगुलेशन के तहत नामांकन लेेने वाले प्रति शोधार्थी से पांच हजार रूपया शुल्क लिया गया था। कुल 23 शोधार्थियों ने वर्ष 2009 रेगुलेशन के तहत नामांकन लिया है। अब इन शोधार्थियों का नामांकन अधर में लटका हुआ है। शोधार्थियों ने बताया कि 22 फरवरी तक विश्वविद्यालय प्रबंधन ने समय मांगा है। इस 23 अभ्यर्थी में नेट,जीआरएफ एवं वर्ष 2016 में प्री-पीएचडी की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले शोधार्थी है।

वीकेएसयू आरा

Ara News - lack of co work may lead to cancellation of 23 researchers anger among students


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